पहली बार पहाड़ों पर 100 किमी. की रफ्तार से दौड़ेंगी ट्रेन, पांच साल लगेंगे**

Bilaspur News - देश में पहाड़ों पर फिलहाल नैरोगेज या मीटरगेज पर ही ट्रेनें चलाई जा रही हैं। वह भी काफी कम रफ्तार से। लेकिन अब अगले 5...

Feb 16, 2020, 06:41 AM IST

देश में पहाड़ों पर फिलहाल नैरोगेज या मीटरगेज पर ही ट्रेनें चलाई जा रही हैं। वह भी काफी कम रफ्तार से। लेकिन अब अगले 5 वर्षों में पहाड़ों पर भी 100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से ट्रेन दौड़ेगी। पहला ब्रॉडगेज रेलवे ट्रैक है 63 किलोमीटर लंबा पंजाब के भानुपली से हिमाचल के बिलासपुर तक और दूसरा है 125 किमी लंबा उत्तराखंड का ऋषिकेश से कर्णप्रयाग तक। इन दोनों ही ट्रैक पर तेजी से काम शुरू हो चुका है। हिमाचल वाले ट्रैक को 2025 और उत्तराखंड के ट्रैक को 2024 में पूरा करने का लक्ष्य है। दोनाें ट्रैक सामरिक दृष्टि से भी काफी महत्वपूर्ण हैं। इनके बनने से सेना की बॉर्डर तक पहुंच आसान होगी। बिलासुपर-भानुपली रेलवे ट्रैक को भविष्य में लेह तक लेकर जाने का लक्ष्य है, जिसके लिए जियोग्राफिकल सर्वे भी शुरू हो चुका है। वहीं उत्तराखंड के चमोली में चीन-तिब्बत बॉर्डर तक भी सेना की पहुंच आसान होगी। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेलवे ट्रैक को धार्मिक उद्देश्य के साथ भी बनाया जा रहा है। इस ट्रैक के जरिये भविष्य में चार धाम की यात्रा की जा सकेगी। दोनों ही प्रोजेक्टों पर भारतीय रेल विकास निगम काम कर रहा है। दाेनों ट्रैक का काफी लंबा रास्ता सुरंगों से होकर गुजरेगा जो लोगों के लिए किसी एडवेंचर से कम नहीं होगा।

शेष | पेज 14 पर

7 घंटे का सफर दो घंटे में होगा पूरा

कुल लागत

16216.31 करोड़ रु.

ऋषिकेश का नया बन रहा स्टेशन।

2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस रेलवे ट्रैक की घोषणा की। 2015 में इसे भारतीय रेल विकास निगम को सौंपा। तब से लेकर साढ़े पांच किलोमीटर रेलमार्ग और योग नगरी ऋषिकेश नया रेलवे स्टेशन का काम 80 फीसदी पूरा हो चुका है। इसका मार्च 2020 तक लोकार्पण का लक्ष्य लेकर दिनरात तेजी से काम किया जा रहा है। प्रोजेक्ट के मैनेजर हिमांशु बडौनी ने बताया कि इस रेलमार्ग केे बनने से ऋषिकेश से कर्ण प्रयाग का 7 घंटे का सफर सिमटकर 2 घंटे का रह जाएगा। साथ ही यह सफर सुरक्षित भी होगा क्योंकि ज्यादातर ट्रैक सुरंग से होकर गुजरेगा।

125 किमी लंबी ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेललाइन

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