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उत्पादन में 12 लाख टन का आंकड़ा पार, लेकिन टार्गेट पूरा करना मुश्किल

एक वर्ष पहले
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बीएसपी ने रेलपांत उत्पादन में 12 लाख टन के आंकड़े को पार कर लिया है। यह अब तक किसी भी एक वर्ष में रेलपांत का उत्पादन करने का रिकार्ड है। हालांकि उत्पादन का रिकार्ड बनाने के बाद भी वह इस वर्ष के लिए निर्धारित की साढ़े 13 लाख टन रेलपांत की सप्लाई कर पाएगा इसकी उम्मीद कम है। क्योंकि वर्तमान वित्त वर्ष की अवधि समाप्त होने को 17 दिन ही बाकी रह गया है।

बीएसपी ने वर्तमान वित्त वर्ष 2019-20 में 13.50 लाख टन के भारतीय रेलवे के आदेश को पूरा करने के लिए प्राइम रेल्स के उत्पादन को अधिकतम करने पर अपना जोर बनाए रखते हुए प्राइम रेल्स के उत्पादन में 12 लाख टन का आंकड़ा पार कर लिया है। 12 मार्च की सुबह तक, पुराने रेल और स्ट्रक्चरल मिल और नए यूनिवर्सल रेल मिल दोनों ने संयुक्त रूप से यूटीएस 90 प्राइम रेल्स के 12.14 लाख टन उत्पादन का रिकॉर्ड बनाया। लेकिन इसके बाद भी टारगेट को पूरा कर पाना अभी भी मुश्किल बना हुआ है। वित्त वर्ष की समाप्ति पास है, ऐसे में संशय बना हुआ है। गौरतलब है कि बीते वित्त वर्ष में संयंत्र ने 9.85 लाख टन के उत्पादन का रिकॉर्ड बनाया था। उस वक्त रेलवे ने 10 लाख टन रेलपांत सप्लाई का आर्डर दिया था।

रिजेक्शन में आ रही कमी

यूआरएम के तीसरे जन्मदिन पर सीईओ अनिर्बान दासगुप्ता ने कहा था कि भारतीय रेलवे के आर्डर से हमें बेहतर करने की शक्ति मिल रही है। इन तीन वर्षों में यूआरएम ने गति पकड़ ली है और अब हमें प्रतिमाह 60,000 टन प्राइम रेलपांत की रोलिंग का प्रण लेना है।

पीएमओ की है नजर

सेल प्रबंधन, इस्पात मंत्रालय से लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय तक की नजर बीएसपी पर है। इसलिए उसे दिन-प्रतिदिन रेलपांत के उत्पादन के अपने लक्ष्यों को साधकर निरंतर आगे बढ़ना है। पुराना रेल मिल तो पूरा तरह साथ दे ही रहा है। अब यूआरएम के भी पटरी पकड़ने के बाद उत्पादन की बाधा दूर हुई है।

बीते वर्ष से उत्पादन में 52 प्रतिशत की वृद्धि

बीएसपी द्वारा पिछले वित्तीय वर्ष के मुकाबले वर्तमान वित्तीय वर्ष के इसी अवधि में 35 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। वहीं इसी अवधि में लांग रेल्स के उत्पादन में 52% वृद्धि दर्ज की गई है। फरवरी में 1,18,865 टन प्राइम रेल्स का उत्पादन प्राप्त हुआ। अब तक का सर्वश्रेष्ठ औसत दैनिक उत्पादन 4099 टन/प्रतिदिन रहा।

रेलवे की 20 लाख टन आर्डर की तैयारी चल रही

नवंबर में सेल चेयरमैन अनिल कुमार चौधरी कार्मिकों के साथ सीधे संवाद में पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि वर्तमान आर्थिक संकट से निपटने के लिए हर हाल में रेलवे की डिमांड को पूरा करना होगा। रेलवे अगले साल 16 लाख टन रेलपांत का आर्डर देगा। इतना ही नहीं उसकी तैयारी अगले दो वर्षों में डिमांड बढ़ाकर 20 लाख टन करने की है। ऐसे में बीएसपी में जिम्मेदारी बढ़ जाएगी।

समस्या: वर्तमान वित्त वर्ष समाप्त होने में केवल 17 दिन बाकी

बीएसपी के एसएमएस-3 में भी बढ़ रहा प्रॉडक्शन

संयंत्र की मॉडेक्स इकाई स्टील मेल्टिंग शॉप-3 ने फरवरी में अपना सर्वश्रेष्ठ मासिक उत्पादन 1,56,878 टन प्राप्त किया, जो कि जनवरी में 1,52,191 टन के पिछले सर्वश्रेष्ठ के मुकाबले अधिक है। एसएमएस-3 ने जनवरी, 2020 में 29 हीट्स के औसत दैनिक उत्पादन के मुकाबले फरवरी, 2020 में प्रतिदिन 32 हीट्स का औसत उत्पादन किया।

संकट से उबरना आसान

स्टील मार्केट के मंदी की चपेट में होने और कंपनी के वित्तीय संकट में फंसने के बाद रेलवे के एक्सक्लूसिव आर्डर पर ही ऐसा रह गया था जिसके भरोसे प्रबंधन वर्तमान समस्या से उबर सकता था लेकिन उसके सामने सबसे बड़ी समस्या यूआरएम में आए दिन आ रही तकनीकी खामियां थी। जिससे रेलपांत का उत्पादन रेटेड केपिसिटी के मुताबिक नहीं हो पा रहा था।

बीएसपी ने रेलपांत के उत्पादन में नया कीर्तिमान स्थापित किया है।
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