खपत से 12 लाख क्विंटल अधिक उत्पादन, एपीएल राशनकार्ड में खपेगा चावल

Bilaspur News - राज्य सरकार ने एपीएल राशनकार्ड बनाकर 10 रुपए किलो में चावल देने का निर्णय लिया है। ऐसा इसलिए किया जा रहा है क्योंकि...

Bhaskar News Network

Jun 15, 2019, 06:30 AM IST
Bilaspur News - chhattisgarh news 12 lakh quintals more production than consumption rice consumed in apl ration card
राज्य सरकार ने एपीएल राशनकार्ड बनाकर 10 रुपए किलो में चावल देने का निर्णय लिया है। ऐसा इसलिए किया जा रहा है क्योंकि चावल का उत्पादन पीडीएस की जरूरत से कहीं ज्यादा हो रहा है। अकेले बिलासपुर की बात करें तो यहां राशन दुकानों से देने के लिए 15 लाख 32 हजार क्विंटल चावल चाहिए लेकिन उत्पादन हुआ 27 लाख 29 हजार क्विंटल चावल का। यानी करीब 12 लाख क्विंटल चावल बच जा रहा है। राज्य सरकार ने प्रदेश के सभी व्यक्तियों को फूड फॉर आल स्कीम के तहत राशन कार्ड के दायरे में लाने का निर्णय लेते हुए सात लाख नए परिवारों के एपीएल राशनकार्ड बनाने का निर्णय लिया है। जाहिर है बिलासपुर जिले में भी हजारों की संख्या में कार्ड बनेंगे। सामान्य श्रेणी के कार्डों को दो समूहों में विभक्त करते हुए सामान्य श्रेणी (आयकरदाता) व सामान्य श्रेणी (गैर आयकरदाता) का राशन कार्ड पात्रता अनुसार जारी किया जाएगा। सामान्य श्रेणी के लिए चावल 10 रुपए प्रति किलो निर्धारित किया गया हैं। नया कार्ड बनने तक पुराने कार्ड से राशन मिलता रहेगा। यदि किसी परिवार में 5 से अधिक सदस्य हैं तो उन्हें प्रति सदस्य 7-7 किलो चावल अतिरिक्त दिया जाएगा। वर्तमान में राज्य में 58 लाख परिवारों के राशन कार्ड हैं। सात लाख नए परिवारों के भी राशन कार्ड बनाए जाने से कार्डों की संख्या 65 लाख हो जाएगी। बिलासपुर जिले में 490384 राशनकार्ड हैं। इतने प्रदेश के किसी भी जिले में नहीं हैं। वर्तमान में पांच तरह के कार्ड बनाए गए हैं। इसमें अंत्योदय गुलाबी के तहत प्रति कार्ड 35 किलो चावल, अंत्योदय गुलाबी एकल में हर माह निशुल्क 10 किलो, स्पेशल गुलाबी में 35 किलो चावल दिया जा रहा है। प्राथमिकता नीला कार्ड में दो रुपए किलो में प्रति वाह प्रति व्यक्ति सात किलो के हिसाब से तो निशक्तजन हरा कार्ड में प्रति माह दस किलो चावल दिया जा रहा है। इसके अलावा कल्याणकारी संस्थाओं, मध्याह्न भोजन, पूरक पोषण आहार, छात्रावास और महतारी जतन के लिए भी हर माह चावल दिया जा रहा है। इस तरह जिले में हर माह औसत 1 लाख 27 हजार क्विंटल से ज्यादा चावल का दिया जा रहा है। यानी सालभर में 15 लाख 32 हजार क्विंटल से ज्यादा दिया जा रहा है। वहीं जिले में चावल का उत्पादन ज्यादा हुआ है। इस बार जिले में 40 लाख 14 हजार क्विंटल धान खरीदी हुई। धान से 68 फीसदी चावल बनता है। यानी 40 लाख 14 हजार क्विंटल धान से 27 लाख 29 हजार 520 क्विंटल चावल उत्पादन हुआ। जबकि जरूरत 15 लाख 32 हजार क्विंटल की है। इस तरह 11 लाख 97 हजार 324 क्विंटल चावल बच रहा है। इसी चावल को खपाने के लिए एपीएल राशनकार्ड बनाने की तैयारी है। प्रभारी खाद्य नियंत्रक दिनेश्वर प्रसाद के मुताबिक अब तक एपीएल कार्ड कैसे बनाए जाएंगे, इसे लेकर आदेश नहीं आया है। हालांकि कार्ड आवेदन करने पर ही बनाया जाता रहा है।

बंद होने से पहले जिले में थे 26 हजार 515 एपीएल कार्ड

खाद्य सुरक्षा अधिनियम लागू होने के समय जिले के 26 हजार 515 एपीएल राशन कार्डधारकों को हर माह 10-10 किलो चावल दिया जाता था। लेकिन अधिनियम बनने और नए तरह के कार्ड बनने के बाद न केवल चावल बल्कि मिट्टीतेल की आपूर्ति पर भी रोक लगा दी गई थी। हालांकि यह बात भी सही है कि बड़ी संख्या में लोगों ने राशनकार्ड बनवा रखे थे लेकिन लोग चावल लेने के लिए शासकीय उचित मूल्य दुकान नहीं जाते थे। इसके चक्कर में घोटाला होने लगा था। यानी दुकानदार उनका राशन दबा देते थे।

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