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‘बॉयकाट चाइनीज प्रोडक्ट’ कैम्पेन में फंसी पिचकारी!

Bhaskar News Network

Mar 16, 2019, 03:20 AM IST

Bilaspur News - जब-जब चीन ने आतंकवाद पर पाकिस्तान का समर्थन किया, इसका सबसे ज्यादा खामियाजा भारत के मध्यमवर्ग को ही भुगतना पड़ा है।...

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जब-जब चीन ने आतंकवाद पर पाकिस्तान का समर्थन किया, इसका सबसे ज्यादा खामियाजा भारत के मध्यमवर्ग को ही भुगतना पड़ा है। सोशल मीडिया इसका साक्षी है।

लेकिन इस बार दिक्कत यह हो गई कि होली ढंग से आई भी नहीं और चीन ने मसूद को वैश्विक आतंकी घोषित करने के प्रस्ताव में अड़ंगा लगा दिया। हमारी समस्या यह नहीं है कि मसूद इस बार भी बच गया। बचकर जाएगा कहां? उसे तो देर-सबेर हमारी सरकार देख ही लेगी। समस्या इससे कहीं अधिक विकट है। समस्या यह है कि सोशल मीडिया पर ‘बॉयकाट चाइनीज प्रोडक्ट’ या ‘चीनी उत्पादों का बहिष्कार’ जैसे कैम्पेन शुरू हो, उससे पहले ही कैसे भाग-दौड़कर चाइनीज पिचकारी और चाइनीज बलून खरीद लिए जाएं। समस्या बड़ी इसलिए है कि क्योंकि इसमें हमारी नैतिकता आड़े आती है। ठीक है, हमारा पूरा घर चाइनीज चीजों से भरा है। सप्ताहांत में बच्चों को भले ही सोयाबड़ी वाली मंचुरियन खिलाते हैं, पर कहते तो उसे चाइनीज ही ना! समस्या यह नहीं है। समस्या नैतिकता की है। नैतिकता का तकाजा यही है कि अगर एक बार ‘बॉयकाट चाइनीज प्रोडक्ट’ कैम्पेन शुरू हो गया तो फिर बीच कैम्पेन में हम न तो चाइनीज पिचकारी खरीद सकते हैं और न ही चाइनीज बलून। और कैम्पेन खत्म कब हो, इसका क्या भरोसा। पता चले, इस चक्कर में होली ही बीत गई।

हम पहले भी ऐसे ही संकट से गुजर चुके हैं। तो समझदारी का तकाजा यही है कि अगर पहले दूध के जले हो तो छाछ भी फूंक-फूंककर ही पी जाए। दिवाली के समय ‘बॉयकाट चाइनीज प्रोडक्ट’ कैम्पेन में फंस गए थे। चाहकर भी चीनी सीरीज और लाइट्स नहीं खरीद पाए। घटिया सीरीज से ही काम चलानी पड़ी। तो ऐसी रिस्क उठाना ही क्यों? कैम्पेन से पहले ही चाइनीज पिचकारी खरीद ली जाए। फिर शुरू हो जाए तो वेलकम। उसे फुल सपोर्ट!

खैर, इस बीच कैम्पेन शुरू भी हो जाए तो ऐसा कुछ यह कहकर बेनिफिट ऑफ डाउट ले सकते हैं, ‘भैया अब तो मैंने खरीद ली। मैं अब कुछ नहीं जानती... और यह आप लोगों की गलत बात है। ऐसी चीजों के बारे में पहले बताया करो ना…?’ यह ऑफ द रिकॉर्ड आइडिया है इस नैतिकता से बचने का!

 शॉर्ट सटायर  कुमार

नीरव लंदन में दहशत में बैंक

नीरव मोदी के लंदन पहुंचने की खबर है। इससे ब्रिटेन के बैंकों में खलबली मच गई है। ब्रिटेन बैंक एसोसिएशन ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर बैंकों को नीरव से सुरक्षा प्रदान करने की मांग की है।

सूत्रों के अनुसार नीरव मोदी के लंदन पहुंचने के बाद से एक दर्जन बैंकों ने दहशत में आकर खुद को दिवालिया घोषित कर दिया है। एक बैंक के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “हमने सरकार से साफ कह दिया है कि हमारी स्थिति भारतीय बैंकों जितनी मजबूत नहीं है कि कोई करोड़ों रुपए का लोन डकार जाए और हम पर फर्क नहीं पड़े।” एक अन्य बैंक अधिकारी ने कहा, हमने किसी तरह विजय माल्या से तो अपनी इज्जत बचा ली, लेकिन अब ये माल्या पार्ट-2 आ गया है। यही चिंता खाए जा रही हैं कि इससे कैसे बचेंगे।



