रेलवे स्टेशन पर छह साल बाद नहीं बढ़ाए गए कैमरे लगने थे 113, लगे सिर्फ 84, चोरियां लगातार बढ़ रहीं

Bilaspur News - रेलवे स्टेशन में सुरक्षा के लिए लगाए गए 84 सीसी कैमरों के बाद भी चोरी की घटनाएं नहीं रूक रही है। मोबाइल चोरी व अन्य...

Dec 04, 2019, 07:36 AM IST
Bilaspur News - chhattisgarh news after six years there were no cameras installed at the railway station
रेलवे स्टेशन में सुरक्षा के लिए लगाए गए 84 सीसी कैमरों के बाद भी चोरी की घटनाएं नहीं रूक रही है। मोबाइल चोरी व अन्य चोरी की घटनाएं लगातार हो रही है। स्टेशन में लगे कैमरे से हर जगह कवर नहीं होते। यही इसकी वजह है। अफसरों का कहना है कि भविष्य में और भी कैमरे लगाए जाने हैं लेकिन कितने कैमरे और लगेंगे फिलहाल इसका खुलासा वे नहीं कर रहे हैं। केंद्र सरकार ने वर्ष 2013 में निर्भया फंड बनाया था। फंड का उपयोग रेलवे स्टेशन व वेटिंग हाल में सीसी कैमरे के लिए किया गया। वर्तमान में इसके लिए आरपीएफ थाने में कंट्रोल रूम भी बनाया गया है जहां से पूरे स्टेशन पर नजर रखी जाती है। वर्तमान में प्लेटफार्म नंबर एक में नागपुर एंड पर इंजन और उसके बाद जनरल कोच पर कैमरा पूरी तरह कवर नहीं कर पाता। इसी तरह स्टेशन में और भी जगह हैं जहां कैमरे की नजर नहीं जाती है। मोबाइल व अन्य अापराधिक गतिविधियों में लिप्त लोग इस बात को बखूबी जानते हैं और वे इसका फायदा भी उठाते हैं। यही वजह है कि वे वारदात को अंजाम दे देते हैं। वारदातों के शिकार लोग इसकी शिकायत जीआरपी में कराते तो हैं कैमरे से इन वारदातों को नहीं देख पाने की वजह से अपराधी पकड़ में नहीं आ पाते। यात्रियों और उनके लगेज की सुरक्षा में चूक हो रही है। लोकल गिरोह के अलावा दूसरे शहरों से आने वाले चोरों और पॉकेटमारों की पहचान नहीं होने से वे प्लेटफॉर्म पर ट्रेन रूकते ही घटना को अंजाम देने के बाद आसानी से बच निकलते हैं, जबकि पुलिस मामले में एफआईआर होने के बाद सीसी कैमरे का फुटेज खंगालने का प्रयास करती है। नतीजा यह होता है कि जब तक पुलिस विजुअल देखकर आरोपी की पहचान कर पाए, आरोपी उनकी गिरफ्त से बाहर निकल जाते हैं।

ट्रेन और प्लेटफॉर्म पर इन घटनाओं के बाद सबक नहीं ले रहे

ट्रेन में बैग चोरी, मामले का निराकरण नहीं

भाठागांव निवासी पीआर द्विवेदी का अप्रैल 2017 में रेलवे प्लेटफॉर्म से ही किसी ने ट्रेन पकड़ने के दौरान बैग चोरी कर लिया। इसकी रिपोर्ट लिखने की बजाय पुलिस ने जल्द सामान मिलने का दावा करके चलता किया, अब तक मामला पेंडिंग है।

केस-1

जानिए, कौन- कौन सी ट्रेनें चोरों के निशाने पर, लापरवाही से हौसले बढ़ते ही जा रहे हैं

