कांग्रेसियों पर लाठीचार्ज  / एएसपी को नौ समन, एक बार आए पर बयान नहीं दिया



फाइल फोटो फाइल फोटो
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  • अतिरिक्त दंडाधिकारी की ओर से 4 बार भेजा जा चुका है समन, 28 मई को भी होना था पेश
  • तीन बार कर चुके हैं तारीख बढ़ाने के लिए आवेदन, एक बार आए भी तो नहीं दर्ज कराया बयान 

Dainik Bhaskar

May 29, 2019, 10:38 AM IST

बिलासपुर. कांग्रेस भवन में कार्यकर्ताओं और नेताओं पर हुए लाठीचार्ज मामले में चल रही जांच में बयान देने एक बार फिर एएसपी नीरज चंद्राकर नहीं आए। उन्हें अतिरिक्त दंडाधिकारी कोर्ट में पेश होना था। ऐसा वे नौ बार कर चुके हैं। इतने ही बार उन्हें अतिरिक्त दंडाधिकारी ने समन भेजा है। ये समन उन्हें चार माह के भीतर भेजा गया है। एक बार वे आए भी थे लेकिन बयान देने की बजाय समय मांग कर चले गए। तीन बार उनके अधिवक्ता तारीख बढ़ाने की मांग कर चुके हैं। 

जांच टीम को पांच माह में देनी थी रिपोर्ट, आठ माह बीत गए

  1. आठ माह पहले कांग्रेस भवन के सामने हुए लाठीचार्ज मामले में अपर कलेक्टर बीएस उइके को सात बिंदुओं में जांच कर तीन माह में रिपोर्ट देने कहा गया था। फिर उन्हें दो माह का और समय दिया गया लेकिन उसमें भी जांच पूरी नहीं हो सकी है। इस बीच विधानसभा के साथ ही लोकसभा के चुनाव में भी हो गए। टीआई अंजू चेलक और टीआई प्रवीण राजपूत के इसी माह तो पहले कांग्रेस महामंत्री अटल श्रीवास्तव, जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष विजय केशरवानी, शहर अध्यक्ष नरेंद्र बोलर, अभय नारायण राय सहित अन्य कांग्रेसियों और सिम्स व जिला अस्पताल के डॉक्टरों का बयान दर्ज हो चुका है। 

  2. केवल एडिशनल एसपी नीरज चंद्राकर का बयान नहीं होने के कारण जांच आगे नहीं बढ़ पा रही है। तीन बार उनके अधिवक्ता बयान के लिए तारीख बढ़ाने की मांग कर चुके हैं, जबकि वे खुद एक बार आकर ऐसा कर चुके हैं। मंगलवार को उन्हें आना था लेकिन वे नहीं आए। उनका बयान नहीं होने की वजह से जांच पूरी नहीं हो पा रही है। कांग्रेसी भी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। वे भी नहीं जिन्हें लाठी चार्ज के दौरान चोट लगी थी और अस्पताल में भर्ती थे। ऐसे में पूरा मामला अटका हुआ है। समय मांग तो एडिशनल एसपी रहे हैं, लेकिन जांच टीम को मिल रही है हर बार तारीख पर तारीख। 

  3. एएसपी को कब-कब भेजे समन 

    • 1 फरवरी 2019 
    • 6 फरवरी 2019 
    • 13 फरवरी 2019 
    • 20 फरवरी 2019 
    • 27 फरवरी 2019 
    • 13 मार्च 2019 
    • 20 मार्च 2019 
    • 10 अप्रैल2019 
    • 30 अप्रैल 2019 

    नीरज चंद्राकर के नेतृत्व में चलीं थी लाठियांमंत्री अमर अग्रवाल के आवास पर 18 सितंबर को कूड़ा फेंकने के बाद सभी कार्यकर्ता कांग्रेस भवन में बैठे हुए थे। इसी दौरान पुलिस अंदर घुसी और कांग्रेसियों पर लाठीचार्ज कर दिया। इसमें कांग्रेस महामंत्री अटल श्रीवास्तव समेत कई कार्यकर्ता गंभीर रूप से घायल हो गए थे। आरोप है कि पुलिस की ओर से यह सारी कार्रवाई एडिशनल एसपी नीरज चंद्राकर के नेतृत्व में की गई। फिर राजनीतिक भूचाल आ गया। घटना की सभी ने निंदा की। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने इसे मोदी की हुकूमत में तानाशाही पेशा करार दिया था। 

  4. भूपेश बघेल ने दी थी तत्कालीन सरकार को चेतावनी

    प्रदेश अध्यक्ष भूपेश बघेल ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर लाठीचार्ज मामले को अपने ट्विटर अकाउंट से ट्वीट कर तत्कालीन सरकार को तानाशाह करार दिया था। उन्होंने कहा कि 20 सितंबर यानी 24 घंटे में दोषी अफसरों पर कार्रवाई नहीं की गई तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 22 सितंबर को छत्तीसगढ़ की धरती पर जोरदार स्वागत किया जाएगा। विरोध बढ़ता देख 19 सितंबर को तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ.रमन सिंह ने दंडाधिकारी जांच के आदेश दिए। अतिरिक्त कलेक्टर बीएस उइके को जांच अधिकारी बनाकर तीन माह में सात बिंदुओं में जांच कर रिपोर्ट देने कहा गया।

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