नीला रंग मिलाकर नकली सेनिटाइजर बनानेका शक, 5700 लीटर जब्त, फैक्ट्री सील

Bhilai News - 5 हजार लीटर अल्कोहल : पूछताछ में पता चला है कि फैक्ट्री संचालक ने सेनिटाइजर बनाने के लिए 26 मार्च को रॉ मटेरियल...

Mar 31, 2020, 06:47 AM IST
5 हजार लीटर अल्कोहल : पूछताछ में पता चला है कि फैक्ट्री संचालक ने सेनिटाइजर बनाने के लिए 26 मार्च को रॉ मटेरियल मंगवाया था। वहां से 5000 लीटर अल्कोहल व 700 लीटर दूसरा केमिकल मिला है। ड्रग विभाग के अधिकारियों ने बताया कोई फैक्ट्री संचालक शासन की मंूजरी के बिना सेनिटाइजर नहीं बना सकता। सेनिटाइजर ड्रग की श्रेणी में आता है। इस वजह से संचालक गुप्ता के खिलाफ ड्रग एक्ट के तहत कार्रवाई की जाएगी। हाल के दिनों में कोरोना के कारण सेनिटाइजर की मांग बढ़ गई है। थोक दवा बाजार व मेडिकल स्टोर्स में सेनिटाइजर की जबरदस्त कमी है। इस कारण राज्य सरकार को दो डिस्टलरीज कंपनियों को सेनेटाइजर बनाने की अनुमति दी गई है। इसमें एक दुर्ग व दूसरा बिलासपुर की कंपनी है। उनके सेनेटाइजर अब बाजार में आ गए हैं। 500 एमएल के लिए 250 रुपए रेट रखा गया है। एक लीटर 500 रुपए कीमत तय की गई है।

दलदल सिवनी स्थित फैक्ट्री में पानी में नीला रंग मिलाकर नकली सेनिटाइजर बनाने के शक में छामा मारा गया। फैक्ट्री में जिस-जिस मटेरियल का उपयोग किया जा रहा था, उन सभी का सैंपल जब्त कर लिया गया है। काली बाड़ी स्थित लेबोरटरी में उसकी जांच करवायी जा रही है। फैक्ट्री संचालक के पास लाइसेंस भी नहीं है। इसी वजह से माना जा रहा है कि घटिया सामग्री से सेनिटाइजर बनाया जा था।

फैक्ट्री संचालक नीलेश गुप्ता छापे के बाद वह फरार है। ड्रग कंट्रोलर एसएन राठौर ने बताया कि सेनेटाइजर नकली है या नहीं, इसकी पुष्टि के लिए सैंपल जांच के लिए कालीबाड़ी स्थित लैब भेजा गया है। रिपोर्ट 10 से 12 दिनों में आ जाएगी। तब तक फैक्ट्री सील रहेगी। रिपोर्ट आने के बाद फैक्ट्री मालिक के खिलाफ ड्रग एक्ट के तहत कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल फैक्ट्री संचालक को बयान लेने के लिए तलाश किया जा रहा है। फैक्ट्री के बारे में ड्रग विभाग को शिकायत मिली थी कि दलदल सिवनी में नकली सेनिटाइजर बनाया जा रहा है। ड्रग विभाग के अफसरों ने अपने स्तर पर पड़ताल की। सूचना पक्की होने के बाद सोमवार को तैयारी के साथ छापा मारा गया। अफसरों ने वहां पहुंचकर संचालक के बारे में जानकारी मांगी। इसकी सूचना मिलते ही फैक्ट्री संचालक भाग गया।

ड्रम में भरा मिला रंग

फैक्ट्री में ड्रम में कलर भरकर रखा गया था। उसी से सेनिटाइजर बनाया जा रहा था। वहां कई बोतलें सेनिटाइजर मिली। स्पॉट पर ही उसकी जांच की गई। अफसरों के अनुसार उसमें किसी तरह की स्मैल नहीं आ रही थी। हाथों में उपयोग करने से किसी तरह का अहसास भी नहीं हो रहा था। इस कारण इसके नकली होने की आशंका है।

प्रदेश का यह पहला मामला


प्रदेश में नकली सेनेटाइजर या बिना लाइसेंस के बनाने का यह पहला मामला है। हालांकि यहां नकली दवा का भंडाफोड़ हो चुका है। देवपुरी स्थित शिशुपाल मंधानी के गोदाम से नकली एंटीबायोटिक दवा जब्त की गई थी। लैब की जांच में इसकी नकली होने की पुष्टि हुई थी। मंधानी अभी तक फरार है।


दलदल सिवनी में नकली सेनिटाइजर की आशंका पर फैक्टरी सील।

हो सकती है सात साल की कैद

सेनिटाइजर नकली पाए जाने पर फैक्ट्री संचालक को सात साल की कैद हो सकती है। ड्रग एक्ट में इसका प्रावधान है। मामले की सुनवाई डीजे कोर्ट में होगी। अधिकारियों ने बताया कि ड्रग संबंधित कोई दवा या सेनिटाइजर नकली पाया जाता है तो दुकान मालिक को दोबारा जांच कराने का कोई प्रावधान नहीं है। जबकि फूड में ऐसा प्रावधान है। एक माह के भीतर वे लैब में जांच करवा सकता है। दवा नकली होने की पुष्टि होने पर मामला सीधे कोर्ट में जाएगा।

नकली सेनिटाइजर से नहीं मरता वायरस

नकली सेनिटाइजर से कोरोना का वायरस नहीं मरेगा। डॉक्टरों के अनुसार यह जान के साथ खिलवाड़ है। सेनिटाइजर में कम से कम 60 फीसदी अल्कोहल होना चाहिए। इससे कम अल्कोहल रहने पर वायरस नहीं मरेगा। ऐसे सेनेटाइजर से 20 सेकंड तक हाथ धोना जरूरी है। ये आदर्श समय है। इससे कम समय हाथ धोने पर वायरस के मरने की आशंका कम होती है। अगर घर में हैं तो सेनिटाइजर जरूरी नहीं। कोई भी नहाने के साबुन से दिन में 10 बार हाथ धोएं।

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