सड़क सुरक्षा सप्ताह सोच बदलिए

Bilaspur News - शहर में ट्रैफिक जागरूकता के लिए कुछ लोग अच्छा काम कर रहे हैं। हादसों में लोगों की जान बचे इसके लिए हरदम सोचते हैं।...

Jan 16, 2020, 06:41 AM IST
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शहर में ट्रैफिक जागरूकता के लिए कुछ लोग अच्छा काम कर रहे हैं। हादसों में लोगों की जान बचे इसके लिए हरदम सोचते हैं। वाहन चालकों छात्राओं की सुरक्षित यात्रा के लिए सड़क पर आकर कभी नुक्कड़ नाटक करते हैं तो कभी स्कूल कॉलेजों में जाकर उन्हें सिखाते हैं। लोगों को इनसे प्रेरणा मिले और ट्रैफिक नियमों का पालन करें इसके लिए दैनिक भास्कर ऐसे ही कुछ लोगों को सामने ला रही है।

53 शार्ट फिल्म बना चुके राहुल,जज,आईएएस आईपीएस से करा चुके हैं एक्टिंग

डाॅ. राहुल पारीख शहर में ट्रैफिक जागरूकता के लिए 53 शार्ट फिल्म बना चुके हैं और उनके इस फिल्मों की खासियत यह है कि इनमें जस्टिस सहित आईएएस,आईपीएस,सीपीएस व अफसर तक एक्टिंग कर चुके हैं। राहुल पिछले 5 साल से पुलिस के साथ मिलकर ट्रैफिक सुरक्षा पर काम कर रहे हैं। उनके शार्ट फिल्म शहर के थियेटरों में चलाए जाते हैं। इनमें ड्रिंक एंड ड्राइवर ,मोबाइल फोन का यूज, रोड क्राश, रेड लाइट, अपर डिपर, ट्रिपलिंग बाइक राइड सहित अन्य शामिल हैं। राहुल को हाल में ही प्रदेश के गृहमंत्री ने इसके लिए पुरस्कृत भी किया है। उन्हें हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस से भी अवार्ड मिला है। राहुल को शहर के सड़कों पर सड़क सुरक्षा के लिए काम करते देखा जा सकता है। इन्होंने बहुत सारे इवेंट्स कराए हैं। थर्ड जेंडर के साथ मिलकर चौक-चौराहों पर हेलमेट जागरूकता कर काम करते हैं। संगीत के साथ भी लोगों को ट्रैफिक जागरूक करते हैं। मोबाइल से जागरुकता फैलाते हैं। उन्होंने कई बार ट्रैफिक के लिए बाइक रैली निकाली। उनका कहना है कि मैं एक डॉक्टर हूं तो बॉडी के बीमारियों को दूर कर सकता हूं पर समाज की बीमारियों को भी दूर करना भी काम है। रोड एक्सीडेंट में काफी लोगों की डेथ हो जाती है सोचा कि कैसे लोगों में जागरुकता लाई जाए और इसके लिए शार्ट फिल्म बनाना चुना। बोले बाबा फिल्म से शुरुआत की।

ट्रैफिक जागरूकता के लिए जुनून, सालों से कर रहे मेहनत



20 साल से सड़क सुरक्षा के लिए अकेली जुटी हुई हैं शहर की विद्या

तिलकनगर निवासी विद्या गोवर्धन पति शैलेंद्र गोवर्धन पिछले 20 साल से लोगों को सड़क हादसाें से बचाने के लिए काम कर रही है। 1982-83 में जब लोग यातायात थाने के बारे में कोई नहीं जानते थे तब वे ट्रैफिक वार्डन थीं। वर्तमान में रोज स्कूल कॉलेजों में जाकर छात्र-छात्राओं को ट्रैफिक सुरक्षा से संबंधित जानकारी देकर जागरूक कर रही है। उन्हें समझाती हैं फिर प्रश्न बनाकर परीक्षाएं लेती हैं। काॅलेजों में यातायात जागरुकता के मोना एक्ट करती हैं। इसमें तीन चार पात्रों का अभिनय एक साथ करना होता है। उन्होंने ट्रैफिक के लिए बेंगलुरु में जाकर काम किया है। पूना के लोगों ने हेलमेट लगाने से इनकार कर दिया था। विद्या वहां गईं और लोगों को जागरूक किया। स्कूल काॅलेजों में छात्र-छात्राओं को ट्रैफिक नियम पालन करने के लिए शपथ भरवाती हैं। जगह-जगह स्टाॅल लगाती हैं और इनाम भी बांटती हैं। उन्हें सीडी देती हैं। ट्रैफिक से संबंधित खिलौने गिफ्ट करती हैं। यह सब काम अकेले ही करती हैं। वर्तमान में वे सड़क सुरक्षा समिति की सदस्य हैं। छत्तीसगढ़ में स्पीड गवर्नर उन्हीं की देन है। 2009 में इसे प्रदेश सरकार ने उन्हीं के कहने पर शुरू किया था। वे ट्रैफिक व्यवस्था पर स्टडी करने टोक्यो, जर्मनी तक जा चुकी हैं। उनका कहना है कि शहर की सड़कों की हालत बहुत खराब है। सड़क पर कुत्ते व गाय बीच में बैठी होती है। रिफलेक्टर नहीं है। इसलिए अच्छे चलाने वाले लोग भी दुर्घटना के शिकार हो रहे हैं। उनका सड़क हादसे में घायल होने वालों के लिए अगल से ब्लड डोनेशन ग्रुप है।

बिलासपुर, गुरुवार 16 जनवरी, 2020 | 20

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