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आठ साल से एटीआर के गांव का विस्थापन सिर्फ कागजों में, मंजूरी मिल भी गई तो दो साल और लगेंगे

2 वर्ष पहले
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914 वर्ग किलोमीटर में फैले अचानकमार टाइगर रिजर्व में बाघों की घटती संख्या के लिए जिम्मेदार कारणों में जंगल के अंदर पारंपरिक बैगा आदिवासियों का निवास है। बाघों की संख्या बढ़ाने के लिए जरूरी है कि जंगल में उसके लिए उन्मुक्त वातावरण तैयार किया जाए। इसीलिए एनटीसीए जंगल से आदिवासी गांवों के विस्थापन की सिफारिश करता है। इसके लिए कड़े दिशा निर्देश भी हैं। एटीआर में 8 सालों से गांवों को विस्थापित करने की योजना फाइलों पर चल रही है। मामला मंजूरी तक नहीं पहुंचा। तीन गांवों के 133 परिवारों को विस्थापित करने का प्रस्ताव शासन के पास लंबित है। डीएफओ संदीप बल्गा के मुताबिक प्रस्ताव स्वीकृत होने के बाद गांवों को विस्थापित करने में दो साल और लगेंगे।

एक्सपर्ट बोले- जंगल में लोगों की रिहायश बाघों की घटती संख्या की बड़ी वजह
2011 में हुए थे छह गांव विस्थापित
सेंचुरी से टाइगर रिजर्व घोषित हाेने के बाद सिर्फ एक बार छह गांवों को विस्थापित किया गया है। 2009 से 2011 यानी दो सालों में बाकल, बोकराकछार, सांभर धसान, बहाउड़, जल्दा और कूबा गांव के 249 परिवारों को एटीआर के बाहर खुडि़या, डोंगरी, जूनापारा, कठमुड़ा, केंवची और आमाडोल में शिफ्ट किया गया।

पहले इन गांवों को करेंगे विस्थापित
पहले पांच गांवों को सारसडोल, राजक, बिरारपानी, छिरहटा और तिलईडबरा को विस्थापित करने का प्रस्ताव था। मंजूर नहीं हुआ तो फिर तीन गांवों छिरहटा, बिरारपानी और तिलई डबरा को जंगल से हटाने के लिए भेजा गया। जो अभी तक मंजूर नहीं हो पाया है। तीन गांवों के 133 परिवार को विस्थापित करने की प्रक्रिया चल रही है।

16 और बचेंगे: अगर तीन गांव किसी तरह विस्थापित हो भी गए तो 16 और ऐसे गांव हैं जिन्हें हटाया जाना है। इनमें सारसडोल, राजक, रंजकी, अतरिया, लमनी, सुरही, महामाई, कटामी, बम्हनी, जाकड़बांधा, निवासखार, डगनिया, बिरारपानी, अतरिया-2, छपरवा और अचानकमार शामिल है।

एक्सपर्ट: मवेशियों के चलते वन्यजीवों में संक्रमण का खतरा

गांव के लोग जंगल में मवेशी चराते हैं, जिससे वन्यजीवों के लिए घास नहीं बच पाती, भोजन की तलाश में वे इधर-उधर भाग जाते हैं। पालतू जानवरों को जो बिमारी होती है, वह वन्यप्राणियों में फैल जाती है। गांव के लोग शिकार के लिए जल स्त्रोत में जहर डालने की कोशिश करते हैं। जंगल में आवागमन से बाघ तथा अन्य वन्यप्राणियों की जीवनशैली प्रभावित होती है। इसीलिए बाघ दूसरी जगह शिफ्ट हो जाते हैंं। एटीआर और कान्हा के बीच टाइगर कारीडोर बनाने इसीलिए जोर दिया गया है, ताकि उनका संरक्षण किया जा सके।

  संदीप बल्गा, डीएफओ बिलासपुर

गांव विस्थापित क्यों नहीं हो पा रहे?

-कारण बहुत हैं। लेकिन ये प्रक्रिया धीमी है। 3 गांव का प्रस्ताव भेजा है।

तो कब तक हो पाएंगे?

-प्रस्ताव स्वीकृत होने के बाद दो साल और लगेंगे।

प्रस्ताव क्यों मंजूर नहीं हो पा रहा?

-बीच में कुछ आपत्ति हुई थी लेकिन अब मंजूर हो सकता है।

प्रस्ताव भेजने के बाद उसके बारे में कभी पता लगाया आपने?

-तीन चार बार पता लगा चुके हैं। केंद्र सरकार एक साथ कई गांव को मंजूरी नहीं दे रही है। इसलिए तीन गांव का प्रस्ताव भेजा है।

क्या गांव के लोग जाना चाहते हैं कि जबरदस्ती भेज रहे हैं?

-नहीं गांव के लाेग अपनी मर्जी से जाना चाह रहे हैं।

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