जल संरक्षण / तीन स्टूडेंट ने गंदे पानी को स्वच्छ कर उपयोग लायक बनाने का तरीका ढूंढा



गंदे पानी को उपयोग लायक बनाने का तरीका बताती भारत माता स्कूल की छात्रा। गंदे पानी को उपयोग लायक बनाने का तरीका बताती भारत माता स्कूल की छात्रा।
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गंदे पानी को उपयोग लायक बनाने का तरीका बताती भारत माता स्कूल की छात्रा।गंदे पानी को उपयोग लायक बनाने का तरीका बताती भारत माता स्कूल की छात्रा।

  • भारत माता स्कूल के छात्र-छात्राओं ने चार माह के रिसर्च के बाद विकसित की तकनीकि
  • पुणे में हुए संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम में भी कर चुके हैं प्रस्तुत, पेटेंट कराने भारत सरकार को भेजा 

Dainik Bhaskar

Aug 19, 2019, 10:42 AM IST

राजू शर्मा। बिलासपुर. जल संकट से जूझ रहे लोगों को देखा,  बस पानी बचाने की ठान बैठे। चार महीने रिसर्च कर भारत माता स्कूल के छात्र-छात्राओं ने सड़क, नाली में भरे पानी को साफ करने की देसी तकनीक विकसित की। कक्षा आठवीं की छात्रा हिमांगी हालदार, बीएससी की छात्रा पूनम सिंह और युवा शोधकर्ता उत्तम तंबोली देसी विधि से गंदे पानी को शुद्ध करने के बाद पीने लायक बनाने का दावा कर रहे हैं। 

पानी साफ करने की विधि का नाम जल अमीया, अपनाते हैं देसी तरीका

  1. अपनी तकनीक का सैंपल पेटेंट कराने के लिए तीनों छात्रों ने इसे भारत सरकार को भेजा है। इससे पहले 9 अगस्त को संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम के सहयोग से पुणे में पेटेंट रिव्यू में प्रदर्शित किया गया तो इसे सराहा गया। सल्फाइड पेपर टेस्ट द्वारा पानी में उपस्थित मल जनित बैक्टीरिया के टेस्ट में भी इसे सफलता मिली। जल शुद्धिकरण की इस विधि के बाद स्वच्छ किए गए पानी का परीक्षण विभिन्न मानकों के तहत किया गया। 

  2. सभी में सफलता का दावा किया गया है। पानी साफ करने की विधि का नाम रखा गया है जल अमीया (संस्कृत में इसका नाम अमृत है)। इसे तैयार करने वाले तीनों स्टूडेंट्स नेचर बाडीस विज्ञान क्लब के सदस्य हैं। भारत माता स्‍कूल के प्राचार्य फादर देवसिया मणिमला और शिक्षकों ने प्रोजेक्ट को यहां तक पहुंचाने में सहयोग किया है। छात्र बताते हैं कि पानी साफ करने के लिए सबसे पहले मुनगा का बीज, तुलसी और नीम की पत्ती का रस निकालते हैं। 

  3. इसके बाद निर्मली के छिलके को उचित मात्रा में मिलाकर जल-अमीया का निर्माण करते हैं। फिर इसे औसत 10 लीटर पानी में 0.5 एमएल मिलाते हैं। पानी को हिलाने के बाद छोड़ देते हैं। दो मिनट बाद अघुलनशील अशुद्धियां में परिवर्तित होकर नीचे बैठ जाती है। फिर पानी को छानकर अलग कर लेते हैं। अब यह पानी पूरी तरह से साफ हो जाता है। फिर इस पानी को कपड़े, बर्तन धोने और उद्यानों और बगीचों में आसानी से उपयोग कर सकते हैं। इसे फिल्टर कर पी भी सकते हैं। 

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