सुच्चा सिंह बने दुर्ग के पहले मेयर, 13 साल तक कार्यकाल 1 साल था, 1999 से हुआ 5 साल

Bhilaidurg News - मेयर के प्रत्यक्ष चुनाव के साथ कार्यकाल 5 वर्षों के लिए किया गया। अब तक दुर्ग निगम में 4 बार मेयर के लिए प्रत्यक्ष...

Dec 07, 2019, 08:00 AM IST
Durg News - chhattisgarh news sucha singh became the first mayor of the fort the tenure was 1 year for 13 years 5 years since 1999
मेयर के प्रत्यक्ष चुनाव के साथ कार्यकाल 5 वर्षों के लिए किया गया। अब तक दुर्ग निगम में 4 बार मेयर के लिए प्रत्यक्ष चुनाव हुए। चारों बार भाजपा के प्रत्याशी को ही जीत मिली। इससे पहले अप्रत्यक्ष चुनाव होते रहे, जिनमें पार्षद दल ही मेयर तय करता रहा। अब की बार पुन: पार्षद दल का नेता ही मेयर होगा। दिलचस्प बात यह है कि वर्ष 1994 में निर्दलीय चुनाव जीतने के बाद आरएन वर्मा निगम के मेयर बने। उनका कार्यकाल केवल एक वर्ष का था, लेकिन तत्कालीन मध्य प्रदेश शासन ने संशोधन करते हुए निगम के मेयर का कार्यकाल 5 वर्षों के लिए तय कर दिया। इस बीच निर्वाचन नहीं हुए और वर्मा 5 सालों तक मेयर रहे। वर्ष 1999 में पहली बार मेयर का प्रत्यक्ष चुनाव हुआ और बीजेपी से सरोज पांडेय जीतकर आईं। बता दें कि 38 साल के दुर्ग निगम इतिहास में चार बार भाजपा को मेयर की कुर्सी मिली है।

वर्ष 1918 में बना था दुर्ग पालिका

दुर्ग पिछले करीब 100 सालों से निकाय की भूमिका में है, वर्ष 1918 में दुर्ग को पालिका का दर्जा मिला, वहीं वर्ष 1981 में दुर्ग नगर पालिक निगम बना

दुर्ग में जब-जब मेयर के अप्रत्यक्ष चुनाव हुए, कांग्रेस को मिली जीत, प्रत्यक्ष में भाजपा आगे

सुच्चा सिंह ढिल्लो 10 अगस्त 1983 से 5 नवंबर 1983 तक दुर्ग निगम के पहले महापौर रहे।

सरकार ने कार्यकाल पांच वर्ष के लिए बढ़ाया

आलमदास गायकवाड़ 23 नवंबर 1983 से 8 फरवरी 1984 तक गायकवाड़ मेयर बने।

1987 के बाद चुनाव लंबे समय तक चुनाव नहीं हुए। प्रशासन बैठाया गया। वर्ष 1994 में हुए चुनाव में आरएन वर्मा मेयर चुने गए। वे निर्दलीय पार्षद चुनकर आए। पार्षद दल ने उन्हें अपना नेता चुना, उनका कार्यकाल एक वर्ष के लिए था, लेकिन राज्य शासन ने निगम का कार्यकाल 5 वर्षों के लिए तय कर दिया।

गोविंद धींगरा 09 अगस्त 1984 से 8 अगस्त 1985 तक धींगरा मेयर बने।

शंकरलाल ताम्रकार 09 अगस्त 1985 से 7 अगस्त 1987 तक दो बार ताम्रकार महापौर रहे।

आरएन वर्मा 1994 में निर्दलीय पार्षद बने। फिर मेयर बन गए। 1999 तक कुर्सी संभाली।

पहली बार प्रत्यक्ष चुनाव हुए दिसंबर 1999 में, तब से भाजपा का कब्जा

वर्ष 1999 में पहली बार निगम के मेयर के लिए प्रत्यक्ष चुनाव हुए। जनता ने पहली बार महापौर चुनकर दिसंबर 1999 में सरोज पांडेय को निगम में भेजा। वे 6 जनवरी 2000 से 5 जनवरी 2005 तक पहली बार और 6 जनवरी 2005 से 4 जनवरी 2010 तक दूसरी बार महापौर निर्वाचित हुईं। इसके बाद डॉ. शिव कुमार तमेर निर्वाचन हुए। उन्होंने 5 जनवरी 2010 से निगम की बागडोर संभाली। वे 4 जनवरी 2014 तक निगम के मेयर रहे। उसके बाद 4 जनवरी को ही चंद्रिका चंद्राकर मेयर बनी। वर्तमान में पदस्थ हैं।

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