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सीवेज पर फिर विधानसभा प्रश्न, साल भर में काम ठप, हाइड्रोलिक टेस्ट पर झूठी रिपोर्ट दी

Bilaspur News - करीब 350 करोड़ रुपए खर्च करने के बावजूद लोगों को अंडर ग्राउंड सीवेज परियोजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। हर बार की...

Feb 15, 2020, 06:31 AM IST

करीब 350 करोड़ रुपए खर्च करने के बावजूद लोगों को अंडर ग्राउंड सीवेज परियोजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। हर बार की तरह राज्य विधानसभा के बजट सत्र के लिए सीवेज पर फिर विधायकों ने सवाल पूछे हैं। बजट सत्र 24 फरवरी से शुरू होगा। बीते सत्र में इस मुद्दे पर ध्यानाकर्षण सूचना दी गई थी। खबर है कि विधानसभा में जवाबदेही की दृष्टि से राज्य शासन जल्दी ही साल भर से ठप पड़े सीवेज प्रोजेक्ट के विषय में कोई बड़ा निर्णय लेने वाली है। इसके लिए नगरीय प्रशासन विभाग के चीफ इंजीनियर यूके धलेंद्र की जांच रिपोर्ट को आधार बनाया जाएगा। फाइल नगरीय प्रशासन मंत्री शिव डहरिया तक पहुंच गई है। पंचायती चुनाव की व्यस्तता के चलते मंत्री के स्तर पर जांच रिपोर्ट पर गौर नहीं किया जा सका है परंतु जल्दी ही इस मामले में कोई बड़ा निर्णय होने की उम्मीद जताई जा रही है। बता दें कि 1 मार्च 2019 में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने निगम कमिश्नर तथा तत्कालीन मेयर को रायपुर तलब कर सीवेज प्रोजेक्ट का काम साल भर में पूरा कर उसका लाभ जनता को दिलाने कहा था। इसी दौरान सचिव नगरीय प्रशासन विभाग ने सीवेज के कार्यों की मानिटरिंग और जांच के लिए जांच कमेटी गठित की। कमेटी को विगत महीने पुनर्गठित किया गया। सिंप्लेक्स ने जोन 1-2 के अंतर्गत ट्रीटमेंट प्लांट का संचालन शुरू करा दिया है, परंतु इससे पहले बिछाई गई पाइप लाइन की हाइड्रोलिक टेस्टिंग नहीं कराई। जांच में यह बात सामने आई कि सिंप्लेक्स ने झूठी रिपोर्ट देकर हाइड्रोलिक टेस्ट की खानापूर्ति कर दी। रिपोर्ट में किसी इंजीनियर के दस्तखत नहीं हैं, इसलिए नगर निगम के सीवेज सेल ने इसे मानने से इनकार कर दिया।

सिंप्लेक्स पर कार्रवाई तय

सिंप्लेक्स के कार्य के तौर तरीके से शहरवासी लगातार परेशान रहे। कंपनी के खिलाफ जिला दंडाधिकारी के न्यायालय में प्रकरण चल रहा है। 10 मार्च 2016 को सिंप्लेक्स के निर्देशक राजीव मुंदड़ा के विरुद्ध दंड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा 133 के अंतर्गत आरोप के संबंध में समंस जारी हो चुका है। 28 जनवरी 2019 को कार्यपालिक दंडाधिकारी ने सिंप्लेक्स के प्रतिवेदन पर सुनवाई की। इससे पहले हाईकोर्ट ने शहर की सड़कों की दुर्दशा को लेकर कार्रवाई के निर्देश दिए थे, परंतु कंपनी पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।

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