पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

446 थानों को जनवरी में मिली थीं 347 शिकायतें सिर्फ 9 में एफआईआर, मामला एक भी नहीं सुलझाया

एक वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक

प्रदेश के सभी थाने सीसीटीएनएस से कनेक्टेड होने के बावजूद शिकायतों का निराकरण नहीं जिम्मेदार नहीं कर रहे हैं। आंकड़े बताते हैं कि जनवरी माह में 446 शिकायतें ऑनलाइन दर्ज की गईं, जिसमें से माह के दौरान एक भी शिकायत का निराकरण नहीं किया गया है।

डीबी स्टार को जानकारी मिली कि थानों में ऑनलाइन शिकायतों का निराकरण नहीं किया जा रहा है। टीम ने इसकी पड़ताल के लिए एनसीआरबी (नेशनल क्राइम रिकाॅर्ड ब्यूरो) द्वारा जनवरी माह की रिपोर्ट खंगाली तो हकीकत सामने आई। रिपोर्ट में दिए गए आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश के सभी 446 थाने सीसीटीएनएस से कनेक्टेड हैं। वहीं, सभी थानों में माहभर में कुल 347 शिकायतें दर्ज कराई गई हैं, जिनमें से माह के दौरान एक भी शिकायत का निराकरण नहीं किया गया है, जबकि सिर्फ 9 मामलों में ही एफआईआर दर्ज की गई है। वहीं, माह के अंत में शिकायतों के निराकरण का आंकड़ा खानापूर्ति के लिए 214 दर्शाया गया है। जबकि इस मामले में देश के अन्य बड़े और छोटे राज्यों का प्रदर्शन हमसे बेहतर है।

74 फीसदी से ज्यादा फंड किया खर्च फिर भी बेहतर नतीजे नहीं

सीसीटीएनएस की शुरूआत के बाद से अब तक प्रदेश के सभी थानों को सीसीटीएनएस से जोड़ा जा चुका है। वहीं, प्रदेश के लिए 5202.53 लाख रुपए प्रदेश के खाते में जारी किए गए। इसमें से अब तक 74 फीसदी से ज्यादा राशि खर्च किए जा चुके हैं। जबकि राज्य के खाते में एक भी राशि शेष नहीं है।

जनवरी में शिकायतों और निराकरण की
ये है पूरी कहानी


446

शिकायत

0

निराकरण माह के दौरान

214

निराकरण माह के अंत में

9

एफआईआर

सिर्फ प्राइवेट एजेंसी के भरोसे चल रहा काम, ये दिक्कत


थानों की कनेक्टिवटी के लिए प्रदेश में सभी थानों में प्राइवेट एजेंसी ही कनेक्टिविटी के लिए अनुबंधित है। जबकि बीएसएनएल की सेवाएं इसके लिए नहीं ली जा रही हैं। जबकि अन्य राज्यों से तुलना करने पर ज्यादातर जगहों में बीएसएनएल के इंटरनेट के जरिए काम किया जा रहा है।

योजना का उद्देश्य यह, समस्याएं बनीं

सीसीटीएनएस भारत सरकार का महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट है। इसमें देशभर के थानों और अफसरों को कंप्यूटर नेवटर्क से जोड़ा जाना है। इस योजना को 2009 में कैबिनेट से मंजूरी मिली थी, जिसमें 2 हजार करोड़ रुपए का बजट है। पुलिस के आला-अफसरों को इससे लाभ होगा। उन्हें एक क्लिक पर सभी थानों की जानकारी व गतिविधियां मिलेंगी। इससे वे आसानी से समीक्षा करेंगे तो रिपोर्ट तैयार होगी। अच्छी बात यह कि फाइल और कागजों में उलझे अधिकारी हाईटेक अंदाज में काम करेंगे। थानों में पसरी अव्यवस्था दुरुस्त होगी। क्राइम मीटिंग के अपराध की रोकथाम और पेंडिग मामलों को सुलझाने के लिए थानेदार बहाना नहीं कर सकेंगे। काम-काम में अधिकता आएगी।

