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जो सरपंच और पंच दोबारा लड़ रहे हैं चुनाव, वे गणतंत्र दिवस पर नहीं लहरा सकेंगे तिरंगा

7 महीने पहले
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राज्य निर्वाचन आयोग कर रहा पंचायत चुनावों की निगरानी।
  • बालोद इलाके का मामला, अतिथि भी नहीं बनेंगे प्रत्याशी क्योंकि गांवों में लागू है आचार संहिता
  • पदाधिकारियों पर सख्ती: समारोह से बनानी होगी दूरी, बतौर दर्शक शामिल हो सकेंगे कार्यक्रमों में

बालोद. छत्तीसगढ़ में होने वाले त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर आदर्श चुनाव आचार संहिता लागू है। इस बार गणतंत्र दिवस समारोह इसी दौरान मनाया जाएगा। इसमें खासकर उन प्रत्याशियों को ध्यान रखना होगा, जो अभी भी पंच व सरपंच हैं। अगर वे दोबारा चुनाव लड़ रहे हैं तो वे गणतंत्र दिवस समारोह में ध्वजरोहण नहीं कर सकेंगे। अगर उन्होंने कहीं उल्लंघन किया या सरकारी आयोजन का कहीं फायदा उठाया तो उनके खिलाफ कार्रवाई भी हो सकती है। 
 

गणतंत्र दिवस समारोह इस बार सार्वजनिक नहीं, बल्कि सरकारी
आचार संहिता होने के कारण इस बार स्कूल स्तर पर भी होने वाले सांस्कृतिक आयोजन, सार्वजनिक या जनप्रतिनिधियों का ना होकर सरकारी माना जाएगा। इसलिए ऐसे मंच पर भी प्रत्याशियों को अतिथि बनने का मौका नहीं मिलेगा। जो पंच, सरपंच दोबारा चुनाव लड़ रहे हैं उन्हें ध्वजारोहण ना करने की बात कही गई है। अगर कोई दोबारा चुनाव नहीं लड़ रहे हैं तो ऐसे सरपंच, पंच पंचायत या अपने वार्ड में ध्वजारोहण कर सकते हैं। डीईओ आरएल ठाकुर का कहना है कि चुनाव के चलते स्कूलों में आचार संहिता का पालन किया जाएगा। शिक्षकों को निर्देश दे दिया गया है। 

जनपद पंचायत में अध्यक्ष ही करेंगे ध्वजारोहण 
जपं स्तर पर अध्यक्ष को ही इस बार भी ध्वजारोहण करने का आदेश आया है। इसकी वजह यह भी है कि जपं शहरी क्षेत्र में स्थापित है। शहर में आचार संहिता प्रभावशील नहीं है। इस वजह से यहां जनप्रतिनिधि ही ध्वजारोहण करेंगे। पंचायत इंस्पेक्टर सीपी यदु का कहना है कि कोई भी प्रत्याशी गणतंत्र दिवस पर किसी भी तरह का भाषण नहीं दे सकेंगे। अगर ग्रामीण होने के नाते उन्हें आयोजक कहीं बुलाते हैं और वे जाते हैं तो वहां उन्हें माइक नहीं दिया जाएगा। 

पंचायत सचिव को सौंपी निगरानी की जिम्मेदारी 
निर्वाचन आयोग के अफसरों ने पंचायत सचिवों को इस बात की निगरानी के लिए कहा है कि वे समारोह के दिन नजर रखें कि कहीं कोई प्रत्याशी राष्ट्रीय पर्व को चुनाव प्रचार का जरिया न बना दे। इसलिए पहले से ही स्कूल प्रबंधकों को चेताया जा रहा है कि वे प्रत्याशियों को अतिथि के तौर पर ना बुलाएं। एक दर्शक के तौर पर प्रत्याशी कार्यक्रम देखने के लिए आ सकते हैं। लेकिन उन्हें मंच पर स्थान नहीं दिया जाएगा। बहरहाल कार्यक्रम की तैयारी चल रही है। 

पूरी तरह से सरकारी होगा समारोह 
गांवों के स्कूलों में पूर्व या वर्तमान जनप्रतिनिधियों के साथ राजनीतिक दल के लोग मंच पर नहीं जाएंगे। ना ही शिक्षक उनका स्वागत करेंगे। खासतौर से स्कूलों में होने वाले गणतंत्र दिवस समारोह के लिए शिक्षकों को गाइडलाइन जारी की गई है। ध्वजारोहण के लिए मुख्य अतिथि कोई भी प्रशासनिक अधिकारी स्कूल के प्रधान पाठक व प्राचार्य होंगे। शहरी क्षेत्र में इसका असर नहीं होगा। यहां स्थानीय कार्यक्रम सुबह 9 बजे तक समाप्त करने के निर्देश दिए गए हैं। ताकि शिक्षक व बच्चे मुख्य समारोह में शामिल हो सके।

ग्राम पटेल या ग्राम प्रमुख को बना सकते हैं अतिथि 
गणतंत्र दिवस समारोह में स्कूल या ग्राम स्तर पर होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भी सरपंच, पंच जनपद सदस्य को अतिथि नहीं बनाया जाएगा। प्रत्याशियों को तो इससे दूर रखा ही जाएगा। आयोजक गांव के ग्राम पटेल या ग्राम समिति के प्रमुख को अतिथि के तौर पर बुला सकते हैं। ज्यादा अच्छा यह भी माना जाएगा कि कोई अतिथि ही ना हो। शिक्षकों को भी आचार संहिता के पालन को लेकर गंभीरता बरतने का निर्देश जारी किया गया है। 

इन बातों का शिक्षकों को रखना होगा विशेष ध्यान 
ग्रामीण क्षेत्र के स्कूलों के शिक्षकों को कहा गया है कि उन्हें पंच, सरपंच, जनपद, जिला पंचायत के वर्तमान व पूर्व पदाधिकारी व सदस्यों को मंच पर चढ़ने नहीं देंगे। किसी भी जनप्रतिनिधि को मंच या माइक नहीं देने कहा गया है। किसी के नाम के संबोधन में उनके राजनीतिक जनप्रतिनिधि की हैसियत वाले पद का उल्लेख नहीं करना होगा। मंच से किसी भी दानदाता की ओर से दी गई सामग्री का वितरण भी बच्चों को नहीं करना है।

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