 हास्य बत्तीसी  इस्माइल लहरी

 न्यूजी फ्यूजी  अमित तिवारी


- पोस्टर के लिए चंदा तो कहीं और से आएगा। यह तो बस गोंद के लिए है।


- कहने में क्या है, वैसे तो मोदीजी पोस्ट ग्रेजुएट भी हैं।


- ये उस टाइप के लोग हैं, जो दस्त की शिकायत होने पर दर्जी के पास चले जाते हैं।

 ये सवाल नॉनसेंस है 

क्योंकि प|ी सारे चढ़ते रंग उतार ही देती है…

हम हर हफ्ते अपने पाठकों से एक नॉनसेंस सवाल पूछते हैं। पिछली बार पूछा था- इंसान पर कौन-सा रंग नहीं चढ़ता? पेश हैं कुछ चुनिंदा जवाब :











इस हफ्ते का नॉनसेंस सवाल :

अगर आंगन टेढ़ा नहीं होता तो लोग किस तरह से डांस करते?

इस नॉनसेंस सवाल का क्या आपके पास कुछ नॉनसेंस-सा जवाब है? अगर है तो हमसे शेयर कीजिए... मेल करें : Humour@dbcorp.in

 सेंसिबल मीम  सौरभ मिश्रा

यार, घर में ही हार गए। ऑस्ट्रेलिया टीम क्या कहेगी?

 इंटरव्यू जरा हटके  गिरगिट से खास बातचीत

‘रंग बदलने वाले नेताओं के साथ तुलना अपमानजनक’

चुनावों की घोषणा के साथ ही कई नेताओं के पाला बदलने की खबरें आ रही हैं। यह खबर भी आ रही है कि सपा और बसपा अगला चुनाव एक ही रंग के झंडे 'लाल प्लस नीले' के बैनर तले चुनाव लड़ेगी। इस बीच माहौल पर होली का रंग भी चढ़ने लगा है तो हमें लगा कि इस बार इंटरव्यू के लिए गिरगिट से अच्छा और कोई नहीं हो सकता। तो हमने उन्हें ही ढूंढ निकाला।


गिरगिट : ऐसा तो नहीं है। मैंने तो आज तक सभी नेताओं को सफेद झक्क कपड़ों में ही देखा है। हां, कोई-कोई भगवा दुपट्‌टा ओड़ लेता है तो कोई नेहरू टोपी या लाल टोपी लगा लेता है।


गिरगिट: चलिए, चरित्र भी देख लीजिए। हर चरित्र पर काले धब्बे ही तो हैं। कहां रंग बदला? जैसे धब्बे पहले थे, वैसे धब्बे आज हैं। एकदम काले-काले।


गिरगिट : रिपोर्टरजी, यह तो आप हमारे साथ ज्यादती कर रहे हैं।



गिरगिट (दुखी स्वर में) : हां, हम कहने वालों का मुंह तो बंद नहीं कर सकते। पर, सच बताए तो जब हम यह सुनते हैं तो हमारे आत्मसम्मान को गहरा धक्का पहुंचता है।... और हां, आपने भी हमें और अपने नेताओं को एक साथ रखकर हमारा दिल दुखा दिया है। इसलिए आप तो फूट ही लीजिए।

ये चीन भी जल रहा है। मुझे ग्लोबल टेरोरिस्ट बनने ही नहीं दे रहा। न जाने कब होगा मेरा प्रमोशन!

 ह्यूमर ट्यूमर  सौरभ जैन


- वो तो शुक्र मनाइए… यदि और देरी की होती तो न्यूज चैनल वाले अपने दम पर ही चुनाव करवाकर नई सरकार बनवा देते।


-अगले चरण में नागिन डांस की ट्रेनिंग भी दी जा सकती है। तो तैयार रहिए!


-ससुराल में जमाई की इतनी खातिरदारी नहीं होती जितनी चीन मसूद अजहर की कर रहा है।


-उम्मीद है कम से कम फिल्म में तो घोटाला हल होता नजर आएगा।


-रेलवे की परीक्षा से पहले परीक्षा जांचकर्ताओं की भर्ती परीक्षा भी होनी चाहिए थी।


-इस फिल्म को थिएटर में करन जौहर तो घरों में सीबीएसई बोर्ड वाले रिलीज़ करेंगे।


- अरसे बाद परिवार के साथ डिनर करते हुए लोगों ने जुकरबर्ग को जी भरके कोसा।

बिलासपुर, शनिवार, 16 मार्च, 2019 | 8

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