छत्तीसगढ़  / तीन विक्षिप्त महिलाएं मां बनीं, बच्चों का पिता कौन है पता नहीं? मातृछाया में दुधमुंहों की परवरिश



Bilaspur 3 mentally handicapped women became mothers, who is the father of children, do not know?
X
Bilaspur 3 mentally handicapped women became mothers, who is the father of children, do not know?

  • संवेदना ये कहानी है उन महिलाओं की, जिनके साथ हुई गलत घटनाएं
  • मानसिक अस्पताल में मां को मिल रहा सहारा, लोग कहते हैं- किसी भी रूप में हो, जिंदगी जीतती है 

Dainik Bhaskar

Apr 17, 2019, 10:34 AM IST

आशीष दुबे। बिलासपुर. इनकी कहानी सड़क से शुरू हुई। लावारिसों की तरह भटकती हुई। ना खाने का ठिकाना, ना रहने का ठौर। तन पर लिबास पहनने का सलीका तो दूर, पता नहीं है कहां से आई हैं... और कहां पर जाना है? राह चलते कोई असामाजिक तत्व मां बना गया। अस्पताल में सुरक्षित प्रसव के बाद तीन बच्चे हुए। एक लड़का। दो लड़कियां। अब इनके बच्चों की जिंदगी दो राहे पर खड़ी हो गई। अभी इंतजार है इनकी मांओं के स्वस्थ होने का। इन्होंने बच्चों को अपनाया तो दे देंगे। नहीं तो एडॉप्शन की प्रक्रिया। इसलिए ही तीनों को मातृछाया के पदाधिकारियों ने विशेष निगरानी में रखा है। 

छह महीने से रह रही हैं महिलाएं, बिलासपुर की सड़कों पर मिलीं

  1. एकबारगी इनकी कहानी को सुनकर मन सिहर उठता है। मेंटल अस्पताल के संचालक डॉ. बीआर नंदा बताते हैं कि तीनों विक्षिप्त महिलाएं उनके यहां कोई छह महीनों से रह रही हैं। दो बिलासपुर की सड़कों पर मिलीं और एक सरगांव से लाई गईं। कुछ लोग इनके लिए मसीहा बनें। उन्होंने ही अपनी सुविधाओं से इन्हें अस्पताल तक पहुंचाया। तीनों के पेट में बच्चा था, इसलिए इन्हें भी विशेष देखरेख की जरूरत थी। अलग वार्ड में रखा गया। वे मानसिक रोगी हैं, इसलिए कब दूसरों या खुद के शरीर के साथ क्या कर जाए पता नहीं।

  2. इसलिए इनके साथ एक केयरटेकर रखा गया तब जाकर आज सबकुछ ठीक हो पाया है। कुछ दिन पहले ही सिम्स अस्पताल में तीनों महिलाओं की सुरक्षित प्रसव करवाया गया। बच्चे भी बिल्कुल स्वस्थ हैं। इन तीनों बच्चों को फिलहाल कुदुदंड स्थित मातृछाया में रखा गया है। सचिव भास्कर वर्तक के मुताबिक सभी बच्चों की तरह इन्हें भी वह सारी सुविधाएं मिल रही हैं जो इनके अधिकार में हैं। पर एक दर्द है कि मां होते हुए भी इन्हें मां से दूर रखा गया है। जब तक वे स्वस्थ नहीं हो जातीं। उन्हें बच्चे को दे नहीं पाएंगे। 

  3. ठीक होने पर मां से मिलते हैं बच्चे 

    मेंटल अस्पताल प्रबंधन के मुताबिक इन तीनों मां में जब भी मानसिक तौर पर कोई ठीक अवस्था में पहुंचती हैं तो उन्हें एंबुलेंस से मातृछाया बच्चों को दिखाने ले जाते हैं। जब भी ये माएं बच्चों से मिलती हैं उन्हें एकटक निहारती हैं। 

  4. तीनों मां मानसिक अस्पताल में 

    मातृछाया में रह रहे तीन मासूमों की मां मानसिक रोगी अस्पताल में है। अभी इनके परिजनों का पता नहीं है। आने वाले दिनों में देखेंगे कि इनकी बेहतरी के लिए क्या कर सकते हैं।

    डॉ. बीआर नंदा, संचालक, मानसिक रोगी अस्पताल 

COMMENT

आज का राशिफल

पाएं अपना तीनों तरह का राशिफल, रोजाना