कला से जोड़ने छात्रों को दी वॉल पेटिंग की ट्रेनिंग, सपनों व विचारों को दीवारों पर उकेरा
श्री शंकराचार्य महाविद्यालय जुनवानी में वॉल पेंटिंग कार्यशाला का आयोजन किया गया। कॉलेज में यह प्रशिक्षण 28 फरवरी से 12 मार्च तक चला। इन आयोजनों का उद्देश्य छात्राओं में आत्मविश्वास को बढ़ाना, परिसर को स्वच्छ रखने व कॉलेज के प्रति स्नेह को बढ़ाना रहा। इसके साथ ही छात्रों को अपनी संस्कृति और छत्तीसगढ़ के इतिहास से भी रूबरू कराया गया।
छात्रों ने कार्यशाला के दौरान परिसर को सोच के अनुरूप सपनों व विचारों को वॉल पेटिंग के माध्यम से दीवारों पर उकेरा। कॉलेज की प्राचार्य डॉ. रक्षा सिंह ने बताया कि इन बच्चों में कौशल व प्रतिभा की कमी नहीं है। उनके विकास के लिए उनको पथ दिखाने की जरूरत होती है। कार्याशाला के माध्यम से यह कार्य बखूबी किए जा रहे हैं। इस कार्यशाला में हेमचंद यादव विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. अरुणा पलटा भी शामिल हुई।
वॉल प्लास्टर वर्क पेंट सिलेक्शन सीखा
श्री शंकराचार्य महाविद्यालय जुनवानी भिलाई के शिक्षा विभाग द्वारा इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय खैरागढ़ के संयुक्त तत्वाधान में 14 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जहां छात्रों ने वॉल प्लास्टर वर्क, पेंट सिलेक्शन और स्टैंसिल एवं ब्रश से वॉल पेंटिंग डिजाइन का प्रशिक्षण हासिल किया।
स्टूडेंट्स ने छत्तीसगढ़ी लोक कला के उकेरे चित्र
काॅलेज के छात्र-छात्राओं ने वॉल पेंटिंग में छत्तीसगढ़ लोक कला से संबंधित चित्र उकेरे। छात्रों ने काफी रोमांचक और सुंदर चित्रकला का प्रदर्शन किया। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया। डाॅ. विकास चंद्रा, चित्रकला विभाग इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय खैरागढ़ एवं हिमाक्षी कंस्ट्रक्शन के इंटीरियर डेकोरेटर, कमल किशोर साहू द्वारा विद्यार्थियों को प्रशिक्षण दिया गया। ने भी शामिल होकर छात्रों का उत्साह बढ़ाया। श्री गंगाजली शिक्षण समिति के चेयरमैन आईपी मिश्रा एवं अध्यक्ष जया अभिषेक मिश्रा ने विद्यार्थियों को बधाई दी।
सीखा तरीका: एक्सपर्ट के मार्गदर्शन में कॉलेज छात्र-छात्राओं ने सीखी वॉल पेंटिंग
कॉलेज के 80 स्टूडेंट्स ने 14 दिनों तक सीखी कला
इस आयोजन में कॉलेज के 80 स्टूडेंट्स ने हिस्सा लेकर ट्रेनिंग हासिल किया। महाविद्यालय की प्राचार्य एवं निदेशक डाॅ. रक्षा सिंह ने इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम को छात्रों के लिए उपयोगी बताया एवं महाविद्यालय के अतिरिक्त निदेशक डॉ. जे दुर्गा प्रसाद राव ने राजकीय कला को उभारने का अच्छा अवसर बताया।