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मोहभट्ठा फोरलेन पुल के 28 स्लैब में दरारें काली मिट्टी पर बनी एप्रोच रोड से खतरा

2 वर्ष पहले
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एनएचएआई के पुल की एप्रोच रोड बैठ गई। स्लैब में दरारंे आने से अब दोबारा बनाया जा रहा है। - Dainik Bhaskar
एनएचएआई के पुल की एप्रोच रोड बैठ गई। स्लैब में दरारंे आने से अब दोबारा बनाया जा रहा है।
  • पेंड्रीडीह से मस्तूरी रोड पर बने ब्रिज में भी काली मिट्टी के उपयोग से बढ़ा खतरा, 413.18 करोड़ का पूरा प्रोजेक्ट
  • एक साल में ही दिखने लगा भ्रष्टाचार : पुल के रिटेनिंग वॉल के अंदर मुरुम और फ्लाई एेश का पता नहीं

बिलासपुर. पेंड्रीडीह से मस्तूरी रोड पर बने ब्रिज में काली मिट्टी के उपयोग से पुल का अस्तित्व ही खतरे में पड़ गया है। फोरलेन पुल के एक ओर की एप्रोच रोड का मलबा पूरी तरह हटाने का काम चल रहा है और उसे फिर एनएचएआई ठेकेदार से रिकंस्ट्रक्शन कराया जा रहा है। काली मिट्टी के उपयोग करने से स्थिति यह है कि पुल में 28 स्लैब में दरारें आ गईं है। एप्रोच रोड की पिचिंग वाला एरिया भी बैठ रहा है। एनएचएआई के बिलासपुर सरगांव प्रोजेक्ट में मोहभट्टा पुल पर काली मिट्टी के उपयोग से आई दरारों व पुल बैठने के बाद पेंड्रीडीह पुल के समान उसका भी रिकंस्ट्रक्शन किया जा रहा है। 

1) 35.50 किमी की सड़क में तीन फोरलेन पुल बनाए गए

दरअसल इसी तरह पेंड्रीडीह पुल में भी ठेकेदार ने काली मिट्टी का उपयोग किया जिससे मिट्टी का कांपेक्शन सही तरह से नहीं हो पाया और इस पुल की 80 स्लैब में दरारें आ गईं। खास बात कि यह दरारें फैलती जा रही हैं। बिलासपुर से सरगांव तक के इस प्रोजेक्ट के लिए 413.18 करोड़ की राशि मंजूर की गई है। बिलासपुर से सरगांव तक 35.50 किमी तक फोरलेन सड़क बनाई जा रही है जिसमें बिलासपुर मोहभट्‌टा, बिलासपुर पेंड्रीडीह व बिलासपुर दर्रीघाट तीन फोरलेन पुल भी बनाए गए हैं। 

पेंड्रीडीह पुल के समान यहां भी एक ओर की एप्रोच रोड का मलबा हटाए जाने के बाद दूसरी ओर के एप्रोच रोड में इस्तेमाल की गई मिट्टी की असलियत सामने आ गई। एप्रोच रोड की मिट्टी की ऊपरी परत से नीचे तक काली मिट्टी ही नजर आ रही है। काली मिट्टी को कांपेक्शन के लिहाज से उपयुक्त नहीं माना जाता। इसके बाद भी मिट्टी का उपयोग किया गया। इससे पता चलता है कि अफसर कितना भ्रष्टाचार कर रहे हैं। 

यह सब एक दिन में नहीं हुआ। एप्रोच रोड बनाने में कई दिन लग जाते हैं। एप्रोच रोड के निर्माण के वक्त एक भी बार एनएचएआई के अफसर मौके पर जाते तो यह गड़बड़ी पकड़ में आ जाती। मतलब साफ है कि या तो अफसरों ने जानबूझकर इसे नजरअंदाज किया या फिर वे मौके पर गए ही नहीं। कारण जो भी हो। पुल में भ्रष्टाचार हुआ है इस बात का सबूत स्लैब में आई दरारें देखकर ही लगाया जा सकता है। 

