मोदी सरकार के एनआईए एक्ट के खिलाफ भूपेश सरकार ने खाेला मोर्चा

Bilaspur News - मोदी सरकार के एनआईए एक्ट के खिलाफ भूपेश सरकार ने मोर्चा खोल दिया है। प्रदेश सरकार ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए)...

Jan 16, 2020, 06:46 AM IST
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मोदी सरकार के एनआईए एक्ट के खिलाफ भूपेश सरकार ने मोर्चा खोल दिया है। प्रदेश सरकार ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) एक्ट के खिलाफ बुधवार को सुप्रीम काेर्ट में याचिका दायर की है। याचिका में एनआईए एक्ट काे असंवैधानिक और मनमाना घाेषित करने की मांग की गई है। इसमें कहा गया है कि यह एक्ट राज्य के मामलाें में दखल देता है।

एक्ट के प्रावधान में राज्याें से समन्वय अाैर उनकी सहमति की शर्त नहीं है। यह संविधान के संघीय ढांचे अाैर राज्य की संप्रभुता के खिलाफ है। राज्य सरकार ने संविधान के अनुच्छेद 131 के तहत यह याचिका दायर की है। एनअाईए एक्ट को चुनौती देने वाला छत्तीसगढ़ पहला राज्य है। इससे एक दिन पहले ही केरल सरकार ने अनुच्छेद 131 के तहत सीएए के खिलाफ सुप्रीम काेर्ट में याचिका दायर की है। शेष|पेज 2





2008 में यूपीए सरकार ने पास किया था एनअाईए एक्ट: एनआईए एक्ट काे 2008 में तत्कालीन कांग्रेस नीत यूपीए सरकार ने मुंबई में 26 नवंबर 2008 के अातंकी हमले के बाद बनाया था। इसे अातंकी हमलाें अाैर इस तरह के गंभीर अपराधाें में शामिल दाेषियाें के खिलाफ जल्द कार्रवाई करने के लिए बनाया गया था। तब कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम केंद्रीय गृह मंत्री थे। एनअाईए एक्ट काे देश की संप्रभुता, सुरक्षा और अखंडता, दूसरे देशाें के साथ मैत्रीपूर्ण संबंधों को प्रभावित करने वाले अपराधों की जांच करने और अपराधियाें पर मुकदमा चलाने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर एक जांच एजेंसी का गठन करने के उद्देश्य से बनाया गया था।

इस एक्ट को चुनौती देने वाला छत्तीसगढ़ पहला राज्य बना

पहले भी हुआ टकराव

प्रदेश की सत्ता संभालने के बाद कांग्रेस सरकार पहले सीबीआई को जांच के लिए रोक लगाई और अब एनआईए के अधिकार क्षेत्र पर चुनौती दी गई है। बता दें कि दोबारा मोदी सरकार बनने के बाद केंद्र ने भाजपा विधायक भीमा मंडावी की मौत मामले की जांच बिठाई है और उससे पहले एनआईए को झीरम मामले में धारा 137-1 के तहत तथ्य मिलने पर दोबारा जांच का अधिकार दिया हुआ है। संकेत है कि भीमा मामले में बिलासपुर हाईकोर्ट से निराशा हाथ लगने के बाद प्रदेश सरकार ने यह कदम उठाया है।

छत्तीसगढ़ के अधिकार को छीनने की कोशिश केंद्र को नहीं करनी चाहिए

2008 में केंद्र सरकार ने एनआईए एक्ट बनाया था। हमारा कहना है कि संवैधानिक प्रावधानों के विपरीत एनआईए के प्रावधान दिखाई पड़ते हैं। संविधान की अनुसूची 2 के भाग दो में इस बात का साफ जिक्र है कि पुलिसिंग व्यवस्था राज्य से संबंधित होगी, जबकि एनआईए एक्ट को आधार बनाकर केंद्र, राज्य में चल रहे कई मामलों को जांच में ले लेती है। ऐसे मामलों की जांच किए जाने का फैसला केंद्र सरकार अपनी रुचि से ही कर लेती है। संविधान में लाॅ एंड आर्डर, पुलिसिंग जब राज्य के अधीन है, राज्य पुलिस जांच करने में सक्षम है, बेहतर जांच कर अपराधी को सजा दिलाने की काबिलियत है, ऐसे में राज्य के इस अधिकार को एनआईए एक्ट के जरिए छीनने की कोशिश केंद्र को नहीं करनी चाहिए। हम किसी एक मामले की बात नहीं कर रहे। प्रदेश में 59 मामले चल रहे हैं, जिसमें कानून की समान धाराएं लगी हैं। लेकिन केंद्र सरकार की दखल पर एनआईए यदि इनमें से किसी एक मामले को जांच के दायरे में ले, यह नहीं होना चाहिए। यह संविधान के खिलाफ है। उम्मीद है कि जल्द ही इस मामले की सुनवाई होगी। -जैसा िक महाधिवक्ता सतीश चंद्र वर्मा ने भास्कर को बताया

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