डेंगू और मलेरिया की दवाएं हुई खत्म अस्पतालों में हड़कंप, मरीज हलाकान

Bilaspur News - सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में मलेरिया और डेंगू की दवाएं खत्म हो गई हैं। इसके लिए वहां से हैल्थ डिपार्टमेंट...

Feb 15, 2020, 06:51 AM IST

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में मलेरिया और डेंगू की दवाएं खत्म हो गई हैं। इसके लिए वहां से हैल्थ डिपार्टमेंट को चिट्‌ठी लिखी गई है। परेशानी बताकर दवाओं की मांग हुई है। सीएमएचओ डॉ. प्रमोद महाजन का कहना है कि इसके लिए सीजीएमएसी को पत्र बढ़ा दिया गया है। जल्द ही दवाएं वहां पहुंच जाएंगी।

इससे पहले दैनिक भास्कर ने खबर में बताया था कि छत्तीसगढ़ सरकार ने बस्तर को छोड़कर कहीं भी मलेरिया उन्मूलन का आयोजन नहीं कराया है। इसकी बड़ी वजह महकमे से जुड़े विभागों में दवाओं की कमी है। बिलासपुर का मलेरिया दफ्तर और इनके अधिकारी लगातार केंद्र सरकार को चिट्‌ठी लिखकर यहां की स्थिति बता रहे हैं। उन्हें सारा डेटा भेजकर समझाया जा रहा है कि यहां मच्छर मारने की दवाइयां खत्म हो चुकी है। इसलिए अंचल में मलेरिया और डेंगू का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। फिर भी कोई इसकी ओर ध्यान देने को तैयार नहीं है। दवा का नाम सिन्थेटिक पैराथायराइड है। इसे मलेरिया विभाग की भाषा में एसपीओ कहते हैं। यही दवा पूरे छत्तीसगढ़ के लाखों लोगों को मलेरिया और डेंगू जैसी खतरनाक बीमारियों से बचाकर रखी है। जरूरत पर डीडीटी का इस्तेमाल होता है। पर ये पहले लिखी दवा से कम कारगर है। मलेरिया विभाग ने फजीहत से बचने के लिए इसी दवा का छिड़काव कोटा और उन गांवों में करवाया है जो मलेरिया और डेंगू को लेकर संवेदनशील माने जाते हैं। मलेरिया विभाग के अफसरों का दावा है कि उनके फील्ड वर्कर कई स्थानों पर डोर टू डोर पहुंचकर मलेरिया और डेंगू पॉजिटिव की पहचान करने में जुटे हैं। उनके पास माइक्रो मशीनें उपलब्ध हंै। इसी से पुष्टि की जा रही है। इसके बाद उन्हें राहत के लिए उपचार और दूसरे एहितयात बतरने की सलाह दी जा रही है।

सीजीएमएससी से दवाओं की मांग हुई है


डेंगू पॉजिटिव की पहचान करने में जुटे हैं। उनके पास माइक्रो मशीनें उपलब्ध हंै। इसी से पुष्टि की जा रही है। इसके बाद उन्हें राहत के लिए उपचार और दूसरे एहितयात बतरने की सलाह दी जा रही है।

कोटा क्षेत्र संवेदनशील

मलेरिया और डेंगू पर कोटा और पेंड्रा का एरिया संवेदनशील माना गया है। कुछ साल पहले कोटा में 5 हजार लोगों की जांच में 800 से अधिक लोग मलेरिया पॉजिटिव मिले थे। कइयों की मौत भी हुई थी। इसके बाद ही सरकार ने इस क्षेत्र पर ध्यान देना शुरू किया। यहां भी मलेरिया विभाग ने मच्छर भगाने का अभियान नहीं चलाया है।

आंकड़े ये बता रहे

बॉक्स मलेरिया विभाग के आकंड़ों पर यकीन करें तो यहां 205 मरीज मिले हैं। ये आंकड़े सिर्फ जनवरी से जुलाई तक के हैं। इसी तरह डेंगू के 25 मरीज पाए गए हैं। हर दिन जिला अस्पताल और सिम्स में दोनों ही बीमारियों के मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। समझा जा सकता है कि दोनों बीमारियों की स्थिति कितनी भयावह है।

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