छत्तीसगढ़  / मेघा कोचिंग में बच्चों के प्रवेश पर रोक, 1800 छात्र-छात्राओं को इंतजार



bilaspur news free education to poor govt initiative megha coaching operations stopped
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  • नई सरकार बनने के बाद लगी रोक, नई कमेटी की नहीं हुई बैठक, मेरिट लिस्ट की प्रतीक्षा 
  • पूर्व भाजपा सरकार ने गरीब बच्चों निशुल्क पढ़ाने के लिए अक्टूबर 2018 में की थी शुरुआत

Dainik Bhaskar

Aug 23, 2019, 11:01 AM IST

बिलासपुर. सरकार की निशुल्क मेघा कोचिंग में इस साल बच्चों को प्रवेश नहीं मिल पाया है। नई सरकार बनने के बाद ही 11वीं के छात्र-छात्राओं के प्रवेश पर रोक लग गई है। इससे 14 मई को प्रवेश परीक्षा देने वाले 1800 स्टूडेंट बेसब्री से मेरिट लिस्ट का इंतजार कर रहे हैं। साथ ही मेघा कोचिंग में खर्च होने वाले 40 लाख रुपए को भी रोक दिया गया है। 

पहले कलेक्टर अध्यक्ष थे, अब प्रभारी मंत्री के पास जिम्मेदारी

  1. पुरानी सरकार ने अक्टूबर 2018 में गरीब बच्चों का भविष्य संवारने के लिए मेघा कोचिंग शुरू की थी। नई सरकार ने सत्ता में आते ही प्रवेश प्रक्रिया पर रोक लगा दी है। पहले जिला खनिज संस्थान न्यास कमेटी के अध्यक्ष कलेक्टर थे। अब इन्हें हटाकर प्रभारी मंत्री की अध्यक्षता वाली नई कमेटी का गठन किया गया है। लेकिन कमेटी की बैठक अभी नहीं हुई है। इस कारण बच्चों को प्रवेश नहीं मिल पा रहा है। 

  2. सात केंद्रों में हुई थी परीक्षा 

    एडीटीओ मनोज राय ने बताया कि सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले सभी बच्चे कोचिंग में प्रवेश के लिए पात्र हैं। इस बार बच्चों की प्रवेश परीक्षा 14 मई को हुई थी। परीक्षा के लिए जिले में सात केंद्र बनाए गए थे। इनमें 1800 बच्चों ने परीक्षा दी थी। अभी मेरिट लिस्ट जारी नहीं हो पाई है। 

  3. पिछले साल के 48 बच्चों को दे रहे कोचिंग 

    उसलापुर में बने मेघा आवासीय प्रशिक्षण केंद्र में पिछले साल के 48 बच्चों को अभी विशेष कोचिंग दी जा रही है। पीटी, पीएमटी, आईआईटी और जेईई मेन्स की तैयारी कर रहे हैं। 12वीं के बच्चे पास होकर निकल चुके हैं। 11वीं से 12वीं में पहुंचे बच्चों को कोचिंग दी जा रही है। इनमें 37 छात्राएं हैं। पुराने पैसे अभी बचे हैं। इसी से बच्चों की पढ़ाई व अन्य खर्चे चल रहे हैं। 

  4. एक बच्चे पर हर महीने 3500 रुपए खर्च 

    परीक्षा के बाद मेरिट के आधार पर 50 बच्चों का चयन करते हैं। चयनित बच्चों के खाने, रहने, ड्रेस, पढ़ाई समेत पूरा खर्चे विभाग द्वारा वहन किया जाता है। यानी एक बच्चे पर 3500 रुपए हर महीने खर्च होते हैं। इस बार योजना का दूसरा साल था। वर्ष 2018 में 11वीं और 12वीं के छात्र-छात्राओं को प्रवेश दिया गया था। इस बार प्रवेश नहीं हो पाया है। 

  5. बैठक के बाद होगी प्रवेश प्रक्रिया: जिपं सीईओ रितेश अग्रवाल का कहना है कि नई कमेटी के गठन में समय लग गया है। प्रभारी मंत्री के आदेश के बाद बैठक होगी। इसके बाद प्रवेश प्रक्रिया शुरू होगी।

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