लापरवाही / 100 बेड वाले मातृ-शिशु अस्पताल में लगे 20 में से 4 सीजफायर एक्सपायर, जो बचे उनमें भी निकल रही गैस



bilaspur news bad condition of fire safety measures in 100 bed government hospital
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bilaspur news bad condition of fire safety measures in 100 bed government hospital

  • सिम्स में हुए हादसे के बाद भी नहीं चेता जिला अस्पताल प्रबंधन
  • अधिकारी बोले, एक साल चलता है, अभी तो छह माह ही बीते हैं

Dainik Bhaskar

Feb 13, 2019, 09:38 AM IST

बिलासपुर.  सिम्स में हुए  हादसे के बाद भी जिला अस्पताल प्रबंधन नहीं चेता। 100 बेड वाले मातृ-शिशु अस्पताल में एक्सपायर हो चुके सीजफायर के सिलेंडर लगा रखे हैं। अस्पताल में 20 से ज्यादा सीज फायर के सिलेंडर आग लगने पर बुझाने के लिए लगा रखे हैं लेकिन इनमें से चार एक्सपायर हो चुके हैं। 

सिम्स में एनआईसीयू में धुआं भरने से 5 बच्चों की हो गई थी मौत

  1. सिम्स के इलेक्ट्राॅनिक पैनल में लगी आग के हादसे के बाद भी जिला अस्पताल प्रबंधन ने कोई सबक नहीं लिया। सिम्स में आग लगने के बाद एनआईसीयू में काला धुआं भर गया था जिससे प्राइवेट अस्पतालों में शिफ्ट किए गए पांच नवजात की मौत हो गई थी।

  2. कैसे करते हैं पहचान 

    सीज फायर के सिलेंडर में ऊपर की तरफ लाल व हरा निशान होता है, इनके बीच में एक कांटा रहता है। अगर कांटा हरा निशान पर रहे तो माना जाता है कि सीजफायर का सिलेंडर सही है। अगर कांटा लाल निशान पर रहे तो माना जाता है कि सिलेंडर में गैस खत्म हो चुकी है।

  3. मातृ-शिशु अस्पताल में चार सीजफायर के सिलेंडर ऐसे हैं जिनमें लाल निशान पर कांटा आ टिका है। वहीं कुछ ऐसे सिलेंडर भी हैं जो लाल निशान की तरफ बढ़ रहे हैं। इससे यह माना जा सकता है कि धीरे-धीरे अन्य सिलेंडर में से भी गैस खत्म होती जा रही है। 

  4. इन हालात में हो जाती है गैस खत्म 

    अग्निशमन यंत्र के एक विक्रेता के अनुसार सिलेंडर में से गैस तब समाप्त होती जाती है जब उसका वॉल्व ढीला रह जाए। इसके अलावा लॉक खुला हो या फिर उपयोग करने के बाद उसे लटका दिया गया हो। इन हालातों में सिलेंडर में से गैस धीरे-धीरे लीक होती रहती है और कुछ दिनों बाद समाप्त हो जाती है। गैस समाप्त होने पर ही कांटा लाल निशान पर आ जाता है। 

  5. अभी तो छह माह हुए हैं

    मातृ-शिशु अस्पताल हैंडओवर हुए अभी छह माह ही हुए हैं, सीजफायर के सिलेंडर एक वर्ष तक चलते हैं। हो सकता है कि पुराने लगवा दिए हों। फिर भी यह गंभीर बात है और बुधवार को सिलेंडर की ही जांच कराई जाएगी।

    डाॅ. मनोज जायसवाल, आरएमओ, जिला अस्पताल 

     

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