मामले सुलझाने में छत्तीसगढ़ पीछे, कई राज्य आगे निकल गए, देखिए आंकड़े


राज्य पंजीकृत कुल एफआईआर

शिकायतें निराकरण

आंध्र प्रदेश 2760 2353 556

अरुणाचल प्रदेश 0 0 0

असम 315 29 0

बिहार 0 0 0

चंडीगढ़ 233 233 0

छत्तीसगढ़ 342 214 09

दिल्ली 682822 676800 673564

गुजरात 3156 3156 02

हरियाणा 190476 181708 1993

हिमाचल प्रदेश 1807 1000 17

जम्मू काश्मीर 0 0 0

झारखंड 828 652 2

कर्नाटक 44088 44088 15

केरल 2140 1294 0

मध्यप्रदेश 7010 2981 20

महाराष्ट्र 25305 19827 0

मणिपुर 1 0 0

मेघालय 0 0 0

मिजोरम 0 0 0

नागालैंड 0 0 0

वेस्ट बंगाल 12603 12603 05

उत्तराखंड 5 0 0

उत्तरप्रदेश 29676 20435 94

त्रिपुरा 0 0 0

तेलंगाना 2700 2700 166

तमिलनाडु 506198 414446 4370

सिक्किम 0 0 0

राजस्थान 79916 58411 0

पंजाब 6094 153 0

पांडीचेरी 6 5 0

ओडिशा 27829 15045 819

प्रदेश के सभी थाने सीसीटीएनएस से कनेक्टेड होने के बावजूद राहत नहीं दे रहे

कंप्यूटर के एक्सपर्ट नहीं थे, देरी हुई

शहर के थानों को एक-दूसरे से जोड़ने की बहुप्रतिक्षित योजना क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्किंग सिस्टम (सीसीटीएनएस) प्रोजेक्ट गडबड़ियों की वजह से फेल होती दिख रही है। इसका काम करने वाली कंपनी और आईआईटी के मेंबरों ने ठेका रद्द कर दिया था, जिसके कारण यह हालात बने रहे। विभागीय अधिकारियों ने दोबारा टेंडर के बाद नया काम शुरू कराया। इसके कारण पब्लिक को दिक्कत होती रही। छत्तीसगढ़ और जिलों में कंप्यूटर के एक्सपर्ट नहीं होने के कारण योजना शुरू होने में लेट-लतीफी हो रही है। योजना में अपराधियों का क्रिमिनल रिकॉर्ड, एफआईआर, चालान, शिकायतें, आगजनी के मामले और वे सभी बातें दर्ज होंगी, जो जनता से जुड़ी हुई हंै। इससे लोगों को राहत मिलेगी।

यहां पहली एफआईआर कोनी थाने में

जिले के कुछ थाने आॅनलाइन हो चुके हैं। कोनी आॅनलाइन एफआईआर दर्ज करने वाला पहना थाना बना है। यहां एक किशोरी की अपहरण की पहली आॅनलाइन रिपोर्ट लिखी गई थी। अंग्रेजों के जमाने की पुलिस व्यवस्था में बदलाव का दौर शुरू हो रहा है। इसकी शुरुआत आॅनलाइन एफआईआर से हुई। कोनी थाने में पहली एफआईआर दर्ज की गई। इसके बाद अन्य थानों को भी अाॅनलाइन करने का काम पूरा कर लिया गया है। सिविल लाइन थाने का सिस्टम तैयार है। तारबाहर, सिटी कोतवाली व सरकंडा में टेस्टिंग चल रही थी। तोरवा में टेक्निकल फाॅल्ट का मामला सामने आया। अभी कहां कितनी एफआईआर लिखी जा रही है। इसका डेटा पुलिस के द्वारा उपलब्ध नहीं करवाया गया है।

कई मामलों में नहीं हो पाता वेरीफिकेशन

- आरके विज, एडीजी, पीएचक्यू
खबरें और भी हैं...