घर म बाम्हन चिरई हर ठउर बनाए रहिस

Bilaspur News - का होगे आज चिरई मन के आरो नई आथे, बिहनिया कन देखे रहेंव फेर तीन बजथे आये कैसे नई हे, सही कहथा हो महु नई सुने हव, लगथे आज...

Bhaskar News Network

Nov 11, 2019, 06:46 AM IST
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का होगे आज चिरई मन के आरो नई आथे, बिहनिया कन देखे रहेंव फेर तीन बजथे आये कैसे नई हे, सही कहथा हो महु नई सुने हव, लगथे आज डारा पानी लेहे बर दुरिहा चल दिन काय। बात होथे मनसुख घर के जिहा खिड़की मेर बाम्हन चिरई अपन ठउर बनाये रहिस, रोज संझा बिहनिया अउ मंझनिया खाली इंखर अवाई अउ जवाई। बड़े बिहनिया इंखर आरो पाके घर के सब मनखे उठ जातिन, फेर ये सब मनसुख के छोटे बेटा राजा ल एको कनी नई भात रहिस, ओखर कहना रहय के मोर सुते के बेरा म इंखर चांव चांव मोला एको कनी बने नई लगय मन करथे के ये खोन्दरा ल कोनो डहर फेक देतेव फेर बाबूजी के खातिर का करव ओला तो हमर ले जादा ये चिरई मन मेर मया हे। दिन बीतत गइस एक दिन चिरई के आरो नई मिलीस मनसुख सोचिस कोनो डहर भुलागे होही, बिहान दिन आ जाही फेर एक दिन होंगे, दु दिन होगे ऐसे तैसे छै सात दिन होगे फेर चिरई के आरो बर मनसुख के कान तरसे लगीस। खेत खार के काम बुता ले मनसुख जब लहुटतीस त तुरंते पुछतीस के आज चिरई मन आइन का, जवाब मिलतीस आजो नइ आये हे हो। ऐसे तैसे 5-6 महीना निकल जाथे फेर चिरई मन के कोनो पता नइ चलय, एक दिन मनसुख बड़ उदास मन से कइथे, चिरई मनला देखे छै महीना होगे उंखर आरो बर कान तरस गे, ऐसे लगथे जना मना परिवार के कोनो मनखे गंवा गे, फेर मय का करे सकथव कोनो मनखे गवातीस त थाना म रिपोर्ट लिखा देतेव फेर इंखर बर का करव कोन जनी काखर सेती ये चिरई मन कहा गंवा गे, मोर डेहरी के रद्दा भुलागे। एक दिन बड़े भिनसारे उठके मनसुख खेत चल देथे, काम बुता ल उसराके बिहनिया 9 बजे घर हबरथे, घर म आके का देखथे छोटे टुरा राजा सूत के नई उठे हे, मनसुख के देखते साथ जीव आगी बर जाथे, अउ खिसिया के कथे कस रे परीक्छा लकठियागे हे अउ तोला आराम ले फुरसत नई हे, चिरई मन रहय त बिहाने ले उठ ज़ात रहे, अब का होंगे हे तोला बिहनिया के 9 बजथे पूरा पारा - मोहल्ला उठ गे हे फेर ये साहब ल देख त कोनो चिंता फिकर नई हे, चल उठ। बात ल सुनके डर के मारे राजा उठ जाथे, अउ सौकेरहे मुह हाथ धोके पढ़े बर बैठ जाथे, फेर ये सब खाली देखाए बर, जइसनहे मनसुख खेत कोती जातिस राजा फेर सुते बर चल देतिस ओ बड़ आलसी हो गे रहिस। अपन ये गलती सुधारे बर काली चिरई के खोन्दरा बनाहू अउ भगवान मेर बिनती करहु के फेर हमर घर म चिरई के आरो आतिस। बिहानदिन राजा चिरई के खोन्दरा बना डारिस अउ रोज ओमा पानी अउ दाना डारे लगीस, महीना भर बाद फेर घर म चिरई के आरो आये लगीस, अब सबके जिनगी फेर खुसी खुसी बीते लगीस।

बालमुकुन्द श्रीवास रतनपुर, बिलासपुर

सिखौना

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