आज ही मिली थी भारतीय सिनेमा को आवाज
सिनेमा में ध्वनि का इतिहास
14 मार्च 1931 को निर्देशक आर्देशिर ईरानी ने देश को पहली बोलती फिल्म का तोहफा दिया। इस प्रयोग को 89 साल हो गए हैं। इस मौके पर भास्कर में पढ़िए सिनेमा में ध्वनि के आगमन से जुड़े आंकड़े...
फिल्म ‘इंद्रसभा’ में सबसे ज्यादा 72 गाने थे। फिर ‘शिरीन फरहाद’ में 42 गाने दिखाए गए।
Áटैनर सिंगल-सिस्टम कैमरा वीडियो के साथ ध्वनि को भी रिकॉर्ड कर सकता था।
Á1931-1940 के बीच पंकज मुलिक, केशवराव भोले जैसे म्यूजिक डायरेक्टर्स आए।
Áअनजान के नाम सबसे अधिक गीत लिखने का गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड दर्ज है।
Áकर्नाटक म्यूजिक दक्षिणी भारतीय रागों में संगीत की सबसे पुरानी व्यवस्था है।
Á1925-40 के बीच नेजल सिंगिंग का चलन था। केएल सहगल, शमशाद बेगम इसके लिए चर्चित थे।
Á10-10 गानों वाली 931 हिंदी फीचर फिल्में 1931 और 1940 के बीच आईं।
Á‘अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों’ बॉलीवुड का सबसे लंबा गाना है। ये गाना 15 मिनट का है
Áसबसे पहली फीमेल सिंगर राजकुमारी दुबे थीं।
Áवजीर मोहम्मद खान ने ‘दे दे खुदा’ को आवाज दी थी।
Á ‘आलम आरा’ का ‘दे दे खुदा..’ भारतीय इतिहास का पहला गाना माना जाता है। इस गीत को हारमोनियम और तबले के साथ लाइव रिकॉर्ड किया गया था।
फिरोज शाह मिस्त्री ने दिया था भारत की पहली बोलती फिल्म ‘आलम आरा’ का संगीत।
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Á1960-80 के एरा में आर डी बर्मन ने बॉलीवुड में वेस्टर्न इंस्ट्रूमेंट्स का इस्तेमाल किया।
Á1927 में पहली बार फोनोफिल्म मुंबई के रॉयल ओपेरा हाउस के द्वारा लाया गया।
Á‘फोनोफिल्म’ डॉ. ली.डी फॉरेस्ट द्वारा इन्वेंट प्रक्रिया थी। जिसमें ध्वनि तस्वीर संग सिंक्रनाइज की गई।
Á1930 के अंत तक, कुल 370 सिनेमाघरों में 30 से अधिक साउंड प्रोजेक्शन के लिए रेडी थे।