छत्तीसगढ़  / प्रदेश में मृतकों के नाम पर हर माह दुकानों से ले रहे थे 3 करोड़ रुपए का चावल



प्रतीकात्मक फोटो। प्रतीकात्मक फोटो।
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प्रतीकात्मक फोटो।प्रतीकात्मक फोटो।

  • डोर टू डोर सत्यापन में हुआ खुलासा, बिलासपुर में 467, प्रदेश में 39 हजार राशनकार्ड में गड़बड़ी
  • हर महीने 11 हजार क्विंटल चावल का उठाव, सबसे ज्यादा फर्जी राशनकार्ड महासमुंद में मिले

Dainik Bhaskar

Sep 14, 2019, 01:22 PM IST

सुनील शर्मा. बिलासपुर. छत्तीसगढ़ में मृतकों के नाम से हर माह 11 हजार क्विंटल चावल का उठाव किया जा रहा था। ऐसे करीब 39 हजार राशनकार्ड सामने आए हैं, जिनके मुखिया की मौत हो चुकी है। इस फर्जीवाड़े में सबसे आगे महासमुंद जिला है, जहां 4879 एेसे राशनकार्ड सामने आए हैं। जबकि बिलासपुर में 467 राशनकार्ड मिले हैं। इसका खुलासा डोर-टू-डोर सत्यापन से हुआ है। इससे पहले भी मृतकों के नाम पर राशन लिए जाने की शिकायतें मिलती रहीं लेकिन खाद्य विभाग ने कोई कार्रवाई नहीं की गई थी। 

प्रदेश में सत्यापन के लिए लगाए गए 58 लाख से ज्यादा शिविर

  1. प्रदेश में 58 लाख 56 हजार 418 राशनकार्ड के सत्यापन के लिए शिविर लगाया गया। इसके लिए सभी उपभोक्ताओं का राशनकार्ड अपडेट करने का निर्णय लिया गया। इसके लिए जुलाई में शिविर लगाया और इसके साथ ही सत्यापन के लिए कर्मचारी राशन कार्डधारियों के घर गए। उन्होंने पांच केटेगरी में एक तरह से सर्वे किया। इस आधार पर सर्वे होने पर यह पता चला कि प्रदेश में कुल 39 हजार 29 कार्ड तो इसलिए अपात्र हो गए क्योंकि उस परिवार के मुखिया की मृत्यु हो चुकी है। 

  2. यदि एक कार्ड में 4 सदस्य मान लें तो प्रति सदस्य 7 किलो के हिसाब से 28 किलो चावल प्रति कार्ड हर माह दिया जा रहा था। इस तरह करीब 11 हजार क्विंटल चावल का उठाव हो रहा था। बाजार में एक क्विंटल चावल की कीमत तीन हजार रुपए मान लें तो प्रत्येक माह प्रदेश में 3 करोड़ 27 लाख 92 हजार 760 रुपए की हेराफेरी हो रही थी। मृतकों के नाम पर चावल लेने के मामले में 4879 राशनकार्ड के साथ महासमुंद सबसे आगे हैं। दूसरे नंबर पर 4688 कार्ड के साथ रायगढ़ और सबसे कम बीजापुर में 180 कार्ड मिले। 

  3. इस तरह पांच कैटेगरी में किया गया सत्यापन

    पहला आवेदक के नाम पर अन्य राशनकार्ड में सदस्य या मुखिया के तौर पर दर्ज है। दूसरा मुखिया की मृत्यु हो चुकी है, तीसरा पात्रता का आधार सही नहीं है और चौथा आवेदन बताए गए पते पर नहीं मिला। सबसे अंतिम और पांचवां आवेदन नहीं मिला। ऐसा माना जा रहा है कि इन राशनकार्ड से हर माह शासकीय उचित मूल्य दुकान के संचालक चावल का उठाव कर उसे बाजार में खपा रहे थे। अब चूंकि सत्यापन में यह सामने आ चुका है इसलिए अब राशनकार्ड रद्द हो जाएगा।

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