अब्दुल रिजवान | देश की आजादी के लिए अंग्रेजों भारत

Bilaspur News - अब्दुल रिजवान | देश की आजादी के लिए अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन का बिगुल 1942 में फूंका गया। बिलासपुर में डाॅ....

Bhaskar News Network

Aug 15, 2019, 09:25 AM IST
Bilaspur News - chhattisgarh news abdul rizwan british india for the independence of the country
अब्दुल रिजवान | देश की आजादी के लिए अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन का बिगुल 1942 में फूंका गया। बिलासपुर में डाॅ. रामदुलारे मिश्र, कुंजबिहारी अग्निहोत्री, मुरलीधर मिश्र, मथुरा प्रसाद दुबे जैसे वरिष्ठ कांग्रेसियों और सैकड़ों कांग्रेसियों की भीड़ में युवा तुर्क चित्रकांत जायसवाल भी थे। पढ़ाई के दौरान जब आंदोलन शुरू हुआ तब वे इस आंदोलन में कूद गए। बिलासपुर के आंदोलन का नेतृत्व इसी नौजवान को सौंप दिया गया। आंदोलन की बागडोर थामने के साथ ही युवा चित्रकांत ने संकल्प लिया कि जब तक भारत देश आजाद नहीं होगा वे अपने बाल नहीं कटवाएंगे। आंदोलन शुरू हुआ। युवा नेतृत्व ने ब्रिटिश हुकूमत की जड़ें हिलानी शुरू की। तब चित्रकांत सहित अन्य आंदोलनकारियों को जेल में डाल दिया गया। चूंकि चित्रकांत जायसवाल सबसे ज्यादा उग्र थे, इसलिए उन्हें जेल में कुछ साथियों के साथ अलग रखा गया। उन्हें बैरक में अत्यंत खराब और चुभने वाला कंबल दिया गया। खाने में कंकड़ युक्त भोजन परोसा जाता। उन्हें ढाई साल जेल में रखा गया। जेल से छूटने के बाद आजादी की लड़ाई और तेज हो गई। 15 अगस्त 1947 को जब देश आजाद हुआ तब चित्रकांत जायसवाल के बाल महिलाओं की तरह उनके पीठ तक लंबे हो चुके थे। आजादी का जश्न मनाने उसके बाद वे इलाहाबाद गए और वहीं पर गंगा नदी के तट पर अपने बाल समर्पित कर अपने संकल्प को पूरा किया।

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