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जहां श्रद्धा है, वहां शंका नहीं होनी चाहिए:मुनि

एक वर्ष पहले
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छत्तीसगढ़ प्रवर्तक लोकमान्य संत रतन मुनि मसा अपने साधु समुदाय के साथ आनंद मधुकर रतन भवन बांधा तालाब दुर्ग में होली चातुर्मास के निमित्त विराजमान हैं। उनके सानिध्य में बड़ी संख्या में जैन समाज के लोग होली चातुर्मास के विभिन्न कार्यक्रमों में बढ़ चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं।

रविवार को धर्म सभा में रतन मुनि मसा ने कहा कि मानव जीवन की महत्ता केवल जन्म लेने से और विषय वासना का सेवन करने से नहीं, बल्कि मानव जीवन देह दुर्लभ है। साधना की शक्ति के द्वारा मन व इंद्रियों को वश में किया जा सकता है। विचारों की श्रेणी में स्थिरता को लाना ही साधना है। इसका प्रभाव सदैव सब पर सकारात्मक तौर पर पड़ता है। उप प्रवर्तक डॉ. सतीश मुनि ने कहा साधना की शुरुआत श्रद्धा से ही होती है। जहां श्रद्धा है, वहां शंका नहीं होना चाहिए। श्रद्धा को सम्यक्त कहा जाता है। श्रद्धा एक प्रकार का अमूल्य र| है, जिसका क्रय-विक्रय नहीं होता। श्रद्धा के बगैर जीवन में ज्ञान की प्राप्ति नहीं होती और बिना ज्ञान के मोक्ष जीवात्मा को नहीं मिल पाता।

आज मनाया जाएगा तप और आलोचना दिवस

होली पर पर्यावरण की रक्षा के संकल्प के साथ समाज के सभी वर्ग के लोगों को रंग ना खेलने की प्रेरणा दी गई, क्योंकि इसका त्वचा पर विपरीत असर पड़ता है। संत रतन मुनि के सानिध्य में रोजाना सुबह 6 बजे प्रार्थना, 9.45 से 10.45 प्रवचन और दोपहर 1.30 बजे महामंगल पाठ हो रहा है। होली चातुर्मास के प्रसंग पर आज 24 तीर्थंकरों की स्तुति करते हुए लोगस सूत्र के माध्यम से वंदना की गई। सोमवार को प्रवचन के दौरान तप व आलोचना दिवस मनाया जाएगा। दोपहर में मंगल पाठ होगा। यह जानकारी नवीन संचेती ने दी।

आनंद मधुकर रतन भवन में मुनिजनों के दर्शन के लिए भक्त पहुंच रहे।
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