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बिलासपुर. छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आयकर छापे की कार्रवाई को राजनीति से प्रेरित बताया है। उन्होंने कहा कि पूर्व सीएम रमन सिंह, नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक और रामविचार नेताम ने आयकर की तरफ से बयान दिया। इसमें सवाल ये है कि क्या आईटी के अधिकारी उन्हें रिपोर्ट कर रहे थे और सारी जानकारी दे रहे थे। कैसे जान गए और निकला क्या। मुख्यमंत्री ने छापे के माध्यम से प्रदेश सरकार को अस्थिर करने की कोशिश किए जाने का आरोप भी लगाया। मुख्यमंत्री बघेल रविवार को एक निजी कार्यक्रम में शामिल होने बिलासपुर पहुंचे थे।
बिलासपुर मेयर रामशरण यादव के सरकारी बंगले में पत्रकारों से चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री बघेल ने कहा कि आयकर छापे में एक सप्ताह तक 200 से अधिक अधिकारी थे। छापे पड़ते रहते हैं, लेकिन हमारी आपत्ति ये थी कि पहली बार सीआरपीएफ के जवानों को लेकर आए और उनको सूचना भी नहीं दिए जबकि उस समय बिलासपुर में राष्ट्रपति का दौरा कार्यक्रम आ चुका था और सुरक्षा का भी मामला था। जब भी इस तरह छापेमारी की जाती है तो संंबंधित जिले के एसपी को सूचना दी जाती है। ये दोनों काम अंत तक नहीं किया गया।
तीसरी बात प्रेस नोट जारी किया जाता है। यानी जिसके यहां छापा पड़ा, उसके यहां क्या-क्या संपत्ति मिली, सोना-चांदी, रकम,जमीन आदि के बारे में बताया जाता है। सीएम भूपेश ने कहा कि ये पहला छापा है, जिसमें ऐसा नहीं किया गया। ये राजनीति से प्रेरित छापा रहा है। अधिकारी-कर्मचारी के यहां छापेमारी हुई, किसी के यहां तीन लाख, किसी के यहां 13 लाख, एक के यहां 60 हजार तो किसी के यहां 26 हजार रुपए मिले। रायपुर महापौर के यहां भी छापेमारी हुई और चार लाख कुछ रुपए मिले।
एक पूर्व पार्षद के यहां छापा मारे थे, वहां मात्र 1800 रुपए मिला। इसमें संपत्तियों की जांच करना नहीं था। वे सरकार को अस्थिर करने की कोशिश कर रहे थे। जो प्रश्नावली पूछे गए उसमें सीधा पूछा गया कि फलां से आपका क्या संबंध है, उससे ट्रांजेक्शन क्या हुआ, क्या नहीं हुआ, ये सब था। यदि आपके यहां छापा पड़ा है तो आपके यहां की संपत्ति के बारे में जांच करें। एक सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की मीडिया बेहद संवदेनशील है। ऐसे व्यवसायी और राजनेताओं के यहां भी छापा पड़ने की खबरें आई जहां आईटी की अधिकारी गए ही नहीं।









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