दो हेक्टेयर की खेती को सॉफ्टवेयर बता रहा शून्य, 20 हेक्टे. को 6 बताकर दे दिया टोकन

Bhilaidurg News - रोज शिकायत लेकर पहुंच रहे किसान। इस तरह रकबा कटा है किसानों का केस-1 : सॉफ्टवेयर में शून्य रकबा दिखा रहा है ...

Dec 05, 2019, 07:57 AM IST
Durg News - chhattisgarh news zero 20 hectares showing software for two hectares of farming gave tokens by telling 6
रोज शिकायत लेकर पहुंच रहे किसान।

इस तरह रकबा कटा है किसानों का

केस-1 : सॉफ्टवेयर में शून्य रकबा दिखा रहा है

अरसी गांव के किसान रामजी वल्द बुल्लू के पास 2.05 हेक्टेयर खेत है। इसी तरह किसान कंवल वल्द प्रभुलाल के पास 1.72 हेक्टेयर की खेती है। किसान तिरीथ वल्द पुनाराम के पास 2.83 हेक्टेयर की खेती है। इन किसानों का खेत ही गायब हो गया है। यानी सॉफ्टवेयर में इन किसानों का रकबा शून्य दर्शा रहा। इसलिए ये धान ही नहीं बेच सकते।

केस-3 : किसान का आधा रकबा ही गायब हो गया

चीचा गांव के निलंबर की खेती 3.27 एकड़ है। इस किसान को बुधवार टोकन दिया गया तो उसका रकबा कम मिला। इस किसान का 1.60 एकड़ काट दिया गया है। निलंबर को समिति से 1.67 एकड़ के हिसाब से महज 53 बोरा धान बेचने का टोकन मिला है। किसान के मुताबिक 61 बोरा और बेचने का टोकन मिलता।

किसानों का अल्टीमेटम, अगर 15 दिन में रकबा नहीं जोड़ा गया तो जिले में होगा आंदोलन

रकबा कम होने से नाराज किसानों ने आज मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और कलेक्टर अंकित आनंद को लिखित पत्र के माध्यम से अल्टीमेटम दिया। 53 प्रभावित किसानों के हस्ताक्षरयुक्त इस पत्र में किसानों ने 15 दिन के भीतर उनका वास्तविक धान का रकबा नहीं जोड़ने पर आंदोलन करने की चेतावनी दी है। प्रभावित किसान व समिति लिटिया के उपाध्यक्ष सुशील बंजारे, रमेश, राजूलाल, डोलेश्वर, राजेश सिन्हा, रामकुमार, भूषण, होमन ने बताया कि पटवारी के पास जाने पर उचित जानकारी नहीं दे रहे।

केस-2: 20 हेक्टेयर हो गया 6 हेक्टेयर

अरसी गांव के किसान यशपाल वल्द लक्ष्मीनाथ की खेती का रकबा 20.93 हेक्टेयर है। वर्तमान में उसका रकबा 5.94 हेक्टेयर बताकर टोकन दिया। सुखरीकला गांव के तिरीत राम साहू के खेत का रकबा 9 एकड़ है। बुधवार जब टोकन मिला तो उसका रकबा केवल 2 एकड़ मिला। इस दो एकड़ के हिसाब से उसे 74 बोरा धान बेचने का टोकन दिया गया।

समितियों में रकबा इधर-उधर के ये उदाहरण, जानिए

किसानों के मुताबिक लिटिया समिति में 1051 किसान हैं। यहां 124 किसानों का 92.14 रकबा का अंतर है। डीडाभाठा समिति में 1512 किसान हैं। यहां 226 किसानों के 112 हेक्टेयर रकबे में अंतर है। ओटेबंद समिति में 1034 किसान हैं। समिति में 104 किसानों का 6.24 हेक्टेयर रकबा दर्ज है। बीजाभाठ में 141 किसानों का 104.71 हेक्टेयर रकबा इधर-उधर हो गया है। जामगांव आर में 1118 किसानों का पंजीयन हुआ। 161 किसानों का 73.48 हेक्टेयर में डिफरेंस मिला। नगपुरा में 923 किसानों का 143 किसानों का 131.90 हेक्टेयर रकबा गड़बड़ है।

असर: जिनका रकबा हो गया शून्य, वे केंद्र में नहीं बेच सकते अपना धान

किसानों ने बताया कि जिन किसानों का रकबा शून्य कर दिया है वे अपना धान नहीं बेच सकते। इसलिए कि उन्हें समिति से टोकन ही नहीं मिलेगा। इसी तरह जिन किसानों का रकबा काटा गया है वे केवल दर्ज रकबा के हिसाब से ही धान बेच सकेंगे। बाकी धान उन्हें मजबूरन कोचियों के पास जाकर बेचना पड़ेगा। जितने भी किसानों के धान खरीदे जा रहे हैं उनका पंजीयन है और सभी ने सोसाइटी से कर्ज लिया है। मौजूदा हालात में किसान लाखों रुपये का कर्ज कैसे अदा कर पाएंगे, यह समस्या सामने आ गई है।

टोकन लिमिट खत्म करने से किसान परेशान, इसके खिलाफ मोर्चा की तैयारी

टोकन से 25 फीसदी लिमिट खत्म करने के बाद किसानों को दिक्कतें उठानी पड़ रही है। किसानों ने बताया कि उनके पास तौल नहीं है। इसलिए घर से अपने बोरे में भरकर जैसे -तैसे धान केंद्रों में बेचने ला रहे हैं। रकबा होने के बाद भी बचत धान वापस लौटाया जा रहा है। इसकी वजह से किसानों को दोहरा परिवहन खर्च उठाना पड़ रहा है। लेबर चार्ज अलग देना पड़ रहा। वहीं खबर है कि किसान संगठन अब इसे मुद्दा बनाने की तैयारी में जुट गए हैं।

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