दुखी पिता ने कहा: न जाने किससे लगाई जानलेवा शर्त, हम भांप नहीं पाए और अपना बेटा खो दिया

Bhilai News - भास्कर अलर्ट:- इलेक्ट्रानिक गजट हाथ में आते ही बच्चों का ध्यान भटकना शुरू होता है मेरी छोटी बेटी वाशरूम गई तो...

Feb 23, 2020, 06:40 AM IST
Bhilai News - chhattisgarh news the grieving father said do not know with whom a fatal condition we could not detect and lost our son
भास्कर अलर्ट:- इलेक्ट्रानिक गजट हाथ में आते ही बच्चों का ध्यान भटकना शुरू होता है

मेरी छोटी बेटी वाशरूम गई तो वह अंदर से बंद था। खिड़की से झांककर देखा तो देव फंदे पर लटक रहा था। उसकी चीख ही निकल गई। उसकी चीख सुनकर हम सभी बाथरूम पहुंचे तो चीखने का कारण समझ में आया। उसे देखते ही जोर से झटका लगा। समझ में ही नहीं आया कि क्या हो गया? देव ने यह आत्मघाती कदम क्यों उठाया? ऐसी किसी घटना का अनुमान होता है तो उसे समझाते। कुछ नहीं कर पाए। घटना की जानकारी पुलिस को दी।

पुलिस के साथ उसके कमरे की तलाशी ली तो कई चीजें सामने आईं। उसके बैग में एक नोटशीट मिला। उसमें तीन पेज में अलग चीजों का जिक्र है। इससे लगता है कि ब्लू वेल गेम की तरह ही देव किसी सहपाठी या दोस्त से खतरनाक शर्त लगा रहा था। अंतिम शर्त पूरा करने के लिए हस्ताक्षर से पहले किंग लिखा। सप्ताहभर से वह किंग लिखी अंगूठी पहन रहा था।

इससे पहले भी हुई है आत्महत्या की घटना

पिछले तीन महीने में सेक्टर-6 स्थित स्कूल के विद्यार्थी द्वारा आत्महत्या करने वाली घटना सामने आई है। इससे पहले पिछले साल नंबर महीने में सिंधिया नगर निवासी 9वीं कक्षा की छात्रा अनिष्ठा सिन्हा ने अपने नाना-नानी के हुड़कों स्थित घर में फांसी लगाकर सुसाइड कर लिया। उस घटना के इतने महीनों बाद भी पुलिस जांच में आत्मघाती कदम उठाने के पीछे की वजह का खुलासा नहीं कर सकी है। इसी तरह परिजन भी बेटी के अकारण चले जाने से सदमे को झेल रहे हैं।

फिलहाल अभी कुछ भी कहना संभव नहीं


पैरेंट्स को भी काउंसिलिंग की है जरूरत : डॉ. शर्मा

साइंस कॉलेज में समाज शास्त्र विभाग की डॉ. सुचित्रा शर्मा ने कहा कि आत्महत्या जैसा कदम मामूली बात नहीं है। कोई भी व्यक्ति ऐसा नहीं है, जो आसानी से आत्मघाती कदम उठा ले। बच्चों पर शुरू से ही माता पिता को ध्यान देने चाहिए। उन पर जबरदस्ती दबाव नहीं डालना चाहिए। जिस दिन बच्चा इलेक्ट्रानिक गजट में रुचि लेता है, उसी दिन से उसके भटकने की संभावना बढ़ जाती है। इससे मातापिता के बीच कम्युनिकेशन गेप शुरू हो जाता है। इन दिनों देखने में आता है कि माताएं भी इलेक्ट्रानिक गजट में उलझी रहती हैं। बच्चों को व्यस्त रखने के लिए मोबाइल दे देती हैं। यह ठीक नहीं है। कई अभिभावक बच्चे पर अपनी इच्छा को लादने की कोशिश करते हैं। यह ठीक नहीं है, लेकिन उन पर नजर रखें।

