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पीएम आवास के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में नए सिरे से होगा सर्वे, जनपद ने सरकार को भेजा प्रस्ताव

एक वर्ष पहले
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प्रधानमंत्री आवास योजना की अपात्रों की सूची में गड़बड़ी को देखते हुए फिर से सर्वे करवाई जा रही है। जिनके पास मोपेड है और ईंट से बनी मकानों के ऊपर खपरैल वालों को आवास नहीं दिया। इन लोगों को भी आवास देने फिर से सर्वे करवाया जा रहा है। जनपद पंचायतों में शिकायत के बाद नए पदाधिकारियों ने कलेक्टर के समक्ष आपत्ति की।

प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर प्रदेश में नई सरकार बनने के बाद ग्रामीण सरकार चलाने वाले जनप्रतिनिधियों की सोच बदली है। दुर्ग जिले के तीनों जनपद पंचायतों में कांग्रेस समर्थित अध्यक्ष-उपाध्यक्ष बैठे हैं। इन जनपदों में 24-24 सदस्य हैं और उसमें कांग्रेस के सदस्य बहुतायत हैं। मौजूदा पदाधिकारी और सदस्यों ने इस योजना के अपात्रों की सूची को फिर से खंगलवा रहे हैं।

इधर शहरी क्षेत्र में मोर जमीन-मोर मकान योजना संचालित है। इसके तहत जिनके पास जमीन संबंधी जरूरी दस्तावेज है। उन्हें सरकार फंड दे रही है। सबसे ज्यादा भिलाई निगम क्षेत्र में मोर जमीन मोर मकान के तहत हितग्राहियों को लाभान्वित किया गया है।

पात्रता के लिए चार सदस्यीय टीम कर रही सर्वे

प्रधानमंत्री आवास योजना के अपात्रों की सूची फिर से सर्वे करवाने के लिए चार सदस्यीय टीम बनाई गई है। इस टीम में एडीओ, ग्राम पंचायत सचिव, करारोपण अधिकारी और रोजगार सहायक को शामिल किया गया है। इस टीम ने सर्वे भी शुरू कर दी है। शुरूआत दुर्ग जनपद पंचायत क्षेत्र से की गई है। टीम घरों का मौका मुआयना कर फोटो ले रही है। आसपास रहने वालों से इसका सत्यापन रिपोर्ट तैयार कर रही। इस रिपोर्ट के बाद पीएम आवास निर्माण से संबंधित जरूरी जानकारी दी जाएगी। साथ ही खाते में राशि जमा कराई जाएगी।

अपात्र सूची की जांच सर्वे

देवेन्द्र देशमुख, अध्यक्ष जनपद पंचायत दुर्ग

आवास बनाने 1 लाख 20 हजार रुपए मिलेंगे

प्रधानमंत्री आवास योजना में पात्र हितग्राहियों को ग्रामीण क्षेत्र में एक लाख 20 हजार रुपए मिलते हैं। इसके लिए यह जरूरी है कि हितग्राही के स्वयं की जमीन होना चाहिए। अकेले दुर्ग जनपद पंचायत में 1483 अपात्रों की सूची है।

चर्चा: लेनदेन नहीं किया तो किया अपात्र

प्रधानमंत्री आवास योजना में ऐसे भी प्रकरण सामने आए हैं जिनका इसलिए अपात्र घोषित कर दिया गया कि उन्होंने लेनदेन नहीं किया। इन प्रकरणों की जांच भी जनपद पंचायतों के पदाधिकारियों द्वारा करवाई जा रही है। ग्राम पंचायतों के कई तत्कालीन सरपंचों की मनमानी के चलते इस तरह के अपात्र प्रकरणों को दुरूस्त करने के लिए दोबारा सर्वे करवाई जा रही है। सरपंचों ने भी इसकी शिकायत की थी।

सर्वे का मापदंड बदलेगा: पात्रताधारियों की फिर बनेगी सूची

खपरैल वाले मकानों को पात्र करने की तैयारी

प्रधानमंत्री आवास योजना के निर्देश में वाहन का उल्लेख हैं और ईंट युक्त मकान में सीमेंटेड छत वालों को अपात्र माना गया है। जनपद पदाधिकारियों ने इस नियम को अस्पष्ट माना है। पदाधिकारियों का तर्क है कि वर्तमान में गरीबी रेखा वाले के यहां 50 सीसी की लूना और मोपेड हैं। गरीब लोगों ने अपनी सब्जी का व्यवसाय करने या फिर मजदूरी करने आने-जाने का काम के लिए सेकंड हेंड खरीदी है। ईंट वाली मकान में मिट्टी के गारे का उपयोग किया है। ऐसे मकानों का सर्वे किया जाएगा।

जिले में 4 हजार से ज्यादा है अपात्र घोषित

पीएम आवास योजना से आवास लेने के लिए पिछले साल याने वर्ष 2019 में आवेदन किए गए 4 हजार से ज्यादा लोगों को अपात्र घोषित किया गया। जिनके घरों में वाहन मिला उन्हें आवास योजना के दायरे से बाहर कर दिया। जिनके मकान ईंट से बने मिले उसे भी अपात्रों की सूची में रखा। दुर्ग, पाटन और धमधा जनपद के अंतर्गत अपात्रों की बनी सूची को फिर से सर्वे करवाएंगे।

दुर्ग निगम क्षेत्र में मोर जमीन-मोर मकान के तहत बना है आवास।
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