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छापे के 9 साल बाद एसीबी ने पूछा- अफसर के पिता की 18 जमीनों से कितनी आय, बताइए?

Bilaspur News - एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) के अधिकारी इरिशेगशन में पदस्थ रहे एक बड़े अधिकारी की आय से अधिक संपत्ति की जांच पिछले नौ...

Feb 15, 2020, 06:51 AM IST
Bilaspur News - chhattisgarh news 9 years after the raid the acb asked tell me how much income of the officer39s father from 18 lands

एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) के अधिकारी इरिशेगशन में पदस्थ रहे एक बड़े अधिकारी की आय से अधिक संपत्ति की जांच पिछले नौ साल से कर रह हैं। सुनकर थोड़ी हैरानी होगी। पर यह सच है। और आश्चर्य की बात यह कि अभी तक यह पूरी नहीं हो पाई है। रायपुर से बिलासपुर के तहसीलदार को इसके संदर्भ में एसबी के अधिकारियों पत्राचार किया है। पूछा गया है कि आरोपी अफसर के पिता के नाम पर ढेका में कोई 18 जमीनें राजस्व अभिलेखों में दर्ज हैं। एसीबी जानना चाह रही है कि इससे वार्षिक आय कितनी प्राप्त हो रही है। उन्होंने इसका ही आंकलन कर मामले में जानकारी भेजने की बात लिखी है। अभी अफसरों ने इसका जवाब नहीं भेजा है।

8 जनवरी 2020 को चली चिट्‌ठी में एंटी करप्शन ब्यूरो के निरीक्षक नवनीत पटेल ने जल संसाधन विभाग के अवर सचिव मणिन्द्र धर दीवान का नाम लिखा है। उन्होंने यह बताते हुए कि यह जांच के द्वारा की जा रही है। पूछा है- अवर सचिव मणिन्द्र धर दीवान के पिता ओंकार धर दीवान के नाम पर पटवारी हल्का नंबर 24 बिलासपुर में अलग-अलग खसरा नंबर की 18 जमीनों की जानकारी मिली है। उन्होंने सारे खसरा नंबर को पत्र में अंकित करते हुए लिखा है कि उन्हें राजस्व अभिलेखो(गिरदावरी/ अनवारी) के अनुसार उपरोक्त भूमि पर छापा दिनांक 22 जनवरी 2011 तक प्रति वर्ष प्राप्त कृषि उपज का आंकलन अलग-अलग किया जाकर इसकी जानकार भेजी जाए। उन्होंने जानकारी भेजने वाले अधिकारी का मोबाइल नंबर और नाम भी उल्लेख करने की बात लिखी है। राजस्व विभाग ने मामले में पत्र को आगे बढ़ाकर पटवारी से इसके संबंध में पूछताछ शुरू कर दी है। अभी राजस्व विभाग ने एंटी करप्शन ब्यूरो के अधिकारियों को कोई जवाब नहीं भेजा है।

जांच धीमी होने से अटक रहे प्रकरण

भ्रष्टाचार रोकने और भ्रष्ट अधिकारियों पर कार्रवाई करने के लिए राज्य सरकार ने भले ही एसीबी व ईओडब्ल्यू को छूट दे रखी हो, बावजूद भ्रष्ट अधिकारी व कर्मचारी बेनामी कमाई से तौबा नहीं कर रहे हैं। आर्थिक अपराधों की जांच एजेंसियां ईओडब्ल्यू और एंटी करप्शन ब्यूरो लगातार छापे की कार्रवाई को अंतिम अंजाम तक पहुंचाने में भी नाकाम साबित हो रही हैं। दरअसल भ्रष्ट अफसरों और कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की फाइलें सालों से शासन के पास मंजूरी के लिए अटकी हैं। इसके चलते ही अफसरों के काम करने की शैली पर भी सवाल उठने लगे हैं।

काम का भार होने के चलते जांच अटकी

{इरिगेशन डिपार्टमेंट में पूर्व अवर सचिव एमडी दीवान की जमीनों से होने वाले आय की जानकारी नौ साल बाद मांगी जा रही है, ऐसा क्यों?

- िनरीक्षकों पर काम का भार अधिक होता है। इसके चलते थोड़ी काम धीमा होता है।

{क्या इस मामले में कोर्ट में चालान पेश नहीं किया जा सका है?

- नहीं... इसलिए ही इसके संदर्भ में जानकारी जुटाई जा रही है।

{और कितने अफसरों के मामले खुले रहे हैं?

- अभी तो इसी मामलो को प्राथमिकता में रखा गया है।

ढेका में इन 18 जगह पर जमीन खसरा नंबर भेजा, जानकारी मांगी

बिलासपुर जिले के ढेका गांव में इरिगेशन के अधिकारी मणिन्द्र धर दीवान के पिता ओंकार दीवान के नाम पर जिन जमीनों का उल्लेख किया है। उनका खसरा नंबर 265/6, 265/3, 256/9, 261, 263, 265/4, 265/5, 264/2, 265/1, 265/2, 266/1, 258/1, 258/2, 258/3, 258/4, 259, 260, 264/1 की जानकारी मांगी गई है। इसके अलावा भी आरोपी अधिकारी की कई जगह जमीन और आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज किया गया है। इसके चलते ही यह जांच जारी है।


रायपुर से बिलासपुर तहसीलदार को आया पत्र, ढेका में जमीनों का खसरा नंबर लिखकर दी गई सूचना

एसीबी ने तहसीलदार को लिखा पत्र।

मनीष शर्मा, एसपी, एसीबी रायपुर**

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