10 साल से पढ़ा रहीं 5 शिक्षिकाओं को बिना कारण बताए स्कूल से निकाला

Bilaspur News - सुभदा सेवा संस्था की ओर से संचालित बीपीडी मध्यनगरी के उच्चतर माध्यमिक शाला में कार्यरत 5 शिक्षिकाओं को 1 जुलाई से...

Bhaskar News Network

Jul 14, 2019, 06:30 AM IST
Bilaspur News - chhattisgarh news 5 teachers studying for 10 years without leaving the school without reason
सुभदा सेवा संस्था की ओर से संचालित बीपीडी मध्यनगरी के उच्चतर माध्यमिक शाला में कार्यरत 5 शिक्षिकाओं को 1 जुलाई से कार्यमुक्त कर दिया गया। इनमें से चार सामान्य वर्ग से हैं और एक एससी वर्ग से है।

यह सभी इसी स्कूल में पिछले दस वर्ष से पढ़ाते आ रहीं थी और प्रशिक्षित हैं। इनको बगैर नोटिस दिए निकाला गया और कारण भी नहीं बताया। शिक्षिकाओं ने सहायक श्रम उपायुक्त बिलासपुर को शिकायत पत्र दिया है। इसमें बताया है कि पालकों या संस्था की ओर से इनके विरुद्ध कभी शिकायत नहीं रही है। यह भी बताया कि उन्हें हटाकर 12 वीं पास अनुभवहीन युवकों को नाममात्र के मानदेय में भर्ती किया जा रहा है। शिक्षिकाओं ने यह भी बताया कि प्राचार्य के साथ ही कई शिक्षक-शिक्षिकाएं अप्रशिक्षित हैं, जो शासन के नियमों को पूरा नहीं करते। यहां शिक्षकों को वर्ष में मात्र 10 माह का ही मानदेय देते है। मई और जून का मानदेय नहीं दिया जाता। इसीलिए शाला शासन के निर्देशानुसार 16 जून के बजाय 1 जुलाई से खुला है।

श्रम आयुक्त से की शिकायत, कहा- 12वीं पास को रख लिया

शाला में 6 सौ विद्यार्थी करते हैं पढ़ाई

शाला में करीब 600 छात्र-छात्राएं पढ़ते हैं। ऐसे में अप्रशिक्षित व अनुभवहीन शिक्षकों को भर्ती करके शिक्षकों के भविष्य के साथ प्रबंधन खिलवाड़ कर रहा है। शिक्षिकाओं ने मामले में उच्चस्तरीय जांच कर न्याय दिलाने की मांग की है। शिकायत करने वालो में लिलि मिश्रा, सीमा तिवारी एवं दुर्गेश्वरी पाण्डेय शामिल हैं।

संस्था के पांच सौ रुपए से अधिक घर पर रखना है अपराध

संस्था का नकद रकम 500 से ज्यादा रखना आर्थिक अपराध की श्रेणी में आता है। उन्होंने यह भी बताया की कार्रवाई पंजी में एके नापित व केके नापित दोनों भाई अपने हिसाब से प्रस्ताव घर में लिखकर सदस्यों एवं पदाधिकारियों से उनके घरों में जाकर हस्ताक्षर करा लेते हैं।

बैठक में शिक्षकों को निकालने की चर्चा

शाला के पूर्व प्राचार्य बीपी तिवारी जो संस्था में सदस्य हैं। उन्होंने बताया की मई की मीटिंग में प्राथमिक शाला के शिक्षक-शिक्षिकाओं को निकालने के लिए चर्चा हुई थी। उसी बैठक में यह भी पता चला की संस्था के सचिव एके नापित के बेटे केके नापित जो मध्यनगरी में शिक्षक हैं अपने पास संस्था का नकद 1 लाख 89 हजार रुपए घर में रखे हैं। ऐसा आडिट रिपोर्ट से पता चला था।

शिकायती पत्र में लिखा- प्राचार्य ने झांसे में लेकर लिया त्याग पत्र

शिकायती पत्र में यह भी बताया गया है कि पिछले मार्च में स्टाफ के सभी शिक्षकों का त्याग पत्र प्राचार्य के सहयोग से संस्था ने छलपूर्वक ले लिया था। यह कहकर की ऐसा हमेशा होते रहा है। इसमें पिछले कागजात को दिखाकर भरोसे में लिया गया। सभी से कहा गया कि 1 जुलाई से फिर बुलाया जाएगा।

स्टाफ की मदद से मिली थी पौने दो एकड़ जमीन

शिक्षिकाओं ने यह भी शिकायत की है कि शाला में 80 प्रतिशत शासन के नियमों का पालन नहीं होता। वहीं स्टाफ के सभी 25 कर्मचारियों के सहयोग से शाला को पौने दो एकड़ जमीन भवन बनाने के लिए दान में मिली है। इसके चलते अब करीब 50 लाख रुपए से का नया शाला भवन लगभग पूर्णतः की ओर है तो प्रबंधन ने मनमानी शुरू कर दी है।

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