छत्तीसगढ़ / सेफ्टी अफसर मौजूद नहीं था, मजदूरों का बीमा और श्रम विभाग में रजिस्ट्रेशन भी नहीं कराया



इसी को बांधने में हुई थी गड़बड़ी। जीआई तार से बांधा गया था। क्रास का यह चिह्न जैसे पहले से ही खतरे का संकेत दे रहा था। इसी को बांधने में हुई थी गड़बड़ी। जीआई तार से बांधा गया था। क्रास का यह चिह्न जैसे पहले से ही खतरे का संकेत दे रहा था।
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इसी को बांधने में हुई थी गड़बड़ी। जीआई तार से बांधा गया था। क्रास का यह चिह्न जैसे पहले से ही खतरे का संकेत दे रहा था।इसी को बांधने में हुई थी गड़बड़ी। जीआई तार से बांधा गया था। क्रास का यह चिह्न जैसे पहले से ही खतरे का संकेत दे रहा था।

  • लापरवाही का पुल : नेशनल हाइवे पुल पर सुरक्षा मापदंडों की अनदेखी की पुष्टि
  • एनएचएआई के अफसरों ने दो अधिकारियों को सौंपी गई है जांच की जिम्मेदारी 
  • 1261 करोड़ रुपए का है प्रोजेक्ट, लोखंडी फाटक पर हुए हादसे के तीसरे दिन भी नहीं पहुंचे इंजीनियर

Dainik Bhaskar

Jun 14, 2019, 11:07 AM IST

बिलासपुर.  1261 करोड़ जैसे मेगा प्रोजेक्ट में भी लोखंडी फाटक के पास हुए हादसे के तीसरे दिन एनएचएआई का कोई भी इंजीनियर नहीं पहुंचा। इस हादसे में एक मजदूर की जान चली गई और दो घायल हो गए थे। निर्माणाधीन आरओबी में सैंटरिंग का ढांचा तैयार करते वक्त एनएचएआई के अफसरों ने सुरक्षा के मापदंडों की अनदेखी करते हुए मजदूरों को यूं ही छोड़ दिया था और अब अफसर इसे मजदूरों की लापरवाही बता रहे हैं। 

20 से अधिक जगहों पर और भी हैं खतरे 

  1. हिर्री-तुर्काडीह बाइपास मार्ग पर लोखंडी के पास अडानी ग्रुप नया पुल बना रहा है। मंगलवार की शाम तेज हवा से इसका एक ओर का स्ट्रक्चर गिर गया। पूरा सरिया से खड़ा था। हादसे में कोरबा जिले के नुनेरा दीपिका रोड ग्राम ढेढ़ीकुआं निवासी अर्जुन सिंह पोर्ते (25) की मौत हो गई थी और देवानंद सरोते (22) व जांजगीर चांपा जिले के ग्राम मुरलीडीह निवासी हेमंत मोरगे (21) वर्ष दबकर घायल हो गए। दोनों को सिम्स में भर्ती कराया गया था। हालत गंभीर होने पर एक को रायपुर रेफर कर दिया गया। 

  2. वहीं दूसरे दिन भी बुधवार को दूसरी ओर का भी स्ट्रक्चर बिना हवा पानी के ही गिर पड़ा। मजदूरों ने उसके भी गिरने की संभावना जताई थी। हादसे के कारण काम बंद था इसलिए वहां मजदूर काम पर नहीं थे। इस वजह से बड़ा हादसा टल गया। घटना के समय ग्रुप के दो इंजीनियर मौजूद थे पर दोनों दूर खड़े थे। हेमंत का कहना है कि उनके काम का समय सुबह आठ बजे से शाम 5 बजे तक का है पर ठेकेदार उनसे लगातार दो घंटे एक्स्ट्रा काम करा रहा था। यदि 5 बजे तक काम बंद हो गया होता तो मजदूर हादसे का शिकार नहीं होते। वहां पर सुरक्षा की भी अनदेखी की जा रही थी। 

  3. कंपनी में जोखिम वाले कामों में देखरेख के लिए सुरक्षा अधिकारी होते हैं लेकिन तब कोई भी सुरक्षा अधिकारी मौजूद नहीं था। सुरक्षा अधिकारी राम ठाकुर से हादसे के दौरान मौजूद नहीं होने के सवाल पर उन्होंनें कुछ भी कहने से इंकार कर दिया। लोखंडी फाटक के पास हुए हादसों के लिए एनएचएआई के अफसर अभी भी गंभीर नहीं है। तीसरे दिन निर्माणाधीन आरओबी वाली जगह पर कोई भी अधिकारी मौजूद नहीं था, सिर्फ गार्ड को तैनात कर दिया गया था। फिलहाल मामले की जांच के लिए कंपनी के अधिकारी गौरांग देवधरे और एक अन्य अधिकारी नियुक्त किया गया है। 

  4. पेंड्रीडीह से लोखंडी फाटक तक 20 से अधिक जगहों पर पुलिया बनाने का काम चल रहा है। कहीं छोटी पुलिया और कहीं कांक्रीट वाली मध्यम पुलिया का निर्माण चल रहा है। कई जगहों पर लाेखंडी फाटक जैसे हादसे के बाद भी मजदूर अपने आपको खतरे में डालकर काम रहे हैं जबकि उनका बीमा तक नहीं हुआ है। 

  5. पुलिस ने शुरू की जांच 

    नेशनल हाइवे का लोखंडी के पास निर्माण हो रहे पुल में काम करने वाले मजदूरों का श्रम विभाग के पास पंजीयन नहीं कराया गया है। बिना रजिस्ट्रेशन के ही उनसे काम लिया जा रहा था। कंपनी के अधिकारियों ने एडीएम से पूछताछ के दौरान इस बात को स्वीकार किया है। पुलिस ने इस मामले की जांच शुरू कर दी है। घटना के समय वहां कौन कौन जिम्मेदार लोग मौजूद थे इसका पता लगाया जा रहा है। एएसपी ग्रामीण संजय ध्रुव के अनुसार जांच में नाम सामने आने के बाद उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। मामले में धारा 304ए लगाया जाएगा। उन्होंने बताया कि इसके लिए मजदूरों का बयान लिया जा रहा है। 

  6. अभी पिक्चर क्लियर नहीं, हो सकता है लेबर की वजह से हुआ हो हादसा 

    सवाल नरेंद्र सिंह, प्रोजेक्ट डायरेक्टर
    आप सुरक्षा के लिए ट्रेनिंग की बात कर रहे हैं, कब-कब दी गई थी मजदूरों को ट्रेनिंग।  यह ट्रेनिंग तो हर छह माह में दी जाती है। 
    छड़ों की हाइट और लोड के साथ कमजोर सपोर्टिंग क्या ढांचा गिरने का कारण है?  नहीं ऐसा नहीं है। ढांचा बनाने में छड़ें वर्टिकल ही लगाई जाती है। 
    बड़ा हादसा होने के बाद क्या आप मौके पर गए थे?  मैं अवकाश पर अभी बाहर हूं इसलिए नहीं जा सका। 
    हादसा के बाद आपने क्या कदम उठाया है?  हमनें दो अधिकारियो को जांच का जिम्मा दिया है। 
    हादसे में अब तक क्या चूक पाई गई?  अभी पिक्चर क्लियर नहीं है। हो सकता है लेबरों की लापरवाही से ही हादसा हुआ हो। 

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