गर्मी धान से किसानों का होने लगा मोहभंग
किसानों ने 1685 हेक्टेयर में मक्का और 10255 हेक्टेयर में लगाया गेहूं
कृषि विभाग के आंकड़ों पर गौर करने पर लग रहा है कि किसानों का गर्मी धान से मोहभंग होने लगा है। पिछले साल 9585 हेक्टेयर तो इस बार 6721 हेक्टेयर में ग्रीष्म धान लगाया गया है। यानी
पिछली बार की तुलना में यह 2864 हेक्टेयर कम है। वहीं 1685 हेक्टेयर में किसानों ने मक्का तो 10255 हेक्टेयर में गेहूं लगाया है। यह एक अच्छा संकेत है। दरअसल धान की खेती में सबसे ज्यादा पानी लगता है। यह हम नहीं बल्कि
जानकार कहते हैं। इस बार रबी फसल के अंतर्गत कुल 18हजार661 हेक्टेयर में अनाज की खेती हो रही है। इसमें 10255 हेक्टेयर में गेहूं तो 1685
हेक्टेयर में मक्का और 6721 हेक्टेयर में धान शामिल है। पिछले साल 6541 हेक्टेयर में गेहूं था यानी 3714 हेक्टेयर गेहूं का
रकबा बढ़ा है। विशेषज्ञों के मुताबिक
एक हेक्टेयर में धान की खेती करने में एक करोड़ लीटर यानी दस
हजार क्यूबिक मीटर पानी खर्च होता है। इतने पानी में 6 हेक्टेयर में चना या सरसो तो 4 हेक्टेयर में किसान गेहूं उगा सकते हैं। सरकार गर्मी
फसल का धान खरीदती नहीं है, ऐसे में चना, सरसो या गेहूं की खेती कर किसान ज्यादा
आमदनी पा सकते हैं। कृषि विभाग के उप संचालक शशांक शिंदे के मुताबिक धान से कहीं अधिक मुनाफा गेहूं और मक्का की
खेती करने में है। धीरे-धीरे
बदलाव होगा।