ट्रैक मरम्मत करा रहे रेल इंजीनियर की ट्रेन की चपेट में आने से मौत, एक घायल

Bhilaidurg News - हथबंद और भाटापारा रेलवे स्टेशन के बीच पटरियों पर शुक्रवार रात करीब एक बजे हादसा हो गया। यहां रेलवे के सिग्नल एवं...

Bhaskar News Network

Aug 18, 2019, 07:00 AM IST
Gondia News - chhattisgarh news rail engineer doing track repair dies due to train hit one injured
हथबंद और भाटापारा रेलवे स्टेशन के बीच पटरियों पर शुक्रवार रात करीब एक बजे हादसा हो गया। यहां रेलवे के सिग्नल एवं दूरसंचार विभाग की टीम अफसरों की निगरानी में मरम्मत का काम कर रही थी। इसी दौरान मिडिल लाइन पर धड़धड़ाती ट्रेन की चपेट में आने से इंजीनियर अमूल्य कुमार चांद की मौके पर ही मौत हो गई। साथ ही एक अन्य रेलकर्मी चंद्रप्रकाश सिंह बुरी तरह से घायल हो गए, जिनका इलाज निजी अस्पताल में चल रहा है। इस हादसे की सूचना तड़के सुबह आग की तरह पूरे रायपुर रेल मंडल से लेकर जोन भर में फैल गई। रेलकर्मियों का गुस्सा फूटा और जगह-जगह रेलवे प्रशासन के मनमाने रवैए के खिलाफ प्रदर्शन शुरू हो गया। मंडल मुख्यालय में रेलकर्मियों ने डीआरएम कौशल किशोर सहित अन्य अफसरों को घेर लिया। ट्रेन की चपेट में इंजीनियर की मौत के लिए कर्मियों ने सीनियर डीएससीई अंकित श्राफ को पूरी तरह से दोषी बताया।

अचानक मिडिल लाइन पर पहुंची गोंदिया-बरौनी एक्सप्रेस : डाउन लाइन के ट्रैक में सिग्नलिंग व दूरसंचार से संबंधित मेंटेनेंस का काम रात 11.15 से सुबह 4.15 तक होना था। यहीं पर सीनियर सेक्शन इंजीनियर अमूल्य और उनकी टीम के चंद्रप्रकाश सिंह और धीरज मिश्रा काम कर रहे थे। बातचीत के दौरान तीनों मिडिल लाइन पर चढ़ गए, लेकिन पलक झपकते ही मिडिल ट्रैक पर ही रायपुर से जाने वाली तेज रफ्तार गोंदिया-बरौनी एक्सप्रेस सामने आ गई। धीरज मिश्रा ने छलांग लगाई और अन्य कर्मियों को आवाज लगा कर हटने को कहा, लेकिन इसी दरम्यान ट्रेन ने इंजीनियर को अपने चपेट में ले लिया और दूसरा कर्मी छिटककर पटरी किनारे जा गिरा।

बिना रेस्ट के ही करते हैं काम, इसलिए गंवानी पड़ी जान :

सिग्नल विभाग के कई अफसरों व कर्मियों ने भास्कर से इस हादसे के कारणों को बताया। बताया गया कि बिना रेस्ट दिए कर्मियों से दिन-रात काम कराया जाता है। विरोध करने पर ट्रांसफर की धमकी दी जाती है और सीआर खराब कर दिया जाता है। इतना ही नहीं बड़े अफसरों के तानाशाही रवैए से परेशान होकर दर्जनों रेलकर्मी गंभीर बीमारियों से ग्रसित हो गए हैं। रात को ट्रैक पर काम करते समय पर्याप्त रोशनी नहीं होता। इस बारे में शिकायत करने पर विभागीय स्तर पर कोई ध्यान देने को तैयार नहीं होता है। सिग्नल एवं दूर संचार विभाग के कर्मचारियों ने बताया कि इसके लिए सीनियर डीएससीई को पूरी तरह दोषी हैं, क्योंकि बीमार होने पर किसी को छुट्टी नहीं देते।

सात दिन में रिपोर्ट

अफसरों की मनमानी के बारे में कर्मियों ने जमकर शिकायत की। रेलकर्मी इतने गुस्से में थे कि डीआरएम व अन्य अफसरों ने आनन-फानन में जांच कमेटी का गठन किया और सात दिन के भीतर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया। इसके अलावा डीआरएम ने सोमवार को विभागीय बैठक बुलाई है, ताकि इस हादसे के कारण को नजदीक से समझा जा सके। इधर, इंजीनियर की दुखद मौत के बाद जोन भर के इंजीनियर लामबंद हो रहे हैं।

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