9 माह में एक लाख लीटर मिट्टीतेल का आवंटन घटा
एक समय था जब बिलासपुर में 15 लाख लीटर केरोसीन की खपत थी। लेकिन धीरे-धीरे घटते हुए अब आवंटन 5 लाख 52 हजार लीटर रह गई है। उसमें भी उठाव तो 2 लाख 70 हजार लीटर की ही हो रही है। उठाव कम होने की वजह से सरकार आवंटन कम कर रही है। यानी जिले में केरोसीन का कोटा सरकार घटा रही है।
मई 2019 में 6 लाख 24 हजार लीटर आवंटन था जो फरवरी में 1 लाख 17 हजार लीटर कम हो गई। मिट्टी तेल का सरकारी विक्रय अब घटते जा रहा है।
शासकीय उचित मूल्य दुकानों में राशन कार्डधारियों को नीले रंग का केरोसीन वर्षों से दिया जा रहा है। यह बंद तो नहीं हुआ है लेकिन इसका आवंटन तेजी से घटा है। हालांकि यह भी सही है कि केरोसीन का दुरुपयोग ज्यादा हो रहा है। जितनी संख्या में राशनकार्डधारी केरोसीन का उठाव नहीं कर रहे हैं, उससे अधिक दिखाकर उसे निजी लोगों को बेचने का खेल चल रहा है। इसी तरह की कई शिकायतें शासन को पहुंच रही है। यहीं वजह है कि शासन अब कोटा घटा रही है। हालांकि यह उठाव पर निर्भर करता है। जनवरी 2020 में 4 लाख 20 हजार लीटर केरोसीन का आवंटन आया और उठाव हुआ 2 लाख 10 हजार लीटर का।
वैसे ही फरवरी में 5 लाख 52 हजार लीटर का आवंटन आया और 2 लाख 70 हजार लीटर का ही उठाव हुआ। मार्च में फरवरी जितना ही यानी 5 लाख 52 हजार लीटर का आवंटन आया है और माह के अंत में उठाव का पता चलेगा। पहले की तुलना में केरोसीन लेने में लोगों की रुचि नहीं है। प्रभारी खाद्य
नियंत्रक हिजकिएल मसीह के मुताबिक पहले अधिकांश लोग केरोसीन का उपयोग ईंधन के तौर पर करते थे लेकिन घरेलू गैस का उपयोग बढ़ गया है।
कोटा घटने के तीन कारण
कीमत बढ़ने से घटा उठाव : पहले केरोसीन की कीमत 17 रुपए लीटर थी लेकिन अब इसकी कीमत दोगुनी हो गई है। इसलिए लोग इसे लेने से हिचकते हैं। वैसे भी बहुत कम परिवार है जो इससे खाना पकाते है।
सरप्लस बिजली भी वजह : बिजली भी पहले की तुलना में कम गुल होती है, इसलिए ढिबरी जलाने की भी ज्यादा जरूरत नहीं पड़ती। पहले कई-कई दिन बिजली बंद रहने की वजह से लोग केरोसीन खरीदकर रखते थे।
कालाबाजारी से घटा आवंटन : शासन को केरोसीन की कालाबाजारी को लेकर शिकायत मिली है कि आम आदमी से ज्यादा होटल वाले इसका उपयोग कर रहे हैं। वहीं वाहनों में भी इसके उपयोग की शिकायतें हैं।