छत्तीसगढ़  / मासूम से रेप करने वाले नाबालिग का पहली बार व्यस्क की तरह ट्रॉयल, 10 साल की सजा

durg news Minor rapist trial first time like adults, 10 years sentence
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durg news Minor rapist trial first time like adults, 10 years sentence

  • निर्भया कांड के चलते जेजे एक्ट में हुए संशोधन के बाद जिला कोर्ट ने अपचारी को सुनाई सजा
  • किशोर न्याय बोर्ड ने मामले को गंभीर मानते हुए जिला न्यायालय में ट्रांसफर किया था केस

दैनिक भास्कर

Jul 30, 2019, 12:51 PM IST

दुर्ग. जिला अदालत ने 5 साल की बच्ची से दुष्कर्म के अपचारी को 10 साल की सजा सुनाई है। प्रदेश में संभवत: ऐसा पहली बार हुआ है कि किशोर न्याय अधिनियम (जेजे एक्ट) में संशोधन के बाद अपचारी बालक को डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने वयस्कों की तरह ट्रायल किया। वारदात के समय आरोपी की उम्र 17 साल 9 महीने होने की वजह से उसे किशोर न्याय बोर्ड में पेश किया गया, लेकिन अपराध घृणित श्रेणी में आने की वजह से जुविनाइल कोर्ट ने संशोधित जेजे एक्ट के तहत उसके प्रकरण को जिला एवं सत्र न्यायालय में पेश किया। जहां दोष सिद्ध होने पर पंचम अपर सत्र न्यायाधीश शुभ्रा पचौरी की अदालत ने सजा सुनाई। 

तीन साल पहले सुपेला थाना क्षेत्र निवासी 5 साल की मासूम को पड़ोस में रहने वाला रिश्तेदार 24 जुलाई को अपने घर खिलाने ले गया। घर में परिजनों की अनुपस्थिति का फायदा उठाकर आरोपी ने उसके साथ अनाचार किया। जब बच्ची दर्द से रोने लगी तो आरोपी ने उसे घर भेज दिया। घर में जब भी मासूम बाथरुम के लिए जाती तो दर्द से कराहकर रोने लगी। इसी तरह रातभर बाथरुम के बाद उसका दर्द करहाना शुरू हो जाता। लगातार एक ही जगह पर दर्द की बोलने से मां को भी अनहोनी की आशंका जाहिर हो गई। 

बाथरुम जाने पर मासूम के दर्द की शिकायत करने पर हुआ खुलासा 

पीड़िता की मां ने आरोपी के खिलाफ सुपेला पुलिस ने अपराध दर्ज कर लिया। घटना के समय आरोपी के बालिग होने में तीन महीने का समय बाकी था। इसके चलते पुलिस ने उसका चालान किशोर न्याय बोर्ड में पेश किया। इस पर न्याय बोर्ड ने अपचारी बालक के कृत्य को गंभीर अपराध की श्रेणी में मानते हुए उसकी फाइल को जिला एवं सत्र न्यायालय में 21 मई 2017 को भेजने का फैसला लिया। 16 मई को प्रकरण जिला न्यायालय में ट्रायल के लिए भेज दिया। अब आरोपी उम्र 21 वर्ष पूरी होने तक बाल संप्रेक्षण गृह में रहेगा। 

न्यायाधीश शुभ्रा पचौरी की अदालत ने अपचारी बालक को 10 साल की सजा सुनाई है। हालांकि जेजे एक्ट के तहत 21 साल पूरे होने तक उसे संप्रेक्षण गृह के हाउस अॉफ सेफ्टी में रखने का आदेश दिया। लेकिन 24 अप्रैल 2016 को घटना के समय आरोपी की उम्र 17 साल 9 महीने थी। ऐसे में अब फैसला आने तक आरोपी 29 जुलाई तक अपनी उम्र के 21 वर्ष पूरा कर लिया है। ऐसे में कोर्ट आरोपी के 21 साल पूरा होने के बाद अब उसे सीधे जिला कारागार में सजा काटने के लिए भेजा जाएगा। 

निर्भया कांड के बाद केंद्र सरकार ने किशोर न्याय अधिनियम में संशोधन किए। इसके तहत किशोर न्याय अधिनियम की धारा 15 के तहत व्यस्था की कि यदि कोई अपचारी बालक गंभीर या घृणित अपराध के आरोप में पकड़ा जाता है। साथ ही अपराध के समय उसकी उम्र 16 साल से ज्यादा है तो किशोर न्याय बोर्ड अपनी विवेकानुसार उस प्रकरण को ट्रायल के लिए जिला एवं सत्र न्यायालय में भेज सकते हैं। मामले में ट्रायल के बाद कोर्ट आरोपी को वयस्कों की तरह सजा का एलान कर सकेगी। लेकिन जब तक उसकी उम्र 21 वर्ष पूरी नहीं हो जाती। तब तक उसे संप्रेक्षण गृह में ही रहना होगा। 

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