18 हजार किसानों के फर्जी होने का शक, हर खरीदी की जांच, टोकन का सत्यापन कराएंगे

Bilaspur News - जिले में 92 हजार रजिस्टर्ड किसान हैं। 64 हजार किसानों ने धान बेच लिया है। 18 हजार बचे हैं। धान खरीदी भी अंतिम चरण में चल...

Bhaskar News Network

Jan 14, 2019, 03:16 AM IST
Bilaspur News - chhattisgarh news 18 thousand farmers will be suspected to be fake verify every purchase verify token
जिले में 92 हजार रजिस्टर्ड किसान हैं। 64 हजार किसानों ने धान बेच लिया है। 18 हजार बचे हैं। धान खरीदी भी अंतिम चरण में चल रहा है। जिला प्रशासन के अधिकारियों को इस बात की आशंका है कि अब होने वाली धान खरीदी ज्यादातर नकली किसान ही करेंगे। इसके कारण ही उन्होंने अब होने वाली हर खरीदी की जांच के निर्देश दिए हैं। जिस भी सोसाइटी में धान बेचने के लिए टोकन नंबर लेंगे। पहले इसका भौतिक सत्यापन होगा। फिर खरीदी पूरी होगी।

दैनिक भास्कर ने आने वाले किसानों को असुविधा ना इसे देखते हुए अफसरांें से सवाल किए। पूछा कि जब 64 हजार किसान धान बेच रहे थे, तब ये व्यवस्था क्यों नहीं बनाई गई। तब अधिकारियों ने जवाब दिए कि किसी भी क्षेत्र का किसान खेती के बाद धान बेचने के लिए बैचेन रहता है। ऐसा इसलिए क्योंकि पहले तो सरकारी समर्थन मूल्य का 2500 रुपए मिलना और दूसरा घरों की जरूरत। इसलिए वह जरूरत का धान छोड़कर बाकी साेसाइटी ले आता है। चूंकि धान खरीदी अब अंतिम चरण में है। दावे क मुताबिक असली किसानों का धान बिक चुका है। और अब होने वाली खरीदी में ज्यादातर नकली लोग शामिल रहेंगे। इसके कारण ही उन्होंने ऐसी व्यवस्था तैयार करवाई है। दूसरी बात यह है कि उन्होंने इसके लिए पिछले दो साल का डेटा भी निकलवाया है। इसमें यह बात स्पष्ट है कि खरीदी के आखिरी दौर में ही फर्जी किसान पकड़े गए हैं। इन्हीं चीजों को ध्यान में रखकर उन्होंने ये व्यवस्था बनाई है। उनका कहना है कि इसके लिए कुछ सोसाइटी में संदेह के दायरे में है।

कृषि अधिकारी, तहसीलदार और पटवारियों को जांच का जिम्मा

धान खरीदी केंद्रों पर लाखों क्विटंल धान जमा हो चुका है। मिलर्स इसे उठाने को तैयार नहीं। इसके चलते खरीदी प्रभावित हो रही।

64 हजार किसानों से तीन लाख 19 हजार मैट्रिक टन धान खरीदी पूरी हो चुकी है

जानिए कौन सी सोसाइटी संदेह के दायरे में

बिलासपुर जिले में बिल्हा, मुंगेली क्षेत्र में लालपुर, फास्टपुर, सिवनी और अंचल के मरवाही छोर पर बसी सोसाइटियां अफसरों की नजर में है। यहां पूर्व में भी धान खरीदी की गड़बड़ी पकड़ाई जा चुकी है। इसके अलावा इन केंद्राें ने पिछली बार 10 से 12 हजार क्विंटल धान खरीदी की हैं। अबकी बार अचाकन यहां धान खरीदी में वृद्धि हो चली है। आंकडा़ें के मुताबिक यहां अब तक 25 से 26 हजार क्विंटल धान खरीदी हुई है। इसके कारण ही इन केंद्रों पर उन अफसरों की नजर है, जिन्हें शक है कि यहां फर्जीवाड़ा हो सकता है।

नया निर्देश जारी किया गया है


जब से धान खरीदी, तब से चल रहा इसके नाम पर फर्जीवाड़ा

जब से धान खरीदी में फर्जीवाड़ा तब से हो रहा है, जब से यहां खरीदी की शुरुआत हुई। यहां धान से जुड़े अलग-अलग तरह के कई घोटाले सामने आ चुके हैं। जहां मल्हार में बगैर जमीन वाले किसानों से धान खरीद कर करोड़ों के घोटाले किए जा चुके हैं। कुल मिलाकर धान घोटाले में फर्जीवाड़े का आंकड़ा आठ साल में दस करोड़ जा पहुंचा है। अधिकारी फिर पुरानी गड़बड़ी को अनदेखी पुराने ढर्रे पर चल रहे हैं। ऐसे में इस बात को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है कि फिर से वहीं गफलत दोहराई जा सकती है। इसी को देखकर ही आखिरी चरण में ये नीति तैयार गई है।

18 हजार किसान बचे हैं धान बेचने को।

4 लाख मैट्रिक टन का अनुमान था।

ये गड़बड़ी भी आ रही सामने प्रतिबंध लगाया

कुछ किसान और सोसाइटी के लोग मिलकर पाखड़ धान भी केंद्राें में खपा रहे हैं। इसकी वजह भी ज्यादा समर्थन मूल्य का मिलना ही है। वे सही धान के बारों के बीच बारिश में भींगा धान मिलाकर इसे बेच रहे। इसे राइस मिलर्स या दूसरी एजेंसी खरीदने से इनकार रही है। इसके कारण इसकी ब्रिक्री पर प्रतिबंध लगाकर सारी सोसाइटी को इस बात के निर्देश जारी किए गए हैं वे तत्काल ऐसी गड़बडी रोकें। अफसरों का कहना है इस धान की बिक्री के लिए अलग से व्यवस्था की गई है। उस जगह जरूरतमंद से खपा सकते हैं। पर पैसे ज्यादा मिलने के फेर में किसान इसकी भी अनदेखी कर रहे हैं।

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