पीडब्ल्यूडी के पूर्व चीफ इंजीनियर सुरेंद्र कुमार जैन बताते हैं कि काली मिट्टी का स्वभाव स्पंजी होता है। पानी पड़ते ही वह फूल कर सिकुड़ जाती है। फिलिंग के लिए उस पर रोलर चलाया ही नहीं जा सकता। पहले तो फिलिंग के लिए मिट्टी का उपयोग ही नहीं किया जाना चाहिए। इसकी बजाय मुरूम का उपयोग होना चाहिए। एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर नरेंद्र सिंह कह चुके हैं कि एक से अधिक जगहों पर निर्माण का दायरा बड़ा होने पर माॅनिटरिंग संभव नहीं होती। यही वजह मोहभट्‌टा और पेंड्रीडीह पुल के बैठने का कारण बनी। अफसर बताते हैं कि दोनों पुल का रिकंस्ट्रक्शन कराया जा रहा है। 

बिलासपुर पेंड्रीडीह फोरलेन पुल : यह पुल वर्ष 2018 में बना है तथा इसकी लंबाई 1.50 किलोमीटर है। यह पुल भी काली मिट्टी के उपयोग और कांपेक्शन सही नहीं होने की वजह से बैठा है। इसकी स्लैब में दरार की भी यही वजह माना जा रहा है। इसके लिए जिम्मेदार नेशनल हाइवे अथॉरिटी के अफसर हैं जो निर्माण के वक्त मॉनिटरिंग नहीं कर सके। 
लालखदान ओवरब्रिज : लालखदान ओवरब्रिज छह साल पहले शुरू हुआ था तब इसकी लागत 12.50 करोड़ थी लेकिन निर्माण में होने वाली देरी से इसकी लागत 32 करोड़ तक पहुंच गई है। इसकी लंबाई 818.07 मीटर है। इसे सेतु विभाग और रेलवे ने बनाया है। रेलवे के अफसरों की लापरवाही की वजह से पिलरों में खामियों को दुरुस्त करने में अतिरिक्त समय लगा। 

तुरकाडीह ओवरब्रिज : तुरकाडीह पुल में पुल में बड़े गड्ढे और सरिया नजर आने के बाद पैनलों का लेवल भी ऊपर नीचे हो गया है। पुल को सुंदरानी बिल्डर्स ने 3.20 करोड़ की राशि से समय से दो माह पहले ही बना दिया था। वर्ष 2014 में 3.62 करोड़ की राशि इसकी मरम्मत में खर्च कर दिए गए। पुल की खराब हालत के लिए जिम्मेदार सेतु विभाग के अफसर अब भी इसे गंभीरता से नहीं ले रहे। 
तिफरा ओवरब्रिज : 11 साल पहले 16 करोड़ की लागत से बने तिफरा ओवरब्रिज से लोगों को राहत की बजाय परेशानियां ज्यादा मिल रही हैं। ब्रिज में अकेले 70 गड्ढे हैं। 3 जगह तो सरिया नजर आ रहे हैं। गड्‌ढों की वजह से वाहन असंतुलित हो जाते हैं और हादसे होते हैं। पीडब्ल्यूडी के अफसरों को पुल का मेंटेनेंस कराना है लेकिन वे ध्यान नहीं देते। 

हेमूनगर ओवरब्रिज : हेमूनगर ओवरब्रिज का निर्माण वर्ष 2005 में किया गया था। तब से लेकर एक भी बार मेंटेनेंस सेतु विभाग ने नहीं किया है। पुल के दो जगहों पर सरिया तक निकल आए हैं जिससे गुजरने वाले वाहनों के दुर्घटना ग्रस्त होने की संभावना है। इसके लिए जिम्मेदार सेतु विभाग के अफसर कहते हैं कि टेंडर बुलाया गया है जल्द ही मेंटेनेंस होगा। 

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