जो बोल नहीं पाते वो ऐसा नोट्स लिखते हैं: डॉ. र|ानी


साइकोलॉजिस्ट डॉ. देवेंद्र र|ानी ने बताया कि हालांकि किसी बच्ची की मानसिक स्थिति जानने के लिए उसके परिवार, स्कूल या कॉलेज समेत उसके वातावरण का आंकलन करना काफी जरुरी होता है। सुसाइड नोट की तरह लिखे लेख के आधार प्राथमिक तौर उसके फीयर डिसऑर्डर होने की संभावना जताई जा सकती है। इसमें दोस्तों और सहपाठियों से किसी तरह के काम में पिछड़े लोग शिकार होता है। इस तरह लोग जो बात बोल नहीं करते। उसे लिखते रहते हैं। इस केस में भी बच्चा किसी बात को लेकर काफी सहम गया होगा। लेकिन उसे किसी से जाहिर नहीं होने दिया। यही कारण है कि उसके इस आत्मघाती कदम का किसी को अंदाजा ही नहीं लगा और उसने अपनी जिंदगी ही समाप्त कर ली।

छोटे बेटे के जाने के बाद दुखी पिता ने कहा...

फंदे के लिए देव ने नापकर काटी नाइलोन की रस्सी

पुलिस का कहना है कि तीन भाई बहनों में देव तीसरे नंबर का था। मौका-मुआयना करने पर दिखता है कि सुसाइड करने को लेकर देव की पहले से प्लानिंग थी। इसके चलते फंदे के लिए जिस कपड़े सुखाने वाली रस्सी का इस्तेमाल किया। उसे भी उतना ही काटा, जिससे आत्मघाती कदम उठाया जा सके। इसके अलावा करीब सप्ताहभर पहले से हाथ में एक अंग्रेजी में किंग लिखी अंगूठी पहनने लगा था। उसे पहले कभी ऐसी अंगूठी और चेन पहनने का कभी शौक नहीं रहा। इससे भी उसकी अलग गतिविधि का अनुमान लगा रहे हैं।

शुक्रवार की शाम खुद ही पढ़ने के लिए कमरे में गया

बड़े भाई हितेश यादव का कहना है कि 20 फरवरी को पेपर देने के बाद दिनभर परिवार के साथ रहा। शाम को पालतु जानवर को खिलाने के लिए बाजार से अंडे भी लेकर आया। एक अंडा खिलाकर मां को अगले दिन देने के लिए बोलकर पढ़ने चला गया। इसके बाद खुद ही पढ़ने की बोलकर अपने रूम में चला गया। जबकि आम दिनों में उसे पढ़ने की बोला जाता था। लेकिन घटना से पहले शाम होते ही उसने सबसे ज्यादा समय अपने रूम में गुजारा। रात करीब 9 बजे बाथरुम में फांसी लगा ली।

घटना के बाद जामुल स्थित हाउसिंग बोर्ड स्थित मकान में यादव परिवार के परिचित लोग आने लगे। घटना के बाद से घर का माहौल काफी गमगीन हो गया। सभी बार बार देव को याद करते रहे।

(जैसा कि भागवत प्रसाद यादव ने दैनिक भास्कर के रिपोर्टर को बताया)

घटना से पूरा दिमाग सन्न रह गया है। इसे लेकर जिला कलेक्टर से मुलाकात करूंगा। उनकी अनुमति लेकर देव के सभी क्लासमेट से मिलूंगा। उनसे कहूंगा कि ऐसी कोई शर्त न लगाएं, जिससे किसी की जान चली जाए। उन्हें समझाऊंगा कि ऐसा किसी और के साथ न हो। देव एक निजी स्कूल में कक्षा 10वीं की पढ़ाई कर रहा था। घटना के दिन पहला पर्चा सीएस का हुआ था।


पुलिस के मुताबिक देव कुमार यादव के मोबाइल में इंटरनेट नहीं है, अत: ऑनलाइन गेम्स की शर्त के कारण उसके आत्मघाती कदम उठाने की संभावना क्षीण लग रही।

ऑनलाइन गेम
से नहीं हुई मौत


कलेक्टर से मिलकर देव के सहपाठियों से मिलने अनुमति मांगूंगा ताकि उन्हें समझा सकूं

भावना व्यक्त नहीं की:- देव ने ऐसा कोई काम नहीं किया जिससे कुछ अंदाजा लगे।

जरूरत:- स्कूल गोइंग बच्चों की एक्टिविटी पर अभिभावकों को देना होगा ध्यान।

पहले भी हुई घटना :- 3 महीने पहले 9वीं के एक बच्चे ने भी फांसी लगाकर दी थी जान।

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