गांधी जयंती आज / आमसभा के लिए 85 साल पहले शहर आए थे बापू

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  • अहिंसा : देश की आजादी के लिए महात्मा गांधी के संघर्षों का बिलासपुर भी गवाह बना था 
  • शनिचरी में जहां पर बापू ने की थी आम सभा, वहां आज उनकी स्मृति में बना है जयस्तंभ

Oct 02, 2018, 11:27 AM IST

बिलासपुर. देश की आजादी के लिए महात्मा गांधी के संघर्षों का बिलासपुर भी गवाह बना था। आज से 85 वर्ष पहले बापू रायपुर से सड़क मार्ग से बिलासपुर आए थे। यहां गोंड़पारा में पं. कुंजबिहारी अग्निहोत्री के निवास में ठहरे थे। बापू ने शनिचरी में आमसभा की थी। उनकी स्मृति में बनाया गया जयस्तंभ आज भी शनिचरी में है। राष्ट्रपति महात्मा गांधी की 150 वीं जयंती का वर्ष मंगलवार से शुरू हो रहा है। 

रायपुर से सड़क मार्ग के रास्ते पहुंचे थे बिलासपुर

आजादी के लिए देशभर में जनजागरूकता अभियान चलाते हुए गांधीजी नवंबर 1933 में छत्तीसगढ़ आए थे, इससे पहले भी वे 1920 में छत्तीसगढ़ आ चुके थे। 1920 में वे रायपुर, धमतरी और कुरुद गए। 24 नवंबर 1933 को वे रायपुर से सड़क के रास्ते बिलासपुर आए। वे सुबह 8 बजे बिलासपुर पहुंचे। गोंड़पारा में पं. कुंजबिहारी अग्निहोत्री के निवास पर बापू के ठहरने की व्यवस्था की गई थी। सुबह वे महिलाओं की सभा में शामिल हुए। 

ब्लड प्रेशर जांचने की वह मशीन और बापू जिस कुर्सी पर बैठे

 

सदर बाजार में रहने वाले डॉ. शिव दुलारे मिश्रा ने पं. अग्निहोत्री के निवास पर जाकर बापू का ब्लड प्रेशर चेक किया था। उनके पौत्र शिवा मिश्रा ने ब्लड प्रेशर जांचने की वह मशीन और बापू रायपुर से बिलासपुर तक खुले वाहन में लकड़ी की जिस कुर्सी में बिठाकर लाए गए थे, दोनों को सहेज कर रखा हुआ है। 

बापू ने आजादी से पहले बिलासपुर में रहने वाले ई राघवेंद्र राव को वर्धा आश्रम से पत्र लिखा था। बापू ने 2 जून 1934 को लिखे गए पत्र में राव को कांग्रेस में वापस आकर आजादी की लड़ाई में योगदान देने का आह्वान किया था। 

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