बिलासपुर  / गौरवपथ में भ्रष्टाचार : जांच कमेटी बदलती गई और दोषी से आरोप मुक्त हो गए 8 इंजीनियर, अब बताया पूरी गड़बड़ी ठेकेदार की

गौरव पथ बिलासपुर। गौरव पथ बिलासपुर।
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गौरव पथ बिलासपुर।गौरव पथ बिलासपुर।

  • मंगला नाका से महाराणा प्रताप चौक तक बने गौरवपथ निर्माण में भ्रष्टाचार की सात सालों तक चलती रही जांच 
  • पहले की जांच कमेटी ने कहा था सभी दोषी हैं, हाईकोर्ट का आदेश था जांचकर इनके खिलाफ एफआईआर करें

दैनिक भास्कर

Mar 18, 2020, 11:05 AM IST

बिलासपुर. छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में गौरवपथ निर्माण में हुए भ्रष्टाचार को लेकर करीब सात वर्षों तक जांच चलती रही। अब इस जांच रिपोर्ट को अायुक्त नगर निगम और शासन को सौंप दिया गया है। जांच कमेटी ने सभी 8 इंजीनियरों को क्लीनचिट देते हुए कार्रवाई की अनुशंसा नहीं की है। बल्कि पूरी गड़बड़ी के लिए ठेकेदार को जिम्मेदार बताया है। खास बात यह है कि पहले की जांच कमेटी ने इन सभी इंजीनियरों को दोषी माना था और हाईकोर्ट ने जांच कर एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए थे। 


दरअसल, मंगला नाका से महाराणा प्रताप चौक तक 12.59 करोड़ की लागत वाले गौरवपथ का निर्माण किया गया था। इस मामले में भ्रष्टाचार सामने आने के बाद अक्टूबर 2011 में हाईकोर्ट के आदेश पर हुई जांच में 8 इंजीनियरों को दोषी पाया गया। उनके खिलाफ कार्रवाई के आदेश हुए, लेकिन अधिकारी उन्हें बचाते रहे। 8 वर्षों में लगातार जांच पर जांच होती रही, अधिकारी बदलते रहे पर जांच को मुकाम हासिल नहीं हुआ। राज्य में सत्ता बदलते साथ तत्कालीन जांच अधिकारी चीफ इंजीनियर एसके जैन को हटा दिया गया। 

सत्ता बदलने के बाद नगरीय प्रशासन विभाग के संचालक को सौंपी गई जांच

नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग की संचालक अलरमेलमंगई डी. ने यूके धलेंद्र को जांच का जिम्मा सौंपा। जांच रिपोर्ट में उन्होंने सभी आरोपी इंजीनियरों को क्लीन चिट दे दी। सीवेज के निर्माण कार्यों की पीएमसी मेनहार्ट को ही जिम्मेदार ठहरा दिया गया, जबकि उसने रोड के एक हिस्से के ही सुधार कार्य की मानिटरिंग की थी। 2600 मीटर की सड़क के निर्माण का ठेका टुकड़ों में सिंप्लेक्स, साईं कंस्ट्रक्शन, अतुल शुक्ला और अग्रवाल इन्फ्राबिल्ड को दिया गया। कंस्ट्रक्शन कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की अनुशंसा की गई। 


हाईकोर्ट ने नकारी थी पहली जांच
हाईकोर्ट के आदेश पर तत्कालीन आयुक्त रानु साहू ने साल 2016 में अधीक्षण अभियंता भागीरथ वर्मा, मिथिलेश अवस्थी डिप्टी कमिश्नर, मनोरंजन सरकार कार्यपालन अभिंयता, सहायक अभियंता अनुपम तिवारी एवं हृदयराम बघेल को मामले की जांच का जिम्मा सौंपा। जांच कमेटी ने जिम्मेदारों को क्लीन चिट दे दी। हाईकोर्ट ने कमेटी की रिपोर्ट को नकारते हुए पीडब्ल्यूडी के प्रमुख सचिव, इंजीनियर इन चीफ एवं चीफ इंजीनियर को गौरवपथ की जांच के आदेश दिए थे।

इनको जिम्मेदार पाया गया था
हाईकोर्ट के आदेश पर हुई जांच में 8 इंजीनियरों और 3 ठेकेदारों को दोषी पाया गया। जिन ठेकेदारों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश दिए गए उनमें सिंप्लेक्स इन्फ्रा स्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड, मेसर्स अग्रवाल इन्फ्राबिल्ड एवं साईं कंस्ट्रक्शन। इसी प्रकार नगर निगम में पदस्थ कार्यपालन अभियंता पीके पंचायती, सहायक अभियंता एमपी गोस्वामी, गोपाल सिंह ठाकुर, सुरेश शर्मा, कार्यपालन अभियंता यूजिन तिर्की, राजकुमार साहू,एमएस उज्जैनी एवं ललित त्रिवेदी को दोषी माना गया। 


एक्शन की रिकमंडेशन नहीं

गौरवपथ मामले की जांच रिपोर्ट मिल गई है। अभी इसका पूरा अध्ययन नहीं हो पाया। इसमें किसी इंजीनियर के खिलाफ एक्शन की रिकमंडेशन नहीं है। पीएमसी को जरूर जिम्मेदार माना गया है। पीएमसी उस वक्त कौन थी..? इसकी जानकारी नहीं है।
प्रभाकर पांडेय कमिश्नर नगर निगम

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