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पुरुष पकड़ते हैं केकड़े और मछली, महिलाएं लगाती हैं गिलहरी-मुर्गे के पीछे दौड़; 250 सालों से जारी है परंपरा

एक वर्ष पहले
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मछली और केकड़ा पकड़ते प्रतिभागी।
  • जिले के मनेंद्रगढ़ के बैरागी गांव में होली के दो से तीन दिन बाद किया जाता है यह अनोखा आयोजन
  • ग्रामीण मनोरंजन के लिए इस खेल का आयोजन करते हैं, मान्यता है- इससे गांव में खुशहाली आती है

कोरिया (गुरुदीप अरोरा). जिले के मनेंद्रगढ़ विकासखंड में 35 किलोमीटर दूर ग्राम बैरागी में अनूठी परंपरा है। यहां ग्रामीणों ने प्रकृति से जुड़े खेल तैयार किए हैं। इसमें पुरुष केकड़े और मछली पकड़ने की प्रतियोगिता होती है। महिलाएं गिलहरी और मुर्गो के पीछे भागती हैं। इन खेलों में ग्रामीणों के बीच मान्यता है कि इससे गांव मे खुशहाली होती है। बताया जाता है, इस खेल की परंपरा 250 साल पहले शुरू की गई थी। होली के दो या तीन दिन बाद इसका आयोजन होता है।

महिलाओं और पुरुषों की बनती हैं टीमें   
इस खेल में हारने वाले को पूरे गांव के लोगों को दावत देनी पड़ती है। इस खेल को महिलाएं और पुरुष अलग-अलग टीम बनाकर खेलती हैं। महिलाएं गांव के तालाबों, नदियों से मछलियां और केकड़े पकड़कर लाती हैं। इसके बाद एक प्लास्टिक और ईटों की मदद से छोटा कुंड बनाकर उसमें पानी भरकर मछली और केकड़े छोड़े जाते हैं। पुरुषों को चुनौती दी जाती है वो इन्हें पकड़ें। इस साल प्रतियोगिता के विजेता अवधेश श्रीवास्तव रहे हैं। 

60 साल की दादी ने पकड़ा मुर्गा
महिलाओं की तरह पुरुष जंगल में जाकर जंगली खरगोश और गिलहरी ढूंढते हैं। मुर्गा पकड़कर लाया जाता है। इसके बाद प्रतियोगिता शुरू होती है। महिलाओं को इन जंगली जीवों को भागकर पकड़ना होता है। ग्रामीण एक घेरा बनाकर रखते हैं। इसके अंदर प्रतिभागी और मुर्गे, गिलहरी या खरगोश होता है। इस बार भी गांव के पुरुषों ने मुर्गा छोड़ा, जिसे 60 साल की बुजुर्ग महिला छिंदकुंवर ने दौड़ लगाकर पकड़ लिया और विजेता बनीं।

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