सरकारी वैक्सीन की सप्लाई करने में स्वास्थ्य विभाग ने की मदद, जांच के दायरे में अन्य मेडिकल स्टोर भी

Bhilaidurg News - दैनिक भास्कर ने 11 अप्रैल को मामले का खुलासा किया। अब विभाग जांच करवा रहा है। कमीशन देने के बावजूद प्रति वैक्सीन...

Bhaskar News Network

Apr 13, 2019, 06:51 AM IST
Bhilai News - chhattisgarh news the health department has assisted in supply of government vaccine other medical stores under investigation
दैनिक भास्कर ने 11 अप्रैल को मामले का खुलासा किया। अब विभाग जांच करवा रहा है।

कमीशन देने के बावजूद प्रति वैक्सीन में 100 से 150 रुपए का फायदा

हेल्थ रिपोर्टर | भिलाई

हयुमन बायोलॉकल्स इंस्टीट्यूट तेलंगाना द्वारा बनाई जाने वाली एंटी रैबीज वैक्सीन के रिटेल पैक में मुनाफा कम था, इसलिए सुपेला के कमला मेडिकल स्टोर ने सरकारी सप्लाई के मेडिसिन की बिक्री शुरू कर दी। जिला अस्पताल दुर्ग और लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल सुपेला जुगाड़ से मंगाई जाने वाली उसकी सरकारी वैक्सीन की खपत का जिम्मा ले लिए थे, इसमें बेखौफ होकर रिटेल तौर में भी उसी वैक्सीन की बिक्री शुरू कर दिया। स्टिंग के बाद मामले की तह तक जाने के क्रम में यह जानकारी मिली कि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से पैठ कर वह गवर्नमेंट सप्लाई की वैक्सीन उन्हीं से मंगाकर उन्हीं को बेच रहा था। इससे उसको सबको नजराना देने के बाद भी 100 से 150 रुपए/वॉयल बच जाते थे।

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एक नाम होने के बाद भी रिटेल व गवर्नमेंट पैक में अंतर, जानिए क्या

हयुमन बायोलॉकल्स इंस्टीट्यूट सरकारों की जरूरतों के अलावा खुले बाजार के लिए एंटी रैबीज वैक्सीन बनाता है। सरकार के लिए बनाई गई वैक्सीन पर इंस्टीट्यूट एमआरपी नहीं लिखने के साथ ही गवर्नमेंट सप्लाई नाट टू सेल की मुहर लगता है, जबकि रिटेल यानी की खुले बाजार के पैक पर एमआरपी के तथा वार्निंग के साथ टू बी सोल्ड बाई रिटेल...लिखता है। अभयरब नाम से इस इंस्टीट्यूट ने रिटेल के लिए जो पैक बनाया है, उसकी कीमत रु. 336.78/वॉयल रखी है।

दुर्ग-भिलाई के बाकी मेडिकल स्टोर्स की जांच के लिए भी आदेश जारी

सुपेला के निजी मेडिकल को सरकारी दवाएं देने वाले मुख्य आड़ती का पता नहीं लगा पाने के कारण दुर्ग-भिलाई के कई अन्य मेडिकल भी शंका के दायरे में आ गए हैं। बैच नंबर 18केअाेअारएअाे41 का पता लगाने के लिए प्रमुख मेडिकल्स के भी रिकार्ड खंगालने की योजना बनी है। विभाग उनके यहां औचक छापामार सरकारी वैक्सीन का क्लू और गोदाम ढूंढने की कोशिश की जाएगी। मेडिकल्स में अन्य सरकारी दवाओं की उपलब्धता को भी चेक किया जाएगा।

इधर जांच में बताया कि इस माह कितने वॉयल खर्च की वैक्सीन

माह व वर्ष जिला अस्पताल शास्त्री अस्पताल

अक्टूबर 2018 280 वॉयल 100 वॉयल

नंबर 2018 200 वॉयल 400 वॉयल

दिसंबर 2018 300 वॉयल 250 वॉयल

जनवरी 2019 561 वॉयल 240 वॉयल

फरवरी 2019 610 वॉयल 040 वॉयल

मार्च 2019 280 वॉयल 200 वॉयल

छोटे अस्पताल रहें अलर्ट, नहीं आए झांसे में, उन्होंने नहीं की इससे खरीदी

जिला और लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल के अधिकारियों ने जानकारी होने के बाद भी जहां सरकारी दवा की खरीदारी जारी रखी, वहीं कई सरकारी अस्पतालों ने उसे लेने से मना कर दिया। पीएचसी बापूनगर, टंकी मरोदा सहित कई अन्य शासकीय अस्पतालों ने 110 रुपया सस्ता मिलने के बाद भी अभयरब नाम की एंटी रैबीज वैक्सीन के रिटेल पैक की 310 रुपए/वॉयल से खरीदारी की। लोकल परचेज के मद में वैक्सीन के इस पैक को जिला अस्पताल के जेनरिक मेडिकल स्टोर ने उन्हें बेचा।

इधर, 36 घंटे बाद भी मुख्य सप्लायर का पता नहीं, से-9 से पूछा- क्या आपने भी खरीदारी की

निजी मेडिकल स्टोर से सरकारी वैक्सीन की बिक्री का खुलासा होने के 36 घंटे बाद भी स्वास्थ्य विभाग उसके मुख्य सप्लायर का पता नहीं लगा पाया। सीएमएचओ डॉ. गंभीर सिंह ने शुक्रवार को एक दिन पहले स्वयं द्वारा की गई जांच-पड़ताल में कोई क्लू नहीं मिलने के कारण सेक्टर-9 प्रशासन को चिट्ठी लिखने की जानकारी दी तो ड्रग इंस्पेक्टर हीरेंद्र ने एक बार फिर कल जानकारी देने का मैसेज कर कन्नी काट लिया। दोनों अधिकारियों ने सरकारी दवाओं के खरीदारों के विरुद्ध अब तक किसी भी प्रकार की जांच शुरू नहीं की। अधिकारियों के बयान में निजी मेडिकल स्टोर से सरकारी दवा की बिक्री पुष्टि किए जाने के बाद भी संचालक के विरुद्ध कोई एक्शन नहीं लिया गया।

बड़ा सवाल: कहीं अपनों का गला फंसना तय होने पर लीपा-पाेती तो नहीं कर रहे स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार?

निजी मेडिकल से सरकारी दवा की खरीदी और बिक्री के मामले की जांच पड़ताल जिस तरह कछुआ चाल चल हरी पूरा सिस्टम सवालों के घेरे में आ गया है। खुलासे के 36 घंटे बाद भी ड्रग इंस्पेक्टर द्वारा बैच नंबर का पता नहीं लगा पाना जहां जांच के नाम पर लिपा-पोती की ओर इशारा कर रहा है, तो सीएमएचओ के द्वारा खरीदारों के विरुद्ध अभी भी विभागीय जांच शुरू नहीं करना अपने लोगों के बचाने जैसा प्रतीत हो रहा है। इस जांच को दबाने की कोशिश मालूम पड़ती है।

  डॉ. गंभीर सिंह, सीएमएचओ, दुर्ग

मेन सप्लायर का पता लगते ही सबकुछ साफ हो जाएगा...




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