छत्तीसगढ़ / ढाई हजार से ज्यादा कारोबारियों ने टैक्स के 5 हजार करोड़ रुपए दबाए, अब होगी कुर्की



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  • रायपुर में रविवार को होगी सीजीएसटी के अधिकारियों की बैठक तय होगी टैक्स वसूली की रणनीति 
  • प्रकरणों का फैसला होने के बाद भी जमा नहीं किया टैक्स, अब उन्हें 31 दिसंबर 2019 तक दिया गया मौका

Dainik Bhaskar

Nov 09, 2019, 11:46 AM IST

भिलाई. छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद से लेकर अब तक 19 सालों में केंद्रीय उत्पाद एवं सेवा कर (सेंट्रल एक्साइज और सर्विस टैक्स) के हजारों कारोबारियों के प्रकरण दर्ज हैं। उनसे विभाग को 5005 करोड़ रुपए की वसूली करनी है। इसके लिए उन्हें 31 दिसंबर तक का मौका दिया गया है। इसके बाद उनके खिलाफ टैक्स वसूली की कार्रवाई की जाएगी। इनमें से कुछ मामले जहां सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट में अपील में विचाराधीन हैं तो कुछ मामले कमिश्नरी और जांच अधिकारियों के पास हैं। 19 साल में 5 हजार करोड़ से ऊपर हुई रकम को देखते हुए विभाग ने एक बार फिर मामलों की गणना की। इसमें प्रकरणों की गंभीरता, लगाए गए ब्याज, जुर्माने की राशि और न्यायालयीन प्रकरण पर पुन: चर्चा की गई। इसमें प्रकरणों की प्रकृति पर भी विचार विमर्श किया गया। इसके बाद छत्तीसगढ़ के उन सभी कारोबारियों को पुन: मौका दिया जा रहा है, ताकि वह कानूनी परेशानियों से बच जाएं और विभाग का भी समय बर्बाद न हो।

इस तरह के हैं मामले

  1. प्रकरणों में कर चोरी करने, बिल की तुलना में कच्चा सामान अधिक, सर्च में कुछ सामान रास्ते में पकड़े गए और टैक्स लगाया गया। ऐसे मामलों को पकड़कर कारोबारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई। टैक्स, सरचार्ज, पेनाल्टी आदि लगाई गई। वह अपील में चले गए। सुनवाई के बाद फैसला आया, पर टैक्स जमा नहीं किए। कारोबारियों ने ग्राहकों और लोगों से सेवाकर वसूली की, लेकिन विभाग में जमा नहीं किया। मिले दस्तावेजों में पुष्टि भी हुई, लेकिन उन्होंने उसे एप्लीकेबल नहीं माना और मनमानी करते हुए विभाग में सर्विस टैक्स की राशि जमा नहीं की। इनको लेकर विभाग ने कार्रवाई की तो करोड़ों में वसूली की राशि निकली।

  2. वस्तु एवं सेवाकर के प्रधान आयुक्त बीबी महापात्र ने कहा कि 31 दिसंबर तक सबका विश्वास योजना के अंतर्गत टैक्स जमा करने को कहा गया है। इस दौरान टैक्स जमा करने वालों से न तो ब्याज लिया जाएगा और न ही जुर्माना किया जाएगा। न्यायालयीन प्रकरण से भी उन्हें राहत मिलेगी। इसके अंतर्गत विरासत विवाद निपटान योजना के तहत मुकदमों, अपील, जांच, अन्वेषण और लेखा परीक्षण में देय कर के लंबित प्रकरणों को रखा गया है। 50 लाख से अधिक की बकाया राशि में 60 फीसदी तक भुगतान करना होगा। इसके बाद भी टैक्स जमा नहीं करने पर बकायादारों की संपत्ति कुर्क कर वसूली की जाएगी। 
     

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