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भास्कर खुलासा धान घोटाला

एक वर्ष पहले
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चन्द्र कुमार दुबे | बिलासपुर

एक ही नंबर के जमीन पर दो-दो फर्जीवाड़ा हुआ है। पहला- यह तालाब है और पूरे गांव की इसमें निस्तारी होती है पर इसे खेत बताकर पिछले दो साल से सोसायटी में धान बेचा जा रहा है। दूसरा-इस जमीन के बंटवारे के इकरारनामा में गड़बड़ी हुई है। जिस व्यक्ति को इसमें गवाह बनाया गया है उसकी इकरारनामा के दो दिन पहले ही उसकी मौत हो चुकी थी। सब काम राजस्व विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से हुआ है। मामला सकरी क्षेत्र का है। चाेरभट्‌ठीकला निवासी रामवती पिता सीताराम की 30 साल पहले मौत हो चुकी है। गांव में उसके नाम पर 5 एकड़ 53 डिसमिल का एक तालाब है। इसका खसरा नंबर 2367/32367/ 42367/52371/12371/22373/1 एवं 2373/2 है। यह जमीन महिला से पहले उसके पिता सुनहर के स्वामित्व में रहा। रामवती उनकी एकमात्र बेटी थी। रामवती की शादी पाेड़ी निवासी सीताराम से हुई और शादी के बाद उनके चार बेटे रामाधार,चैतूराम,हरप्रसाद व विद्यानंद तथा दो बेटियां काेदइया बाई और चैतीबाई हुई। महिला के मरने के बाद जमीन के ये 6 वारिस थे। सीताराम व रामवती की मौत के बाद उनके छोड़ी गई जमीन के ये छह वारिस थे और इनमें नाम से राजस्व के दस्तावेज दुरुस्त होना था। दस्तावेज में उनके वारिसों का नाम दर्ज होना था पर इसमें रामवती की बेटी चैतीबाई, नाती मथुरा प्रसाद, नाती जगदीश, बहू रामकुंवर, नाती का बेटा शुभम, नाती की बहू सुनीता ने मिलकर फर्जी स्टाम्प व दस्तावेज पेश कर इसका आपस में बंटवारा कर लिया। बाकी को छोड़ दिया गया। इन्होंने मिलकर फर्जी तरीके से दस्तावेज तैयार करवा लिया और फावती भी उठवा ली। तत्कालीन पटवारी चंद्रशेखर पटेल से उन्होंने जमीन का नामांतरण भी करवा लिया। सबसे गंभीर बात यह है कि जमीन के इकरारनामा में तीन गवाहों में कवल सिंह सिदार उर्फ थुकेल को दूसरे नंबर का गवाह बनाया गया है। इकरारनामा में 1 फरवरी 2017 की तारीख है और कवल सिंह सिदार की 29 जनवरी 2017 को मौत हो चुकी है। जो आदमी दो दिन पहले ही मर चुका है और जिसका सरकार की ओर से मृत्यु प्रमाण पत्र जारी हो चुका है भला वह आदमी कैसे गवाह बन सकता है।

जमीन के नाम पर तालाब, खेती का फर्जीवाड़ा कर सोसायटी में बेचा जा रहा धान, एक और केस में मृत्यु के बाद बनाया गवाह
यह 5.53 एकड़ का तालाब है, खेत नहीं
जिस जमीन में मरे हुए आदमी को गवाह बनाकर इकरारनामा किया गया है उस जमीन को खेती की जमीन बताकर पंचायत कराया गया है। उस जमीन के मार्फत गनियारी के सोसायटी में पिछले दो साल से धान बेचा जा रहा है। इस दौरान 82क्विंटल 40किलो धान बेचा जा चुका है। चैती बाई के नाम से पर्ची बना है।

मृत्यु प्रमाण पत्र, दूसरे चित्र में मौत के दो दिन बाद गवाही में नाम।

शिकायतकर्ता मुझसे आकर मिले, कार्रवाई जरूर होगी
तहसीलदार अभिषेक राठौर का कहना है कि शिकायत मिलने पर वे इस मामले की जांच करेंगे अाैर जाे भी दाेषी मिलेगा उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उनके पास इस फर्जीवाड़ा का डिटेल नहीं है। कहा कि शिकायतकर्ता उनसे जाकर मिले।

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