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जमीन के नीचे कहां-कितना पानी, पहली बार बनेगा थ्रीडी नक्शा

Dainik Bhaskar

Jan 14, 2019, 02:31 AM IST

Durg Bhilai News - राज्य में पहली बार एक्वीफर थ्रीडी मैपिंग के जरिए ग्राउंड वाटर का कंपलीट डाटा बेस तैयार किया जाएगा। इस काम की...

Durg News - chhattisgarh news under the ground how much water will be made for the first time 3d map
राज्य में पहली बार एक्वीफर थ्रीडी मैपिंग के जरिए ग्राउंड वाटर का कंपलीट डाटा बेस तैयार किया जाएगा। इस काम की शुरुआत ऐसे 6 जिलों से की जा रही है, जहां जलसंकट की स्थिति रही है। एक्वीफर मैपिंग के जरिए ग्राउंड वाटर की स्थिति की वैज्ञानिक तरीके से और बेहतर व्याख्या की जा सकेगी। इतना ही नहीं, मैप के जरिए ये अनुमान लगाना भी आसान होगा कि कहां बोर करने पर कितनी गहराई में पानी निकल सकता है। यानी बोर फेल होने की स्थिति में कमी आएगी। भूजल की उपलब्धता के हिसाब से भविष्य को लेकर नई रणनीति भी बनाई जा सकती है। केंद्रीय भूजल बोर्ड के जरिए पूरे देश में एक्वीफर मैपिंग के पॉयलट प्रोजेक्ट पर काम किया जा रहा है। वरिष्ठ भूजल वैज्ञानिक पीके नायक के मुताबिक जमीन के अंदर पानी की मौजूदगी के लिए बहुत सारे फैक्टर काम करते हैं। जमीन के अंदर चट्टानें, लाइम स्टोन जैसे कई और भी तत्व होते हैं। एक्वीफर मैपिंग से पता चलता है कि पानी किस तरह जमीन के अंदर से आ रहा है। एक्वीफर मैपिंग के लिए शुरूआत में बालोद, महासमुंद, राजनांदगांव, कोरबा, रायगढ़ और दुर्ग जिले को चुना गया है। बता दें कि 2013 में राज्य में 146 ब्लॉक में भूजल आंकलन किया गया था। इसमें 18 विकासखंडों को सेमी क्रिटिकल और एक को अतिदोहन का शिकार पाया गया था। इन ब्लॉकों के आधार पर शुरुआत में एक्वीफर मैपिंग के लिए चुना गया है।

एक्वीफर मैपिंग के लिए चुने गए जिले

जिला ब्लॉक पानी की स्थिति

बालोद 1) बालोद सेमी क्रिटिकल

2) गुरूर अतिदोहन

दुर्ग 1) धमधा सेमी- क्रिटिकल

2) दुर्ग सेमी क्रिटिकल

3) पाटन सेमी क्रिटिकल

रायगढ़ 1) बरमकेला क्रिटिकल

2) पुसोर सेमी क्रिटिकल

राजनांदगांव 1) डोंगरगांव सेमी क्रिटिकल

2) राजनांदगांव सेमी क्रिटिकल

इस तरह मिलेगा फायदा

वरिष्ठ भूजल वैज्ञानिक नायक के मुताबिक एक्वीफर मैपिंग तैयार होने के बाद रोजमर्रा की जरूरत से लेकर खेती किसानी और उद्योगों के लिए पानी की जरूरतों का प्रबंधन वैज्ञानिक तरीके से किया जाना मुमकिन होगा। एक्वीफर मैपिंग के जरिए पानी की समस्या का ठोस समाधान दिया जा सकता है।

ये तमाम जानकारियां मिलती हैं

एक्वीफर मैपिंग के लिए बोर ड्रिलिंग की सामान्य प्रक्रिया ही अपनाई जाती है, लेकिन इसमें भूजल के सभी घटकों की वैज्ञानिक पड़ताल की जाती है। किसी स्थान में कितना पानी है, क्या क्वालिटी है, अलग-अलग परतों में पानी की उपलब्धता की स्थिति क्या है, पानी कैसे डिस्चार्ज हो रहा है, यह सब पता चलेगा।

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