मंडे पॉजिटिव / 700 दृष्टिबाधित बच्चों की आंख बनकर परीक्षा दे चुके हैं यूएसएफ के राइटर



राइटर की मदद से पेपर देती छात्रा।  राइटर की मदद से पेपर देती छात्रा। 
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राइटर की मदद से पेपर देती छात्रा। राइटर की मदद से पेपर देती छात्रा। 

  • अभय ने इस काम को  अकेले शुरू किया, अब प्रदेश भर में हजार से अधिक लोग टीम में 
  • झुग्गी बस्तियों में जाकर करते हैं वस्त्र दान व अन्नदान, साथ ही बीमार का कराते हैं इलाज 

Dainik Bhaskar

Jan 14, 2019, 10:13 AM IST

चंद्रकुमार दुबे, बिलासपुर. शहर की संस्था यूथ संस्कार फाउंडेशन (यूएसएफ) इकलौती संस्था है जो दृष्टिबाधित छात्र-छात्राओं के लिए राइटर का पैनल तैयार कर सहायक का काम करती है। अभी तक टीम के लोग 2700 छात्र छात्राओं को परीक्षा में राइटर के रूप में सहयोग कर चुके हैं। वहीं शहर की झुग्गी बस्तियों में जाकर वस्त्रदान,अन्नदान तो करते हैं और इलाज के लिए जरूरी चींजे भी जुटाते हैं।

फंड एकत्र करने के लिए लोगों के घरों में लगाते हैं झाड़ू-पोछा

  1. संस्था के संस्थापक अभय दुबे कहते हैं कि हैं कि स्कूल के समय उनके मन में दृष्टिबाधित लोगों के सहयोग करने का विचार आया। अब उनकी एक हजार से अधिक लोगों की पूरी टीम है। शहर के अलावा रायगढ़, कोरबा, दुर्ग, भिलाई, रायपुर के लोग भी इसमें शामिल हैं।

  2. सभी हर संभव दृष्टिबाधित छात्र-छात्राओं की मदद करते हैं। उनके लिए परीक्षा में सहायक (राइटर)के रूप में काम करते हैं। इसके अलावा शहर की झुग्गी झोपडिय़ों में जाकर वस्त्रदान व अन्न दान भी करते हैं। इसके लिए फंड इकट्ठा करने लोगों के घरों में जाकर झाड़ू-पोंछा डोनेशन मांगते हैं।

  3. उन्होंने राइटर पैनल बनाया है। इसकी प्रेरणा उन्हें नर्मदा नगर निवासी संजय सोढ़ी से मिली। दृष्टिबाधित होने के बाद भी 13 एग्जाम फाइट कर चुके हैं और वर्तमान में दिल्ली में सर्व शिक्षा अभियान के निर्देशक है। अभय व उनकी टीम पहले संजय की मदद करते थे।

  4. उनका राइटर बनते थे। इंटरव्यू दिलाने ले जाते थे। जब वे दिल्ली जाने लगे तो कहा कि यह काम रुकना नहीं चाहिए। वे जिस तरह से उनकी हेल्प की, अन्य ब्लाइंड बच्चों को भी ऐसे ही मदद की जरूरत है। उनकी बात का असर हुआ और हमनें संस्था बना लिया। इस संस्था में बिलासपुर के ही 8 स्कूल व 7 काॅलेज के छात्र शामिल हैं। 

  5. राइटर अरेंज करने में ही साल गुजर जाता था 

    छात्रा पुष्पा पाव देवकीनंदन स्कूल में कक्षा नवमी में टाॅपर रही। उसका कहना है कि राइटर अरेंज करने में वह सालभर पढ़ नहीं पाती थी। अब राइटर भाइयों की सहयोग से सालभर पढ़ पाते हैं। वे मेरे सुविधा के अनुसार आकर मदद करते हैं। 

  6. राइटर भइया-दीदी लोग बुक भी रिकार्ड कर देते हैं 

    देवकीनंदन स्कूल की ही 9वीं की छात्रा जूही लहरे के अनुसार राइटर भइया-दीदी मेरे घर आकर मुझे किताब पढ़कर सुनाते हैं और मेरे बुक को भी रिकॉर्ड कर के देते हैं। वे अच्छे राइटर हैं। इससे मैं बिना टेंशन पढ़ाई कर पा रही हूं। 

  7. लिखने के टेंशन में कई बार फेल हुई 

    देवकीनंदन स्कूल में सोमवती कैवर्त 10वीं की छात्रा है। उसका कहना है कि पहले उन्हें आसानी से राइटर नही मिलते थे। इस कारण कई बार वह परीक्षा में भाग नहीं ले पाई और फेल हो गई। अब उन्हें यह समस्या नहीं है। 

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