दुखद / बैकुंठपुर जिला अस्पताल में जन्म लेते ही डस्टबिन में गिरा शिशु, मौत



नसरीन के पहले एक बेटी हुई थी, जो अब 2 साल की है। ये उनका दूसरा बच्चा था। अस्पताल के कर्मचारियों की लापरवाही के कारण जन्म होते ही उसकी मौत हो गई। नसरीन के पहले एक बेटी हुई थी, जो अब 2 साल की है। ये उनका दूसरा बच्चा था। अस्पताल के कर्मचारियों की लापरवाही के कारण जन्म होते ही उसकी मौत हो गई।
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नसरीन के पहले एक बेटी हुई थी, जो अब 2 साल की है। ये उनका दूसरा बच्चा था। अस्पताल के कर्मचारियों की लापरवाही के कारण जन्म होते ही उसकी मौत हो गई।नसरीन के पहले एक बेटी हुई थी, जो अब 2 साल की है। ये उनका दूसरा बच्चा था। अस्पताल के कर्मचारियों की लापरवाही के कारण जन्म होते ही उसकी मौत हो गई।

  • जशपुर से निरीक्षण करने आई 5 सदस्यीय टीम की खातिरदारी में लगा था अस्पताल प्रबंधन
  • परिजन बोले- ऐसे लेबर रूम में भेज दिया जो तैयार ही नहीं, अभी तक उद्घाटन भी नहीं हुआ

Dainik Bhaskar

Oct 13, 2018, 12:29 AM IST

बैकुंठपुर. जिला अस्पताल में शुक्रवार सुबह 11 बजे एक शिशु की जन्म लेते ही डस्टबिन में गिरकर मौत हो गई। परिजन का आरोप है कि जब डिलीवरी हुई उस समय लेबर रूम में न तो कोई डॉक्टर था और न कोई नर्स। ये सभी लोग कायाकल्प योजना के तहत निरीक्षण करने आई 5 सदस्यीय टीम की खातिरदारी में व्यस्त थे।

 

चिरमिरी-पोड़ी की नसरीन (25) को प्रसव पीड़ा होने पर गुरुवार सुबह 4 बजे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उस समय डाॅ. स्वाती बंसरिया मरीज की जांच कर रहीं थीं। नसरीन की मां अफरोज बेगम के अनुसार एक बार जांच करने के बाद दोबारा कोई देखने तक नहीं आया।

 

आसपास के वार्ड के लोगों ने भी बताया कि गुरुवार को रातभर महिला दर्द से चिल्लाती रही, लेकिन कोई देखने नहीं आया। हालांकि, देर शाम तक अस्पताल प्रबंधन चेकआउट करने की बात कहता रहा, लेकिन परिजन मामला दर्ज होने की बात पर अड़े रहे।


नसरीन की मां अफरोज बेगम के अनुसार सुबह 10:30 बेटी को ऐसे लेबर रूम में शिफ्ट किया, जो तैयार नहीं था। इसका उद्घाटन भी नहीं हुआ। इसे लेकर नर्स से बहस भी हुई थी। फिर भी डाॅक्टर के कहने पर हम बेटी को रूम में लेकर गए। आधे घंटे तक वहां न तो डाॅक्टर और और न नर्स पहुंची। इस बीच बच्चे का जन्म हुआ और वह सीधे डस्टबिन में गिर गया, उसकी मौके पर ही मौत हो गई।

 

ड्यूटी पर तैनात नर्स सरस्वती पटेल के अनुसार 10:30 बजे से 11 बजे तक 6 बच्चों की डिलीवरी हुई। दूसरा लेबर रूम डिलीवरी के लिए तैयार ही नहीं है।

 

मैं आन कॉल ड्यूटी पर आती हूं। शुक्रवार को आधे घंटे में एक साथ 3 डिलीवरी हुईं, टेबल खाली नहीं थी। इसलिए महिला को दूसरे रूम में शिफ्ट किया पर इसी बीच डिलीवरी हो गई। केस को डाॅ. सिखा हैंडल कर रही थीं। मैं दूसरे केस देख रही थी। -डाॅ. स्वाती बंसरिया

 

किस डाॅक्टर और नर्स की लापरवाही से शिशु की मौत हुई इसकी जांच करेंगे। तथ्य सामने आने पर दोषी के खिलाफ कार्रवाई करेंगे। -डाॅ. एसके, सिविल सर्जन, जिला अस्पताल, बैकुंठपुर


 

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