बिलासपुर / अटल यूनिवर्सिटी ने 7 साल में प्राइवेट छात्राें से 14.79 कराेड़ रुपए अवैध रूप से वसूले

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  • लाइब्रेरी में प्राइवेट छात्रों को बैठने की अनुमति नहीं, लेकिन किताब पढ़ने के नाम पर ही ले लिए 4.22 करोड़ से ज्यादा
  • 2012 से 2019 तक 5.28 लाख से ज्यादा प्राइवेट छात्र हो चुके हैं पास, इस सत्र में नामांकन व परीक्षा फार्म एक साथ 

दैनिक भास्कर

Nov 18, 2019, 10:25 AM IST

बिलासपुर. अटल यूनिवर्सिटी पिछले 7 सालों से प्राइवेट छात्रों से जिन्हें खेलने और लाइब्रेरी में पढ़ने और किताब जारी कराने की अनुमति नहीं है, उनसे भी 4 करोड़, 22 लाख 74 हजार 400 रुपए वसूल लिए हैं। इतना ही नहीं यूनिवर्सिटी ने छात्र कल्याण शुल्क, अनुमति शुल्क व कुलपति आकस्मिक सहायता निधि के नाम पर इनसे 10 करोड़ 56 लाख 86 हजार रुपए वसूला है। इस तरह 14 करोड़ 79 लाख 60 हजार 400 रुपए अवैध रूप से वसूल कर लिया गया है। सत्र 2012-13 से सत्र 2018-19 तक 5 लाख 28 हजार 430 प्राइवेट छात्र पास हो चुके हैं। 

परीक्षा फार्म के नाम पर 1500 रुपए प्राइवेट छात्रों से लिए जा रहे 

इस सत्र में भी यूनिवर्सिटी 15 नवंबर से प्राइवेट छात्रों का नामांकन और परीक्षा फार्म भरवाया जा रहा है। नामांकन के नाम पर 300 और परीक्षा फार्म के नाम पर 1500 रुपए लिया जा रहा है। ऐसे में परीक्षा फार्म के 1500 रुपए में यूनिवर्सिटी प्राइवेट छात्रों से जिनका वे उपयोग नहीं करते हैं, उसका पैसा भी वसूल रही है। इन पैसों का फायदा तो नियमित छात्रों को भी नहीं मिल रहा है। आज तक किसी भी छात्र को एयू ने कुलपति आकस्मिक सहायता निधि से एक रुपए का मदद नहीं की है। 

छात्र कल्याण शुल्क से कोई कार्यक्रम नहीं हुआ है। लाइब्रेरी के लिए यूनिवर्सिटी पैसा वसूल रही है, लेकिन एयू के सेंट्रल लाइब्रेरी में यूटीडी के छात्रों के लिए किताबें नहीं हैं। हर साल प्राइवेट छात्रों से परीक्षा देने अनुमति के लिए 170 रुपए देने पड़ रहे हैं। यूनिवर्सिटी रेगुलर के अलावा प्राइवेट छात्रों से भी खेलकूद के नाम पर 50 रुपए ले रही है। जिसका फायदा कभी भी प्राइवेट छात्रों को नहीं मिलता है। सभी के करोड़ों रुपए यूनिवर्सिटी रखकर केवल ब्याज खा रही है। ब्याज का पैसा कहां जा रहा है, इसका हिसाब नहीं है। 

अटल यूनिवर्सिटी ने सत्र 2012-13 से लेकर 2018-19 तक प्रति प्राइवेट छात्र 10 रुपए कुलपति आकस्मिक निधि के नाम पर लेती है। अभी तक 52 लाख 84 हजार 300 रुपए वसूली है, लेकिन अभी तक इन पैसों से एक भी छात्र को मदद नहीं किया गया।

अनुमति के नाम पर लिए 8 करोड़ 98 लाख : एयू प्राइवेट छात्रों से हर साल अनुमति के नाम पर प्रति छात्र 170 रुपए ले रही है। जबकि प्रथम वर्ष के छात्राें से लेना चाहिए। द्वितीय और तृतीय वर्ष से वसूला जा रहा है। अभी तक यूनिवर्सिटी ने अनुमति के नाम पर छात्रों से 8 करोड़ 98 लाख 33 हजार 100 रुपए ली है। 

एयू छात्र कल्याण शुल्क के नाम पर भी प्रति प्राइवेट छात्रों से 20 रुपए ले रही है। ऐसे में इस मद के तहत भी प्राइवेट छात्रों से यूनिवर्सिटी ने 1 करोड़ 56 लाख 86 हजार रुपए वसूली है, लेकिन अभी तक किसी छात्र को इस मद से फायदा नहीं मिला है। 

लाइब्रेरी नहीं, फिर भी कमाए 1.58 करोड़ :प्राइवेट छात्र जिन छात्रों को यूनिवर्सिटी और कॉलेज की लाइब्रेरी में जाने की अनुमति नहीं है। इनसे भी यूनिवर्सिटी प्रति छात्र 30 रुपए ले रही है। अभी तक इनसे 1 करोड़ 58 लाख 52 हजार 900 रुपए वसूला गया है। जबकि यूनिवर्सिटी में सेंट्रल लाइब्रेरी पूरी तरह तैयार नहीं है। 

25 तक विलंब शुल्क नहीं 
एयू इस सत्र में प्राइवेट छात्रों का नामांकन व परीक्षा फार्म एक साथ भरा रही है। बिना विलंब शुल्क के साथ छात्र 25 नवंबर तक फार्म भर सकते हैं। 26 से 30 नवंबर तक 500 रुपए विलंब शुल्क देना पड़ेगा। 

 

प्राइवेट छात्रों से इस मद में वसूली 

मद पैसा प्रति छात्र 
फिजिकल वेलफेयर शुल्क 50 रुपए 
ग्रंथालय शुल्क 30 रुपए 
अनुमति शुल्क 170 रुपए 
छात्र कल्याण शुल्क 20 रुपए 
कुलपति आकस्मिक सहायता निधि 10 रुपए 


 

सत्र प्राइवेट छात्राें की संख्या 
2012-13 54586 
2013-14 70278 
2014-15 81488 
2015-16 90391 
2016-17 78719
2017-18 77452
2018-19 75516 

खेल विभाग के प्रभारी डॉयरेक्टर प्रो. सौमित्र तिवारी का कहना है कि हम एआईयू का नियम लागू करते हैं। हमें रेगुलर छात्रों को ही खेल में शामिल करना है। प्राइवेट छात्रों को हम नहीं ले सकते हैं। छात्र कल्याण अधिष्ठाता डॉ. एचएस होता ने बताया कि कुलपति आकस्मिक निधि व छात्र कल्याण शुल्क मद से अभी तक किसी भी छात्र को फायदा नहीं दिया गया है। वहीं के लाइब्रेरी के पूर्व प्रभारी प्रो. तिवारी का कहना है कि जिसके पास यूटीडी का आईकार्ड होगा, उसे ही किताबें मिली हैं। 

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