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किसी के पिता मिस्त्री, कोई करता है पुताई, हौंलसे के दम पर चार कबड्‌डी खिलाड़ी पहुंच गए साई

एक वर्ष पहले
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  • शहर के सबसे पिछड़े मोहल्ले चिंगराजपारा के दो किशोर व दो किशोरियों ने का दांव 
  • देवास में हुए स्कूल नेशनल गेम्स, पुणे में खेलो इंडिया खेलो में शानदार प्रदर्शन का नतीजा

दीपेंद्र शुक्ला। बिलासपुर. चिंगराजपारा, बिलासपुर का सबसे पिछड़ा इलाका। पेंटर, राजमिस्त्री और मजदूरों की संख्या अधिक है। यहां की गलियों में खेलकर बड़े हुए बच्चे अब अपने मोहल्ले और शहर का नाम रोशन कर रहे हैं। चार कबड्‌डी खिलाड़ियों का चयन साई यानी भारतीय खेल प्राधिकरण के लिए हुआ है। अब वे हिमाचल और गुजरात में कबड्‌डी का गुर सीखेंगे। यहां बात हो रही है, हीरा मेहरा, सरिता साहू, विजय साहू और उमेश पोर्ते की।

1) किशोरियों को हिमचाल प्रदेश, किशोर गुजरात में लेंगे प्रशिक्षण

ये सभी खिलाड़ी चिंगराजपारा में रहते हैं। हां, उसी चिंगराजपारा में जहां, कभी राष्ट्रीय खिलाड़ी भरत यादव का जन्म हुआ और अब उनके नाम पर चौक भी है। विजय साहू के पिता पुन्नी लाल साहू पेंटर का काम करते हैं। वहीं उमेश पोर्ते के पिता मनहरण लाल पोर्ते राजमिस्त्री हैं। सरिता साहू के पिता चैतराम साहू राजमिस्त्री हैं तो हीरा मेहरा के पिता लालजी महरा पेंटर हैं। 

बचपन से ही ये बच्चे कबड्‌डी संघ की संपर्क में आए और वरिष्ठ खिलाड़ियों ने इन्हें तराशना शुरू किया। जिला कबड्डी संघ के अध्यक्ष डॉ. बसंत अंचल, सचिव हेमंत यादव, प्रदीप यादव, डॉ. शंकर यादव, ओमकार जायसवाल सहित अन्य ने खिलाड़ियों का हौंसला बढ़ाया। देवास में 2018-19 के स्कूल नेशनल गेम्स में छत्तीसगढ़ की ओर से खेलते हुए हीरा और सरिता के शानदार प्रदर्शन की बदौलत टीम उप विजेता बनी। 

बालक वर्ग में विजय और उमेश के प्रदर्शन से टीम को तीसरा स्थान मिला। इस प्रदर्शन के आधार पर बिलासपुर के इन चारों खिलाड़ियों का चयन छत्तीसगढ़ की खेलो इंडिया खेलो टीम के लिए हुआ। खेलो टैलेंट हंट का राष्ट्रीय मुकाबला पुणे में हुआ। यहां भी शानदार प्रदर्शन किया। हीरा और सरिता हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला के साई सेंटर गई है तो विजय और उमेश गुजरात के गांधीनगर सेंटर के लिए रवाना हो चुके हैं। 

अब साई टीम का प्रतिनिधित्व करेंगे

  • ये खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर पर होने वाले कबड्डी के मुकाबलों में अंडर-17 वर्ग में भारतीय खेल प्राधिकरण टीम का प्रतिनिधित्व करेंगे। यहां अच्छा खेले तो खिलाड़ियों का चयन भारतीय टीम के लिए हो सकती है। 

खेल के साथ पढ़ाई में भी अव्वल 

  • हीरा और सरिता दोनों बहतराई स्कूल में पढ़ती हैं। दोनों ही खिलाड़ी 12वीं में थीं। इसमें हीरा ने 60 प्रतिशत और सरिता ने 68 प्रतिशत अंक के साथ 12वीं कक्षा पास की। इसी तरह विजय साहू बिलासपुर पब्लिक स्कूल व उमेश कुमार पोर्ते छत्तीसगढ़ स्कूल के अच्छे छात्रों में एक हैं। 

मां नहीं है, खिलाड़ी बहन से मिली प्रेरणा 

  • कबड्‌डी खिलाड़ी विजय साहू की मां नहीं हैं। बड़ी बहन कविता साहू राष्ट्रीय कबड्डी खिलाड़ी बनी और इसके आधार पर गरियाबंद में वन विभाग में नौकरी लगी। कविता ने विजय को भी कबड्‌डी खेलने के लिए प्रेरित किया। 
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