आरपीएफ की तरफ से इन ट्रेनों में गश्ती बढ़ाने के दावे किए जा रहे हैं लेकिन अपराध कम नहीं हो रहे हैं। छह महीने के आंकड़ों में ज्यादा चोरी सारनाथ एक्सप्रेस में 35, समता एक्सप्रेस में 22, छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस में 20, समरसता एक्सप्रेस में 18 और हावड़ा मेल में 12 चोरी के मामले दर्ज हुए हैं। स्टेशन परिसर में लापरवाही सुरक्षा भी दि‌खावे की ट्रेनों के अलावा स्टेशन परिसर भी सुरक्षित नहीं हैं। राजधानी की बात करें तो रात के वक्त स्टेशन और उसके आसपास शरारती तत्वों का जमावड़ा लगा रहता है। लेकिन जीआरपी का कहना है कि शिकायत मिलने पर ही कार्रवाई की जाएगी। रात दस बजे के बाद स्टेशन परिसर के बाहर की कई दुकानें खुली रहती हैं। ऐसे में यहां पर ज्यादा जमघट होता है।

डीबी स्टार | बिलासपुर

रेलवे स्टेशन में सुरक्षा के लिए लगाए गए 84 सीसी कैमरों के बाद भी चोरी की घटनाएं नहीं रूक रही है। मोबाइल चोरी व अन्य चोरी की घटनाएं लगातार हो रही है। स्टेशन में लगे कैमरे से हर जगह कवर नहीं होते। यही इसकी वजह है। अफसरों का कहना है कि भविष्य में और भी कैमरे लगाए जाने हैं लेकिन कितने कैमरे और लगेंगे फिलहाल इसका खुलासा वे नहीं कर रहे हैं। केंद्र सरकार ने वर्ष 2013 में निर्भया फंड बनाया था। फंड का उपयोग रेलवे स्टेशन व वेटिंग हाल में सीसी कैमरे के लिए किया गया। वर्तमान में इसके लिए आरपीएफ थाने में कंट्रोल रूम भी बनाया गया है जहां से पूरे स्टेशन पर नजर रखी जाती है। वर्तमान में प्लेटफार्म नंबर एक में नागपुर एंड पर इंजन और उसके बाद जनरल कोच पर कैमरा पूरी तरह कवर नहीं कर पाता। इसी तरह स्टेशन में और भी जगह हैं जहां कैमरे की नजर नहीं जाती है। मोबाइल व अन्य अापराधिक गतिविधियों में लिप्त लोग इस बात को बखूबी जानते हैं और वे इसका फायदा भी उठाते हैं। यही वजह है कि वे वारदात को अंजाम दे देते हैं। वारदातों के शिकार लोग इसकी शिकायत जीआरपी में कराते तो हैं कैमरे से इन वारदातों को नहीं देख पाने की वजह से अपराधी पकड़ में नहीं आ पाते। यात्रियों और उनके लगेज की सुरक्षा में चूक हो रही है। लोकल गिरोह के अलावा दूसरे शहरों से आने वाले चोरों और पॉकेटमारों की पहचान नहीं होने से वे प्लेटफॉर्म पर ट्रेन रूकते ही घटना को अंजाम देने के बाद आसानी से बच निकलते हैं, जबकि पुलिस मामले में एफआईआर होने के बाद सीसी कैमरे का फुटेज खंगालने का प्रयास करती है। नतीजा यह होता है कि जब तक पुलिस विजुअल देखकर आरोपी की पहचान कर पाए, आरोपी उनकी गिरफ्त से बाहर निकल जाते हैं।

एक ही दिन में छह चोरियां, फिर भी लापरवाही, कह रहे- संवेदनशील जगहों पर जीआरपी की नजर है

एक ही दिन में रेलवे स्टेशन और ट्रेन में 6 चोरियों से आरपीएफ और जीआरपी के अफसरों को सकते में ला दिया। सुबह-सुबह उन्होंने मातहतों की क्लास ले ली। इसके बाद ताबड़तोड़ कार्रवाई करते हुए क्षेत्र के संदिग्धों की धरपकड़ शुरू की गई। इनमें से कुछ लोग हाथ लग गए, कुछ फरार हो गए हैं। बिलासपुर रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर 2 व 5 में महिलाओं के पर्स की चोरी और चुचुहियापारा आउटर में दो यात्रियों के मोबाइल की चोरी, कोरबा व अकलतरा स्टेशन में एक ही दिन में 6 चोरी के मामलों ने आरपीएफ व जीआरपी के अफसरों को चिंतित कर दिया।

केस-2

आरपीएफ हर दिन गश्त कर रही है, प्रावधानों के अनुसार कैमरे बढ़ाएंगे


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