सुंदरनगर से मंदिरहसौद गए टोल नाके का भी विरोध, लोग निकालेंगे रायपुर तक करीब 20 किमी की रैली

Bhilaidurg News - प्रशासनिक रिपोर्टर | रायपुर राजधानी के सुंदरनगर में रिंग रोड पर लगाया जा रहा टोल नाका करीब पांच साल के विवाद के...

Bhaskar News Network

Apr 17, 2019, 06:20 AM IST
Kumhari News - chhattisgarh news protests against toll naka from sundaranagar people will take out a rally of about 20 km from raipur
प्रशासनिक रिपोर्टर | रायपुर

राजधानी के सुंदरनगर में रिंग रोड पर लगाया जा रहा टोल नाका करीब पांच साल के विवाद के बाद शहर से हटा और जैसे ही यह नई राजधानी से लगे मंदिरहसौद से कुछ दूर बनना शुरू हुअा, वहां भी बवाल मच गया है। पिछले एक हफ्ते से वहां के लोग, जनप्रतिनिधि और व्यापारी इस टोल नाके का विरोध कर रहे हैं। सभी ने नाके बनाने वाली कंपनी से दो टूक कह दिया है कि वे टोल नाका नाका नहीं बनने देंगे। नाके के विरोध में लोग मंदिरहसौद से रायपुर कलेक्टोरेट तक करीब 35 किमी की रैली निकालने की तैयारी कर रहे हैं, यानी विरोधस्वरूप यहां तक लोग पैदल अाएंगे और कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर टोल नाका नहीं खोलने की मांग करेंगे। फोरलेन बनाने वाली कंपनी डीएस कंस्ट्रक्शन ने कुम्हारी से आरंग तक 45 किमी नई फोरलेन सड़क बनाई है। इसी सड़क का टैक्स वसूलने के लिए करीब पांच साल पहले अारंग के पास रसनी तथा सुंदरनगर में टोल नाके का काम शुरू हुअा। रसनी में नाका बन गया और टोल वसूली भी शुरू हो गई, लेकिन सुंदरनगर का नाका पूरा ढांचा खड़ा हो जाने के बावजूद विरोध में बुरी तरह फंस गया।

लगातार चार साल तक लोगों और राजनीतिज्ञों ने इसे शुरू नहीं होने दिया। अंतत: पिछली सरकार के कार्यकाल में इसे बंद करने का फैसला ले लिया गया। यहां से नाका मंदिरहसौद के पास ले जाने का फैसला लिया गया।

काफी करीब रहेंगे दोनों टोल नाके

मंदिरहसौद और नवागांव के बीच टोल नाका बनाने का काम महीनेभर पहले शुरू हुअा, लेकिन ढांचा खड़ा होने से पहले ही यहां भी विवाद शुरू हो गया है। पूर्व जिला पंचायत सदस्य परमानंद जांगड़े, सामाजिक कार्यकर्ता बिनेश ढीढी, राकेश जायसवाल, विनीत पांडे, बनवाली यादव, पवन धीवर आदि ने बताया कि दोनों छोर की सीमा यानी कुम्हारी से आरंग के बीच चार-पांच किमी में दो टोल नाके बनने थे। इसीलिए सुंदरनगर और रसनी (आरंग) को चुना गया था। कंपनी अब इसी नियम को तोड़ रही है क्योंकि मंदिरहसौद और रसनी के बीच की दूरी 14 किमी से कम है। ऐसे में इतने नजदीक दो टोल नाके बनाने से पूरे इलाके के लोगों को अार्थिक चोट पहुंचेगी।

भवन निर्माण सामग्री महंगी होगी

अारंग से मंदिरहसौद के बीच रेत की खदानें और गिट्टी वाले क्रशर बड़ी संख्या में हैं। राजधानी की जरूरत यहीं से पूरी हो रही है। जनप्रतिनिधियों का कहना है कि दो टोल नाकों की वजह से गौण खनिज ले जाने वाली गाड़ियां प्रभावित होंगी। इससे रेत-गिट्टी की कीमतों पर भी असर पड़ेगा। इसलिए पूरे इलाके के लोग इसके विरोध में हैं और जल्दी ही मंदिरहसौद से रायपुर तक रैली निकालने वाले हैं। लोगों के विरोध की वजह से यहां भी नाके का काम रुक गया है। जहां तक प्रशासन का सवाल है, चुनावी अाचार संहिता की वजह से इस मामले में सरकारी अमले ने हस्तक्षेप नहीं किया है।

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